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रायगढ़ में महापौर का गणित न बिगाड़ दे भाजपा, इसलिए पार्षदों को कांग्रेस ने रायपुर भेजा

7 महीने पहले
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रायगढ़ नगर निगम
  • नगरीय निकाय चुनाव : नगर निगम में बहुमत 25 पर, कांग्रेस ने शहर के 24 वार्डों में दर्ज की है जीत
  • भाजपा के 19 पार्षद चुनकर आए, उसे 5 निर्दलियों के भी अपने खेमे में आने का भरोसा
  • प्रदेश के 47 निकायों में निर्दलीय दमदार, कई स्थानों पर तो निर्दलीयों ने दलों को भी पीछे छोड़ा
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रायगढ़. छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय के परिणाम आने के साथ ही अब महापौर की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। रायगढ़ नगर निगम में 48 वार्ड हैं। इनमें से 24 वार्ड में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, जो कि बहुमत से महज एक कदम दूर है। वहीं भाजपा को 19 सीटें मिली हैं और वह निगम में 6 सीटों से पीछे है। इन सबके बीच निर्दलीय पार्षदों की संख्या 5 है। अब शहर की सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते भाजपा व कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने पार्षदों की किलेबंदी शुरू कर दी है। 

1) कांग्रेस को भाजपा के लोटस अभियान का डर, पार्षद नजरबंद किए गए

कांग्रेस को भाजपा के लोटस अभियान से भय है। इसे देखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष और रायगढ़ विधायक ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रदेश में सत्ता होने के बाद भी कांग्रेस खरीद-फरोख्त (होर्स ट्रेडिंग) से डरी हुई है। पार्षदों को नजर बंद किया जाने लगा है। कुछ पार्षदों के मोबाइल फोन बंद हैं तो कुछ ने विधायक के घर शरण ली है। महापौर चुने जाने तक कांग्रेस ने अपने नव निर्वाचित पार्षदों को रायपुर भेजा है। वहीं ओडिशा पिकनिक ट्रिप के तौर पर भेजा जा रहा है, इनमें परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। 

निगम चुनाव में जीत कर आए पांच पार्षदों पर दोनों ही पार्टियों ने निगाहें हैं। इनमें अधिकतर भाजपा के बागी या करीबी हैं। कांग्रेस को इस बात की आशंका है कि भाजपा इन 5 निर्दलीयों को साथ कर 24 के आंकड़े तक पहुंच जाएगी। ऐसे में बहुमत 25 पाने के लिए कांग्रेस पार्षदों को तोड़ेगी। इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है। कांग्रेस के एक-दो पार्षदों ने भी क्रॉस वोटिंग कर दी तो सारी मेहनत और सफलता पर पानी फिर जाएगा। 

प्रदेश के नगर निगमों के साथ ही 40 से ज्यादा नगर पालिका और नगर पंचायतों में सरकार बनाने की चाबी निर्दलीयों के पास है। हालात तो यह हैं कि कई जगह पर निर्दलीय जीते पार्षद भाजपा और कांग्रेस से भी आगे निकल गए हैं। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा ने जद्दोजहद शुरू कर दी है। नगर पंचायत बस्तर में भाजपा एक तो कांग्रेस 6, लेकिन 8 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। महासमुंद में 14 पर भाजपा, 8 पर कांग्रेस, 5 निर्दलीय, 2 जोगी कांग्रेस, एक अन्य की जीत हुई है। बागबाहरा में 5 पर निर्दलीय, 4 कांग्रेस और 6 भाजपा और नगर पंचायत बसना में 7 वार्डों से निर्दलीय, जबकि भाजपा 3 और कांग्रेस 5 वार्डों से जीती है। 

बलौदाबाजार के नगर पंचायत टुंडरा में कांग्रेस-भाजपा को 7-7 सीटें मिली हैं। इसी तरह नगर पंचायत साजा में 6-6 सीटें मिली हैं। नगर पंचायत गंडई, सहसपुर लोहारा, पिपरिया, दोरनापाल, नई लेदरी, बिल्हा, नगर पालिका तखतपुर और कटघोरा में दोनों दलों को 7-7 सीटें मिली हैं। यहां दोनों में से कोई भी दल एक निर्दलीय को साथ लेकर अध्यक्ष के पद पर कब्जा करने की स्थिति में है। पेंड्रा में कांग्रेस और भाजपा को 4-4 सीटें मिली हैं, जबकि जनता कांग्रेस को 4 और 3 निर्दलीय जीते है। यहां पर तगड़ी लॉबिंग शुरू हो गई है। खरौद में भी कांग्रेस और भाजपा 5-5 सीटों पर है, जबकि 5 निर्दलीय हैं। 

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