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प्रदेश में मृतकों के नाम पर हर माह दुकानों से ले रहे थे तीन करोड़ रुपए कीमत का 11 हजार क्विंटल चावल

Raigad News - बिलासपुर में 467 तो प्रदेश के 39 हजार ऐसे राशनकार्ड से हर माह 11 हजार क्विंटल चावल उठाव किया जा रहा था, जिसके मुखिया की ही...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:33 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news 11 thousand quintals of rice worth three crore rupees were taken from shops every month in the name of the dead in the state
बिलासपुर में 467 तो प्रदेश के 39 हजार ऐसे राशनकार्ड से हर माह 11 हजार क्विंटल चावल उठाव किया जा रहा था, जिसके मुखिया की ही मौत हो चुकी थी। यानी जिसके नाम पर राशनकार्ड था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। मृतकों के नाम पर राशन लिए जाने का खुलासा डोर-टू-डोर सत्यापन से हुआ है। इससे पहले भी मृतकों के नाम पर राशन लिए जाने की शिकायतें मिलती रहीं लेकिन खाद्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजा ऐसे मामले बढ़ते ही चले गए।

प्रदेश में 58 लाख 56 हजार 418 राशनकार्ड के सत्यापन के लिए शिविर लगाया गया। इसके लिए सभी राशन कार्डधारियों का राशनकार्ड अपडेट करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए जुलाई में शिविर लगाया गया और इसके साथ ही सत्यापन के लिए कर्मचारी राशन कार्डधारियों के घर गए। उन्होंने पांच केटेगरी में एक तरह से सर्वे किया। इसमें पहला आवेदक के नाम पर अन्य राशनकार्ड में सदस्य या मुखिया के तौर पर दर्ज है। दूसरा मुखिया की मृत्यु हो चुकी है, तीसरा पात्रता का आधार सही नहीं है और चौथा आवेदन बताए गए पते पर नहीं मिला। सबसे अंतिम और पांचवां आवेदन नहीं मिला। इस आधार पर सर्वे होने पर यह पता चला कि प्रदेश में कुल 39 हजार 29 कार्ड तो इसलिए अपात्र हो गए क्योंकि उस परिवार के मुखिया की मृत्यु हो चुकी है। यदि एक कार्ड में चार सदस्य मान लें तो प्रति सदस्य सात किलो के हिसाब से 28 किलो चावल प्रति कार्ड हर माह दिया जा रहा था। इस तरह करीब 11 हजार क्विंटल चावल का उठाव हो रहा था। बाजार में एक क्विंटल चावल की कीमत तीन हजार रुपए मान लें तो माह प्रदेश में 3 करोड़ 27 लाख 92 हजार 760 रुपए के चावल की हेराफेरी हो रही थी। मृतकों के नाम पर चावल लेने के मामले में महासमुंद सबसे आगे हैं। 4879 राशनकार्ड महासमुंद में मिले। दूसरे नंबर पर रायगढ़ रहा। वहां 4688 कार्ड मृतकों के नाम पर मिले। प्रदेश के 27 जिलों में सबसे कम कार्ड 180 बीजापुर जिले में मिले। ऐसा माना जा रहा है कि इन राशनकार्ड से हर माह शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक चावल का उठाव कर उसे बाजार में खपा रहे थे। अब चूंकि सत्यापन में यह सामने आ चुका है इसलिए अब राशनकार्ड रद्द हो जाएगा।

30 हजार 502 लोग बताए गए पते पर नहीं मिले, कई के नाम दूसरे कार्ड पर मिले

भास्कर ने खबरें प्रकाशित कर पहले ही किया खुलासा

दैनिक भास्कर ने समय-समय पर खबरें प्रकाशित कर इस बात का खुलासा किया था कि बड़े पैमाने पर मृतकों के नाम पर राशनकार्ड हैं और हर माह करोड़ों का चावल उठाव किया जा रहा है। मसलन 2012 में भास्कर ने खबर प्रकाशित कर बताया कि रतनपुर में पांच-छह सालों से हर महीने 1393 राशनकार्डों से चावल,गेहूं और शक्कर का उठाव हो रहा है। यह भी बताया कि हर साल करीब सवा करोड़ रुपए का घोटाला हो रहा है और जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं सितंबर 2013 में शहर से कुछ किलोमीटर दूर ग्राम हांफा में 599 फर्जी कार्ड जिनमें अधिकांश मृतक हैं, इनके नाम पर राशनकार्ड होने का खुलासा किया था। इसके बाद वहां सत्यापन करने पर गड़बड़ी सामने आई। राशनकार्ड रद्द किए गए।

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