परिवार, समाज चलता रहेगा,अहंकार न करें : पं. हरगोविंद

Raigarh News - रायगढ़ | संसार में जिस किसी को यह अहंकार होता है कि सब कुछ वहीं करता है, तब उसका भ्रम जल्द ही टूट जाता है। संसार में...

Feb 23, 2020, 07:26 AM IST
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रायगढ़ | संसार में जिस किसी को यह अहंकार होता है कि सब कुछ वहीं करता है, तब उसका भ्रम जल्द ही टूट जाता है। संसार में आने से पहले और जाने के बाद भी यह परिवार, घर, समाज ऐसे ही चलता रहेगा। जीवन में कभी खुद को नहीं ईश्वर को धन्यवाद दें। उक्त बातें श्री हरिवंश कथा पुराण के अवसर पर महाराज हरगोंविद ने कही। इस अवसर पर शनिवार को बलि बामन कथा, हिरणाकश्यप कथा के बाद समाज के लिए बेटी का महत्व बताया। इंद्र के देवलोक पर राजा बलि का अधिकार हो गया। वह एक दयालु असुर राजा रहे, जिसने तपस्या के बल पर त्रिलोक पर भी अधिकार जमाया। विष्णु भगवान इंद्र के खोए हुए राज्य के लिए ब्राह्मण रुप में बालक बनकर वामन अवतार में राजा बलि के पास जाते है। राजा उनके कुछ भी मांगने को कहता है, इस पर भगवान बस तीन पग जमीन मांगते है। वे पहले पग में धरती, दूसरे में आकाश नाप देते है, जब देने के लिए कुछ नही बचता तो राजा अपना शीश झुकाकर कहता तीसरा पग यहां रख दीजिए। परमात्मा की महिमा के आगे हर कोई हार जाता है। जीवन सदा उसके अधीन रहता है।

हिरण कश्यप की कथा-जीवन में अपने बल पर ऐसा घमंड नही करना चाहिए कि सर्वस्व मान कर अहंकार में डूब जाओ। ऐसा ही इतिहास में हिरणाकश्यप नाम का राजा खुद को समझ बैठा। वह पुत्र भक्त प्रहलाद को मारने के लिए हजारों नाकाम प्रय| करता है। प्रहलाद भगवान की आराधना में लीन रहते यह हिरणकश्यप को नागवार गुजरता। उसने बहन होलिका के साथ प्रहलाद को बैठाया पर वरदान प्राप्त होलिका ही जलकर राख हो गई। पाप का समय भरा तो नरसिंह रुप में अवतार लेकर वध कर दिया।

बेटी घर का मान - बेटी घर की मान सम्मान होता है। जिस घर में बेटी हो, वह सौभाग्य की बात है। समाज में ज्यादातर परिवार बेटी को बोझ समझता है। उसे यह नहीं ज्ञान की जिस घर में उसका बेटा है वहां बहू बनकर एक बेटी ही आती है।

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