56 हजार एकड़ की सिंचाई का लक्ष्य, पांच सालों में 12 हजार तक भी नहीं पहुंच सके

Raigad News - केलो परियोजना में शुरुआत से ही कई तकनीकी गलती हुई हैं। इससे डैम से सिंचाई का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। 972 करोड़...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:20 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news 56 thousand acres of irrigation target could not reach even 12 thousand in five years
केलो परियोजना में शुरुआत से ही कई तकनीकी गलती हुई हैं। इससे डैम से सिंचाई का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। 972 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के डीपीआर में नहरों की लाइनिंग ही शामिल नहीं है। मुख्य नहर में ही कुछ दूरी तक नहर की लाइनिंग का काम शामिल था। इस कारण बांध से पानी छोड़ने के बाद बावजूद रफ्तार से किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे 5 सालों से सिंचाई का रकबा भी 5 हजार हेक्टेयर से आगे नहीं बढ़ सका है।

दरअसल केलो परियोजना से रायगढ़-जांजगीर जिले के 175 गांव के 56 हजार 364 एकड़ में पानी पहुंचना है। मगर बीते पांच सालों में केलो हर साल 12 हजार एकड़ तक ही सिंचाई के लिए पानी दे पा रहा है। अधिकारी इसे नहर पूरा नहीं होने के कारण मानते है। मगर इसकी एक बड़ी वजह नहरों में लाइनिंग वर्क ही नहीं होना है। परियोजना की शुरुआत 2003 में हुई। इसके डीपीआर बनाने के दौरान तत्कालीन लोगों ने मुख्य नहर में केवल 7 किलोमीटर तक ही लाइनिंग काम फाइनल किया। इसके अलावा ब्रांच केनाल झारमुड़ा में कुछ दूरी तक लाइनिंग वर्क करने का आदेशित था। ऐसे में जिन जगहों में लाइनिंग काम नहीं हुआ। वहां पानी का रफ्तार काफी कम हो जाता है। पानी का नुकसान जयादा होने के कारण उतनी मात्रा में पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता, जितना पहुंचना चाहिए। यही कारण है कि बीते पांच सालों में 2014 से अभी तक हम 5 हजार हेक्टेयर से आगे नहीं बढ़ पा रहे है।

लाइनिंग वर्क नहीं होने से नहर के ऊपर का मिट्टी हर साल धीरे-धीरे पटता जाता है। ऐसे में पूरी नहर ही समतल हो जाती है। कलमी से बरमुड़ा के बीच की नहर भी कई जगहों पर पट गई थी, जिसे दोबारा खोदा गया है। सालों पहले खुद चुकी थी। इसी तरह से अन्य जगहों पर भी काम किया जा रहा है।

पटी हुई नहर की दोबारा खुदाई करते मजदूर

विशेषज्ञों के अनुसार लाइनिंग वर्क से नहर को होने वाले फायदे


परियाेजना में नहरों की लंबाई

मुख्य नहर- 28 किमी

ड्रिस्ट्रीब्यूटरी- 165 किमी

माइनर-215 किमी

हर साल का सिंचाई रकबा

2014-4500 हेक्टेयर

2015-3935 हेक्टेयर

2016-4005 हेक्टेयर

2017-4000 हेक्टेयर

2018-4302 हेक्टेयर


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