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एनजीटी से नोटिस मिलनेे के बाद भी लैब का संक्रमित खून व गंदा पानी बह रहा नालों में

Raigarh News - मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल समेत जिले के दूसरे अस्पताल व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पतालों से निकलने वाले...

Bhaskar News Network

Jun 23, 2019, 07:25 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news even after getting notice from ngt the infected blood and dirty water in the lab is in the drains
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल समेत जिले के दूसरे अस्पताल व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित खून को बिना ट्रीटमेंट के नाली में बहा रहे हैं।

जिला और ब्लॉक मुख्यालयों के अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व ईटीपी (इफ्लूयेंट ट्रीटमेंट प्लांट) नहीं होने से पैथालॉजी, ओटी और वार्डों का बैक्टीरियायुक्त पानी सीधे नालियों में बहता है, चूंकि इन्हीं नाले अथवा नालियों के आसपास से ही वाटर सप्लाई की पाइप या पानी की टंकियां होती हैं, जिसमें लीकेज होने पर संक्रमित पानी इन पाइपों से होते हुए घरों में पहुंच जाता है। संक्रमित पानी को पीने से टायफाइड, पीलिया, डायरिया समेत अन्य वायरल इंफेक्शन का खतरा होता है। एनजीटी के निर्देश पर पर्यावरण विभाग ने जिले के करीब 200 अस्पतालों को नोटिस जारी की थी इसके बाद भी अस्पताल में व्यवस्था सुधर नहीं रही है।

अस्पताल से निकलने वाले संक्रमित खून को बिना ट्रीटमेंट के नाली में बहा रहे।



अस्पताल में जहां-तहां फेंका जाता है कचरा

शनिवार दोपहर 1 बजे जब भास्कर की टीम ने अस्पताल के पीछे बायोमेडिकल वेस्टेज फेंकने के लिए तय जगह का मुआयना किया तो वेस्टेज गड्ढों को छोड़कर बाहर अधिक फेंका गया था। खुले में इंजेक्शन की सुइयां, संक्रमित पट्टियां, इंजेक्शन की शीशियां, ग्लूकोज बॉटल वेस्टेज पड़े हुए थे। तीन काले रंगे के बायोमेडिकल वेस्टेज के बैग यहां फेंके गए थे।

पैथोलॉजी में ईटीपी और अस्पतालों में एसटीपी अनिवार्य

जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम के अनुसार हर अस्पतालों की पैथालॉजी व ओटी से निकलने वाले अपशिष्ट जैसे खून, यूरीन, बलगम आदि को नालियों में बहाने से पहले ट्रीटमेंट के लिए ईटीपी और 30 बेड या उससे ज्यादा बिस्तर के अस्पतालों में इमरजेंसी, वार्ड अन्य जगहों से निकलने वाले अपशिष्ट के ट्रीटमेंट के लिए एसटीपी लगाना अनिवार्य है। बावजूद जिले के अस्पतालों में इसकी सुविधा नहीं है।

एसटीपी इंस्टाल करते तो अस्पताल में ही होता ट्रीटमेंट

पैथालाजी व ओटी के खून, यूरीन, बलगम आदि को ईटीपी से ट्रीट करते हैं। इसके लिए लैब व ओटी के अपशिष्ट को पहले एक कंटेनर में एकत्रित किया जाता हैं। इसके बाद अपशिष्ट ईटीपी यूनिट में भेजते हैं, पानी के ट्रीटमेंट के बाद गार्डन इत्यादि में इस्तेमाल होने लायक बनाया जा सकता है। शहर के किसी भी अस्पताल में ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इस मशीन के इंस्टालेशन से अस्पताल में ही संक्रमित ब्लड व पानी का ट्रीटमेंट होता।

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