24 घंटे कर रहे ड्यूटी, पर एमसीएच में अलग रहने, खाने की व्यवस्था नहीं

Raigarh News - कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कई दिनों से पीपीई, मास्क जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की...

Apr 06, 2020, 07:15 AM IST

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कई दिनों से पीपीई, मास्क जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की कमी से पहले ही जूझ रहे हैं। अब तो कोरोना संदिग्ध लोगों की जांच करने वाले डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। ड्यूटी करने वाले डॉक्टर और स्टाफ नर्सों को नियम के मुताबिक क्वारेंटाइन में रहना है। इसके लिए दूसरे कई राज्यों और जिलों में होटल में व्यवस्था की गई है ताकि वे परिवार से दूर सुरक्षित रहें, लेकिन ऐसा इंतजाम रायगढ़ में नहीं है। डॉक्टरों ने अपनी तकलीफ अफसरों को बताई है लेकिन मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में समन्वय नहीं होने के कारण जरूरी इंतजाम नहीं हो पा रहे हैं।

डॉक्टर और स्टाफ के लिए ड्यूटी वाले स्थान पर ही खाने की व्यवस्था की जानी है। विभागीय बंदोबस्त न होने के कारण डॉक्टर संक्रमित और आशंका वाले मरीजों को देखने के बाद घर जा रहे हैं। ऐसे में उनके परिवार के संक्रमित होने का खतरा बढ़ने लगा है। भास्कर टीम ने रविवार को एमसीएच में कोरोना वायरस से निपटने की व्यवस्था का जायजा लेना चाहा तो डॉक्टरों का दर्द उभर कर सामने आ गया।

डॉक्टर्स भी सुरक्षित नहीं

स्वाद के चक्कर में जानलेवा संक्रमण का उठा रहे हैं खतरा

यूं तो हमारा पूरा परिवार संक्रमित हो जाएगा

भास्कर संवाददाता| रायगढ़

एक ओर कोरोना वारियर्स यानि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ परिवार से दूर रह, भूख प्यास भूलकर अस्पतालों में डटे हुए हैं ताकि लोगों का इलाज करें, शहर को संक्रमण से बचा सकें। एसपी से लेकर पुलिस के जवान तक सड़कों पर घूम रहे हैं ताकि लॉकडाउन का कड़ाई से पालन हो और छूट के समय सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल कराया जाए। दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग स्वादिष्ट और मनपंसद खाने के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। रविवार को मुर्गा, मटन और मछली की दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जी उड़ी।

कोराना वायरस को लेकर किया गया लाॅकडाउन बेअसर साबित हो रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का अमल कराने के लिए दम भरने वाले अफसर यह भूल गए कि मटन, मुर्गा, मछली मार्केट में इसपर कैसे अमल कराया जाएगा। यहां न तो सोशल डिस्टेंसिंग के सर्किल बनाए गए और ना ही सैनिटाइज करने की दुकानदारों को नसीहत। मटन, मुर्गा बेंच रहे लोग औजार भी साफ सुथरे नहीं रख रहे हैं। शहर के चक्रधर रेलवे क्रॉसिंग, केवड़ाबाड़ी, जूट मिल आदि क्षेत्र में लगी दुकानों में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। शौकीन लोग दुकानों के अंदर बेफिक्र होकर नानवेज लेने की होड़ में थे। दुकानदार भी अपने आप को सुरक्षित नहीं किए थे। किसी के चेहरे पर मास्क था तो कोई बिना मास्क के दिखा। जो लोग मटन, चिकन काट रहे थे उनके हाथों में ग्लब्स भी नहीं ते। अगर यहां सावधानी नहीं बरती गई तो संक्रमण फैल
सकता है।

}एमसीएच में क्वारेंटाइन में रह रहे मरीज को तो पानी और खाना दे रहे हैं लेकिन उनके साथ आए परिजन को पानी तक नसीब नहीं हो रहा है।

}भास्कर से बातचीत में मेडिकल टीम ने बताया अपना दर्द- संक्रमण से बचाव के संसाधन और सुविधाओं की कमी ऐसी कि अब गिर रहा है मेडिकल टीम का मनोबल।

रविवार को मटन-मछली लेने वालों को सोशल डिस्टेंसिंग की चिंता नहीं।

ड्यूटी स्टाफ को मरीज की सही जानकारी नहीं देते हैं

मरीज तो जानकारी छिपा ही रहे हैं जो संदिग्ध एमसीएच भेजे जा रहे हैं, उनकी पूरी जानकारी भी हमें नहीं दी जा रही है। शनिवार को निजामुद्दीन से लौटे दंपती को कोरोना की आशंका पर एमसीएच भेजा गया, लेकिन हमें उनके मरकज से लौटने की जानकारी नहीं दी गई।

मरीज की देखरेख करने वालों के लिए व्यवस्था नहीं

एमचीएस में मरीज के परिजनों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वह खाने पीने के लिए परेशान हो रहे हैं। शनिवार रात को एमसीएच में भर्ती एक मरीज का संबंधी खाने की तलाश में पास के गांव में खाने की तलाश में गया था। उसे गांव के लोगों ने भगा दिया और वह भूखा रहा।

रेजीडेंट हॉस्टल में
रहेेंगे डॉक्टर्स



फॉर्म पर होती है
पूरी डिटेल्स



दिक्कतें खूब हैं हम लोग कुछ बोल भी नहीं पा रहे है‌ं। हम ड्यूटी डाक्टरों को खाना नहीं मिल रहा है। 24 घंटे की ड्यूटी है, एक ही वक्त का खाना घर से ला सकते हैं। हम लोग संदिग्ध मरीजों के लक्षण जानने के लिए दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं। अगर हम घर या फिर कहीं और खाने के लिए जाते हैं तो दूसरा व्यक्ति भी हमसे संक्रमित हो सकता है। डॉक्टर या स्टाफ संक्रमित हो गया तो उसके साथ उसका परिवार, दूसरे मरीज और पूरा समाज संक्रमित हो जाएगा। यदि कोई पॉजिटिव मरीज आ गया तो जांच करने वाला डॉक्टर भी संक्रमित हो जाएगा। सरकार की गाइडलाइन के तहत जो व्यक्ति संक्रमित या संदिग्ध मरीजों की जांच या इलाज कर रहे हैं, उन्हें घर नहीं जाना है। उन्हें क्वारेंटाइन में अस्पताल में ही रखना है, इसके लिए कई दिनों से प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है। नियम में 14 दिन से 21 दिन क्वारेंटाइन में डॉक्टरों को सुरक्षित स्थान में रखना है। जिनके पास एक-दो कमरे का घर है उसके लिए बड़ी समस्याएं हैं। व्यवस्थाएं ठीक नहीं हुई तो घर में संक्रमण फैलेगा। हमने बताया तो सीएमएचओ सर बोलते हैं डीन देखेंगे, डीन कहते हैं, कलेक्टर साहब से कह दिया है। अफसरों में आपसी तालमेल ही नहीं है। हमारे पास एक भी पॉजिटिव मरीज की जांच या इलाज करने के लिए मास्क नहीं है। एक भी मरीज पॉजिटिव आया तो हमारे पास जितना सामान है वह तीन दिनों में खत्म हो जाएगा।

(नाम ना छापने की शर्त पर डॉक्टरों ने भास्कर को बताया। हमारे पास इसके सबूत हैं।)

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