• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Raigad
  • Raigarh News chhattisgarh news after returning to the temple mahaprabhu jagannath and balabhadra subhadra appeared in gold decoction

मंदिर लौटने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ और बलभद्र, सुभद्रा ने सोना भेष में दिए दर्शन

Raigad News - मौसी के घर से शुक्रवार को लौटे महाप्रभु जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा ने शनिवार को सोना भेष में दर्शन दिया।...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:20 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news after returning to the temple mahaprabhu jagannath and balabhadra subhadra appeared in gold decoction
मौसी के घर से शुक्रवार को लौटे महाप्रभु जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा ने शनिवार को सोना भेष में दर्शन दिया। राजापारा स्थित जगन्नाथ मंदिर में शाम से रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। अब देव सो चुके हैं, हिंदू मान्यताओं के अनुसार अब शुभ कार्य निषेध रहेंगे। देवउठनी एकादशी के बाद देव जागेंगे और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। जगन्नाथ मंदिर में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा देवशयनी एकादशी पर सोना भेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह जगन्नाथ पुरी की परंपरा है। मान्यता के मुताबिक भगवान मौसी के घर से लौटने के बाद शयन पर जाने से पहले महाराजाओं का वेश धारण करते हैं और श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।

मंदिर के पं. सुदाम पंडा ने बताया कि भाई-बहन के साथ महाप्रभु जगन्नाथ के मौसी घर जाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। उन्हें मनाने के लिए जगन्नाथ कई जतन करते हैं। लक्ष्मी को मनाने के बाद भगवान सोने के आभूषण धारण करते हैं, जिन्हें लक्ष्मी का ही प्रतीक माना जाता है। उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के देवेश षडंगी ने बताया कि पिछले वर्ष ओडिशा के कलाकारों द्वारा आभूषण बनवाकर वहां से आए कलाकारों ने महाप्रभु को सजाया था। इस वर्ष समाज के लोगों ने ही महाप्रभु को सोने के आभूषण से सजाया, इसके पश्चात रसगुल्ले का भोग लगाया गया।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

मौसी के घर से शुक्रवार को लौटे महाप्रभु जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा ने शनिवार को सोना भेष में दर्शन दिया। राजापारा स्थित जगन्नाथ मंदिर में शाम से रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। अब देव सो चुके हैं, हिंदू मान्यताओं के अनुसार अब शुभ कार्य निषेध रहेंगे। देवउठनी एकादशी के बाद देव जागेंगे और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। जगन्नाथ मंदिर में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा देवशयनी एकादशी पर सोना भेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह जगन्नाथ पुरी की परंपरा है। मान्यता के मुताबिक भगवान मौसी के घर से लौटने के बाद शयन पर जाने से पहले महाराजाओं का वेश धारण करते हैं और श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।

मंदिर के पं. सुदाम पंडा ने बताया कि भाई-बहन के साथ महाप्रभु जगन्नाथ के मौसी घर जाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। उन्हें मनाने के लिए जगन्नाथ कई जतन करते हैं। लक्ष्मी को मनाने के बाद भगवान सोने के आभूषण धारण करते हैं, जिन्हें लक्ष्मी का ही प्रतीक माना जाता है। उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के देवेश षडंगी ने बताया कि पिछले वर्ष ओडिशा के कलाकारों द्वारा आभूषण बनवाकर वहां से आए कलाकारों ने महाप्रभु को सजाया था। इस वर्ष समाज के लोगों ने ही महाप्रभु को सोने के आभूषण से सजाया, इसके पश्चात रसगुल्ले का भोग लगाया गया।

रसगुल्ले का भोग लगाया गया

देवशयनी एकादशी पर सोना भेष में भगवान की पूजा के साथ ही जगन्नाथ को रसगुल्ले का भोग लगाया जाता है। पुरी में भी यही परंपरा है। ओडिशा का तर्क था कि 12वीं सदी में पुरी के जगन्नाथ मंदिर में मडलापंजी में रसगुल्ले के भोग लगाने का जिक्र है। देवशयनी एकादशी पर तब से ही रसगुल्ले का भोग लगता है, लेकिन 1868 में कोलकाता में नबीनचंद्र दास द्वारा पहली बार रसगुल्ला बनाए जाने के प्रमाण हैं। इस अोडिशा के परंपरा को अभी भी कायम रखा गया है और मौसी से मंदिर लौटने के बाद उन्हें रसगुल्ले का भोग चढ़ाकर दर्शन करने आए भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

X
Raigarh News - chhattisgarh news after returning to the temple mahaprabhu jagannath and balabhadra subhadra appeared in gold decoction
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना