लाइसेंस प्रक्रिया में अटकी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन

Raigad News - करोड़ों की ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन मेडिकल कालेज की शोभा बढ़ा रही है। करीब दो वर्ष पहले आई इस मशीन का विभाग अभी तक...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:32 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news blood component separator machine stuck in licensing process
करोड़ों की ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन मेडिकल कालेज की शोभा बढ़ा रही है। करीब दो वर्ष पहले आई इस मशीन का विभाग अभी तक संचालन नहीं करा सकी है, जबकि डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। वहीं जवाब देही से बचने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन मेडिकल कालेज और मेडिकल कालेज प्रबंधन जिला अस्पताल पर ठीकरा फोड़ रहा है। शुक्रवार को दैनिक भास्कर की टीम ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की हकीकत जानने पहुंची तो डॉ. हबेल उरांव ने बताया कि मशीन कब चालू होगी, यह तो मेडिकल कालेज व ब्लड बैंक के सीनियर बता सकते है। हमें इस बारे में कुछ नहीं मालूम, जबकि सीएमएचओ डा. केसरी ने बताया ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन मेडिकल कालेज में है। इसके चालू कराने के लिए विभाग और प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को पत्राचार करके स्थिति की जानकारी दी है। लाइसेंस के लिए प्रक्रिया चल रही है, शीघ्र ही लाइसेंस मिलने के बाद इसका इंस्टालेशन कराया जाएगा और तकनीकी विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देकर इसे प्रयोग में लाया जाएगा। फिलहाल मरीजों के जांच के लिए जिले के जिंदल, संजीवनी, अपेक्स हास्पिटल में सुविधा उपलब्ध है। डेंगू के मरीजों के लिए जिंदल के साथ ही मेडिकल कालेज में इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है।

कलेक्टोरेट में नारेबाजी करते बीजेपी कार्यकर्ता।

कलेक्टर से मिले बीजेपी कार्यकर्ता

जिले में बढ़ रहे डेंगू के मरीज और इलाज की समुचित व्यवस्था के साथ साफ सफाई न होने से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर यशवंत कुमार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें नगर निगम द्वारा नियमित साफ सफाई कराने व कंपोनेंट सेपरेट मशीन को चालू कराकर पीड़ित मरीजों को लाभ पहुंचाने की मांग की है। भाजपाइयों ने जिलाध्यक्ष रमेश छपाड़िया के नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं ने मांग करते हुए बताया कि जिले में डेंगू बीमारी धीरे-धीरे फैल कर व्यापक रूप ले रही है। 15 दिनों से कई मरीज गंभीर हालत में मिले।

खून के तत्वों को अलग-अलग करती है मशीन

ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग अलग कर देती है। थैलीसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। यह मशीन रक्त से लाल कणिकाएं (आरबीसी) श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाजमा, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा(एफएफपी) को अलग कर देता है। इन तत्वों को ब्लड सेपरेटर मशीन से अलग करने के बाद पूरी बोतल खून चढ़ाने के बजाय इन तत्वों को चढ़ाया जाता है। ऐसे में इन मरीजों को सीधा लाभ पहुंचता है।

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