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समिति ने डीएफओ से मांगी स्टॉक पंजी और भुगतान की बैंक डिटेल

एक वर्ष पहले
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कैंपा मद से प्लांटेशन के नाम पर किए गए साढ़े चार करोड़ रुपए की फर्जीवाड़े की जांच शुरू हो गई है। बिलासपुर सीसीएफ की अध्यक्षता में समिति ने 6 मार्च को प्रारंभिक स्तर पर दस्तावेजों की बारीकी की जांच की थी। प्रारंभिक जांच के बाद वन मंडल अधिकारी से खरीदे गए समानों की स्टॉक पंजी रजिस्टर और मजूदरों को भुगतान किए गए बैंक स्टेटमेंट भी मांगे हैं। समिति होली के बाद इन दस्तावेजों का अध्ययन करेगी। दरअसल प्रारंभिक जांच के बाद समिति को भुगतान के अनुरूप समान, मजदूरी भुगतान में चोरी और प्लांटेशन एरिया कम होने की आंशका पर यह दस्तावेज मांगे गए हैं।

साल 2017-18 में कैंपा मद से वैकल्पिक पौधरोपण कराया गया था। तात्कालीन डीएफओ विजिया रात्रे ने 1397 एकड़ में 3.85 लाख पौध रोपण के लिए 4.44 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस राशि से पौधरोपण के लिए खरीदे गए पौधों से लेकर, यूरिया, डीएपी,क्लोरोपेरीफॉस, गोबर खाद और बारबेट वायर, आरसीसी पोल के लिए भुगतान पूरा किया गया, लेकिन सामान कम खरीदने की आंशका है।

एरिया कम इसलिए मांगी केएमएल फाइल


प्लांटेशन के लिए चयनित सभी साइटों में प्लांटेशन एरिया कम होने के आरोप है। बोर्ड में उल्लेख किए गए संख्या के अनुरूप पौधे भी नहीं लगाए गए हैं। इसलिए जांच समिति ने रायगढ़ वन मंडल अधिकारी से जीपीएस सर्वे के रिपोर्ट वाली केएमएल फाइल मांगी है। इस फाइल में प्लांटेशन एरिया का कुल हेक्टेयर और फेसिंग की पूरी जानकारी मौजूद रहती है।


रखरखाव के लिए मिले साढ़े 4 करोड़ रुपए


प्लांटेशन के बाद बीते तीन साल से लगातार जहां पौधे नहीं वहां रखरखाव के लिए और साढ़े चार करोड़ मिले हैं। वर्तमान डीएफओ ने इस राशि से जहां कम पौधे वहां नए प्लांटेशन, सिंचाई और रखरखाव पर खर्च करने की बात कही है। साल 2018 में प्रति हेक्टेयर 46000 रुपए के हिसाब से 2.62 करोड़ रुपए, 2019 में 19135 रुपए के हिसाब से 1.90 करोड़ रुपए प्राप्त हुए है। इस वर्ष 2020 में कैंपा मद से 960 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 5.47 लाख रुपए मिलेंगे।


बचने के लिए कर सकते हैं दस्तावेजों से छेड़छाड़


मामले में तात्कालीन, डीएफओ, एसडीओ और सारंगढ़ रेंजर को बचाने के लिए विभाग द्वारा दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने की आशंका भी जताई जा रही है। क्योंकि विभाग के पास न तो स्टॉक पंजी है, और न ही सभी मजदूरी भुगतान के संबंध में जरूरी बैंक स्टेटमेंट, इस जांच से जुड़े जानकार दस्तावेजों में हेराफेरी और छेड़छाड़ तक की बात कह रहे हैं।

साल 2017-18 में कैंपा मद से वैकल्पिक पौधरोपण कराया गया था। तात्कालीन डीएफओ विजिया रात्रे ने 1397 एकड़ में 3.85 लाख पौध रोपण के लिए 4.44 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस राशि से पौधरोपण के लिए खरीदे गए पौधों से लेकर, यूरिया, डीएपी,क्लोरोपेरीफॉस, गोबर खाद और बारबेट वायर, आरसीसी पोल के लिए भुगतान पूरा किया गया, लेकिन सामान कम खरीदने की आंशका है।

विभाग के अनुभवी अफसरों के अनुसार यदि डिवीजन स्तर पर समानों की खरीदी होती है, तो स्टॉक पंजी रजिस्टर पर उनकी संख्या भी डिवीजन स्तर पर ही मेंटेन किया जाता है। इसी तरह मजदूरों के भुगतान में की गई गड़बड़ी को पकड़ने के लिए बैंक स्टेटमेंट मांगे गए हैं। जांच समिति को आशंका है कि डीएफओ, एसडीओ व रेंजरों के बीच हेराफेरी हुई है। उन्होंने शासन के सख्त निर्देशों के बाद भी ऑनलाइन भुगतान करने की बजाए मजदूरों को नगद भुगतान किए हैं। दो साल पहले प्लांटेशन के कुछ समय बाद मजूदरों ने पहले ही भुगतान नहीं करने का आरोप लगा चुके हैं।

हमने दस्तावेज मांगे हैं

अनिल सोनी, सीसीएफ
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