छत्तीसगढ़  / जशपुर नगर में 82 प्रजातियों की तितलियों के लिए बनेगा तितली पार्क और रिसर्च सेंटर



कॉमन ओनिक्स प्रजाति की तितली कॉमन ओनिक्स प्रजाति की तितली
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कॉमन ओनिक्स प्रजाति की तितलीकॉमन ओनिक्स प्रजाति की तितली

  • तितली की प्रजातियों का होगा संरक्षण : जिला प्रशासन और जशपुर वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन की पहल पर प्लानिंग शुरू 
  • जिले में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजाति को लेकर लगातार जारी है शोध, कलेक्टर ने भी तितलियों की कई प्रजाति तलाशी

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 11:18 AM IST

जशपुरनगर. तितलियों की विभिन्न प्रजातियों को आने वाली पीढ़ी मोबाइल पर या किसी चित्र के माध्यम से केवल देखे ऐसा न हो इसके लिए जिले में तितलियों की प्रजातियों को सहजने और रख-रखाव के लिए तितली पार्क बनाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। पहले तितलियां आम तौर पर बागों में देखने को मिल जाती थी पर अब यह धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। तितलियों की प्रजातियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और जशपुर वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन की विशेष पहल पर प्लानिंग शुरू की गई है। 

37 दिनों तक सर्वे कर तैयार की है रिपोर्ट, कई प्रजातियों की तितली ढूंढी

  1. आने वाले समय में तितलियों पर विशेष शोध हो सके इसके लिए वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा तितली अनुसंधान केन्द्र की मांग भी की गई है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जशपुर वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन संयुक्त रूप से तितलियों पर शोध कर रहे हैं। जशपुर वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने बताया कि जशपुर में में पर्यावरण एवं जलवायु तितलियों के लिए बहुत ही अनुकूल है। यहां विभिन्न प्रजातियाें की तितलियां पाई जाती है। 

  2. जशपुर वाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन एवं रायपुर से आए तितली विशेषज्ञ अनुपम सिंह ने तितलियों की प्रजाति की जानकारी एकत्र करने 37 दिनों तक सर्वे किया गया। इस दौरान कलेक्टर क्षीरसागर ने भी तितलियों की कई प्रजाति स्वयं ढूंढा। सौरभ सिंह ने बताया कि इस कार्य के लिए उन्हें दिन और रात दोनों समय निकला पड़ा क्योंकि कुछ ऐसी तितलियां हैं जो अलग-अलग समय पर ही देखने को मिलती है। इनके संरक्षण का सबसे बड़ा फायदा आने वाली पीढ़ी को मिलेगा। 

  3. जानिए कौन सी प्रजातियां लोकल और कौन बाहरी 

    इस सर्वेक्षण में कामन ओनिक्स, इंडिगो फ्लैश तथा स्माल क्यूपिड, तितलियों की यह तीन ऐसी प्रजाति पाई गई, जिससे इनके वितरण क्षेत्र में जशपुर का नाम पहली बार जुड़ रहा है। ये प्रजातियां अब तक पश्चिमी घाट, हिमालय तराई क्षेत्र और अंडमान निकोबार जैसे इलाकों से ही ज्ञात थीं। इसी तरह जिले में अब तक एंगल्ड सनबीम, प्लम जूड़ी, फलफी टीट, पिकोक राॅयल, गोडी बेराॅन, पेंटेट लेडी, रेड स्पाॅट, हेज ब्लू, इंडियन ओकब्लू की प्रजातियां मिली है। 

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