भास्कर लाइव... संक्रमण से बचाव को लेकर शहर से ज्यादा जागरूक गांव, बाहरी नहीं रख पा रहे पांव

Raigarh News - कोविड-19 के खतरे को लेकर गांव में लोग कितने सजग हैं यह देखने के लिए भास्कर की टीम ने गुरुवार दोपहर शहर के आसपास तीन...

Mar 27, 2020, 07:15 AM IST

कोविड-19 के खतरे को लेकर गांव में लोग कितने सजग हैं यह देखने के लिए भास्कर की टीम ने गुरुवार दोपहर शहर के आसपास तीन गांवों का जायजा लिया। गढ़उमरिया और डुमरमुड़ा में तो लॉकडाउन का पालन इस तरह हो रहा है कि बाहर व्यक्ति का प्रवेश ही वर्जित है। बाकी गांवों में भी ग्रामीण खुद ही टीम बनाकर निगरानी कर रहे हैं। सड़कों या घरों के बाहर परछी या चबूतरे में कोई बैठा दिखा नहीं। शहर में भले ही लोग घरों के बाहर कुर्सी डालकर या बंद दुकानों के बाहर बातें करते दिखे लेकिन शहर में सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्कता है।

दोपहर के 1 से 4 बजे तक जब भास्कर की टीम गांवों में पहुंची तो प्रवेश द्वार पर ही लॉकडाउन दिखा। बांस बल्लियां और कटीले पेड़ डाल कर गांव के लोगों ने रास्ते बंद कर रखे थे। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। बूढ़े और जवान सभी घरों में कैद थे। भास्कर की टीम हकीकत जांचने और परखने के लिए गढ़उमरिया और डुमरमुड़ा में प्रवेश करना चाही, लेकिन अदब और सम्मान के साथ गांव की सरहद पर तैनात लोगों ने हाथ जोड़ कर वापस चले जाने के लिए कहा दिया। भास्कर की टीम को ग्रामीणों ने पहचाना लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर गांव में अंदर जाने नहीं दिया।

ऐसा गांव जहां ड्यूटी चार्ट बनाया है डुमरमुड़ा में अलग-अलग मार्गों पर निगरानी के लिए घूमते हैं युवा प्रहरी


दोपहर 2 बजे हम डुमरमुड़ा पहुंचे। ग्रामीणों की जागरूकता सराहनीय थी। गांव के सीताराम चौहान, निरंजन चौहान की अगुवाई में लोग मुख्यद्वार पर मुस्तैद थे। हमलोगों के वहां पहुंचते वे चौकन्ना हो गए। उनसे बात करने हम आगे बढ़े तो उन्होंने इशारे से दूर रहने के लिए कह दिया। परिचय देने पर दूर से बात करने को राजी हुए। पूर्व सरपंच निरंजन चौहान ने बताया कि देशहित के लिए गांव के लोगों को मुनादी करा घरों में रहने की अपील की जा चुकी है। गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूर्णतया प्रतिबंध है। कोई भी व्यक्ति गांव से बाहर जाने नहीं दिया जा रहा है। दो-दो घंटे की शिफ्ट में लोगों की ड्यूटी लगाई गई है।

पंचायती राज

दोपहर 1.25 बजे गढ़उमरिया से निकलकर हम ओडिशा हाइवे के किनारे बसे गुड़गहन-धरमपुर मार्ग पर जा पहुंचे। यहां पर भी लोगों ने रास्ता रोक रखा था। हम गांव के भीतर तो चले गए लेकिन यहां पूरी तरह सन्नाटा था। हमने पैदल गांव घूमा लेकिन एक भी व्यक्ति बाहर बैठा नहीं दिखा। हमारे घूमने की भनक लगी तो कुछ युवा आए और गांव से बाहर जाने का आग्रह करने लगे। उन्होंने कहा, गांव में ना तो हम किसी को आने दे रहे हैं और ना बाहर जाने की इजाजत है, आप कृपया वापस जाइए।

मैं रियाज अहमद अपने फोटोजर्नलिस्ट साथी लक्ष्मीधर पात्रा के साथ दोपहर 1 बजे लॉकडाउन की हकीकत जांचने के लिए गढ़उमरिया पहुंचा। शहर की गलियों में जहां पुलिस की तैनाती के बावजूद लोग घूमते दिखे वहीं गढ़उमरिया गांव का नजारा कुछ और था। गांव के प्रवेश मार्ग पर ही लोगों ने बांस, बल्ली और कटीले पेड़ों की डाल रखकर मुख्य द्वार बंद कर दिया था। हमने गांव के अंदर जाने का प्रयास किया तो एक बुजुर्ग ने हाथ जोड़ते मना किया। बोले, वायरस जानलेवा है, बचाव ही उपाय है तो आप अंदर क्यों जा रहे हैं।

ग्रामीण घरों के अंदर कर्फ्यू जैसी शांति अब गुड़गहन-धरमपुर में


बचाव ही उपाय है इसलिए गढ़उमरिया में घुसना मना है

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