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हर महीने 30 लाख रुपए सफाई, 4 लाख लार्वा कंट्रोल में होते हैं खर्च, शहर में फिर भी मच्छरों का प्रकोप

एक वर्ष पहले
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नगर निगम हर महीने वार्डों से कचरा उठाने, गारबेज की सफाई, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और वाहनों पर 30 लाख रुपए खर्च करता है। लार्वा कंट्रोल निपटने चार लाख रुपए से ज्यादा दवा और फॉगिंग पर खर्च हो रहे, लेकिन मच्छर कम नहीं हो रहे हैं। शहर में बारिश के बाद तापमान गिरने से मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। पूरा शहर मच्छरों के से परेशान है। शाम को मच्छरों से निपटने लोग खिड़की दरवाजे बंद कर धुआं समेत ढेरों उपाय कर रहे हैं। बीते एक सप्ताह से हर दूसरे दिन बारिश हो रही है। इससे खाली जगहों में बारिश का पानी जमा है। ड्रेनेज का गंदा पानी भी ओवरफ्लो होकर खाली जगहों में जमा हो गए हैं। इन जगहों का तापमान कम होने के कारण मच्छरों का लार्वा आसानी से पनप रहा है। मलेरिया प्रभारी ने बताया कि मच्छरों के लार्वा के लिए 16 से 27 डिग्री तापमान ज्यादा अनुकूल होते हैं। शहर में कुल 48 वार्ड है, इनमें से 10 से ज्यादा पार्षदों से दैनिक भास्कर ने उनके वार्डों में सफाई व्यवस्था और मच्छरों को कंट्रोल करने के लिए किए जा रहे उपाय की जानकारी ली। अधिकांश पार्षदों ने बताया कि मच्छर ज्यादा है।

10 वार्ड पार्षदों ने बताई निगम सच्चाई


पार्षद- फॉगिंग मशीन एंटी लार्वा दवा {पूनम सोलंकी- नहीं चली 1 लीटर दवा दिए

{लक्ष्मी साहू- दो दिन होली के पहले

{प्रभात साहू- नहीं चली दो बार छिड़काव

{मेहश कंकरवाल- नहीं चली 15 दिन पहले

{अनुपमा शाखा यादव- दो दिन पहले दवा डाली है

{संजना शर्मा- नहीं चली दवा नहीं डाली है

{संजय देवांगन- नहीं चली नहीं डाली है

{कमल पटेल- नहीं चली 12 दिन पहले

{पिंकी विमल यादव- चुनाव से पहले नहीं डाली दवा

{आरिफ हुसैन- नहीं चली बोलने के बाद

उधार की फॉगिंग वापस भेजी अब सिर्फ दो शेष

सितंबर में नगर निगम में डेंगू के मरीज बढ़ने के बाद नगरीय निकायों से फॉगिंग मशीनें उधार ली थी। अब सभी निकायों को वापस भेज दिए गए हैं। निगम के पास दो मशीनें ही शेष रह गई है। दोनों मशीनें ठीक है, लेकिन निगम इनका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर रहा है। यह मशीनें वाहन शाखा में धूल खा रही है और शहर में लोग मच्छरों के दंश से परेशान हैं।

अफसरों के बंगलों में नियमित फॉगिंग

बीजेपी पार्षदों ने निगम के अफसरों पर यह भी आरोप लगाया है कि निगम नियमित अधिकारियों के बंगलों में फॉगिंग और दवा दोनों छिड़काव करा रही है, लेकिन वार्डों में जहां दो से ढाई हजार लोग रहते हैं। वहां सिर्फ एक लीटर दवा दी जाती है। जो पर्याप्त नहीं है। ज्यादातर वार्डों में बीते तीन माह में एक बार भी फॉगिंग नहीं चलाई गई है।

बेहतर ड्रेनेज नहीं होना सबसे बड़ा कारण

शहर में कहीं भी बेहतर ड्रेनेज नहीं होने की वजह से मच्छरों का आतंक ज्यादा है। ड्रेनेज व्यवस्थित होते तो बारिश और घरों से निकलने वाली निस्तारी का पानी सीधे नदी में गिरता, लेकिन शहर के अधिकांश जगहों पर नालियों पर कब्जा है। तो कहीं उसे पाटकर दीवार और मकान बना ली गई है।

लक्ष्मीपुर कार्मेल स्कूल के पास सड़क पर आया नाली का पानी।

मुझे आए हुए 15 दिन ही हुए हैं

भूपेश सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम

बचाव के लिए हम यह करें

{मलेरिया, फाइलेरिया और डेंगू फलने वाले मच्छरों से बचाव के लिए घर के नजदीक जमा पानी खाली करें।

{घर के सामने नालियों में जला हुआ ऑयल व मिट्टी तेल डाले, यह पानी के ऊपर एक फिल्म का काम करेगी और लार्वा पनप नहीं पाएगा।

{मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए सेप्टिक टैंक के ऊपर गैस पाइप में मच्छरदानी के कपड़े का टुकड़ा बांध दे।

{डेंगू व मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर त्वरित स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों से जांच कराएं।
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