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पहली बार कम सुनने वाले और बहरेपन के मरीजों का हो रहा सर्वे

एक वर्ष पहले
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बहरेपन या कम सुनने वाले मरीजों के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुहिम शुरू किया है। जिसे भी इस तरह की समस्या है उनकी जांच जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में की जा रही है। जांच के बाद चयनित मरीजों का आपरेशन किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार कानों को लेकर अभियान शुरू किया है। अक्सर कानों की समस्याओं वाले मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ता हैं। इसलिए कि कान रोग के डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में गिनती के हैं। कम सुनने की समस्या बढ़कर बहरेपन तक पहुंच जाती है, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग अपना इलाज नहीं करा पाते हैं। यही वजह है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में कान से संबंधित सभी रोगो को निशुल्क उपचार की योजना शुरू की गई है। कानों में कोई भी समस्या हो तो लोग अपने क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टरों को दिखाएं।

कान बहना, दर्द होना या कम सुनने का इलाज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कान बहने, कान में दर्द, खुजली, कम सुनाई देने या बहरेपन की जांच हो रही है। जांच के बाद डॉक्टर जिला अस्पताल के कान रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के पास रेफर करेंगे।

निजी अस्पतालों में खर्च हो जाते हैं 30 हजार रुपए

बहरेपन के एक आपरेशन के 30 से 35 हजार रुपए लग जाते हैं। कान के खराब परदे आपरेशन कर बदल दिए जाते हैं। दूसरे केस के मरीजों को श्रवण यंत्र और दवाइयों के पैसे लगते थे। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में इलाज होगा।

पहली बार चल रही मुहिम

डॉ. एसएन केसरी, सीएमएचओ

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