चार सौ बीसी की जांच इतनी कठिन कि 3 साल में 1 को ही सजा दिला पाई पुलिस

Raigad News - जिला पुलिस के पास धारा 420 के पेंडिंग मामलों की फाइलें बढ़ती जा रही है। जांच की धीमी रफ्तार और लिखा पढ़ी की के चलते...

Bhaskar News Network

Mar 16, 2019, 03:01 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news four hundred bc investigation is so difficult that only 3
जिला पुलिस के पास धारा 420 के पेंडिंग मामलों की फाइलें बढ़ती जा रही है। जांच की धीमी रफ्तार और लिखा पढ़ी की के चलते पेंडेंसी बढ़ रही है। जांच में आरोपियों के खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर बीते तीन सालों में 59 मामलों का खात्मा किया जा चुका है। कोर्ट से ज्यादा पेंडिंग थानों में है। पुलिस के सुस्त रवैये के कारण अपराधियों को इसका फायदा मिल रहा है। बीते तीन सालों में अभी तक मात्र एक मामले में एक व्यक्ति को ही रायगढ़ पुलिस सजा दिला पाई है।

कई मामलों में पुलिस ने कोर्ट में केस डायरी पेश ही नहीं की है। ऐसे में अपराधियों को खुली छूट मिल रही है। वे धोखाधड़ी कर जिले से निकल भी जाते है और पुलिस के पास सबूत के तौर पर कुछ नहीं होता। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते तीन सालों के 135 मामले पेंडिंग हैं। यह केवल तीन सालों के ही आंकड़े है। कई ऐसे मामले हैं जिसमें पुलिस अपराधी तक पहुंच नहीं पाई है।पुलिस समय पर विवेचना पूरा नहीं कर पाती या अपराधी को नहीं पकड़ती। कोर्ट में चालान भी पेश नहीं हो पाता है। कई बार जांच अधिकारी ही बदल जाते हैं, इस चक्कर में मामले और पिछड़ जाते हैं। 2018 में सबसे ज्यादा पेडिंग फाइलों की संख्या बढ़ी है। 2016-17 के मुकाबले 2018 में तीन गुना ज्यादा पेडिंग फाइलों का लोड पुलिस पर बढ़ गया है। तीन साल पहले पुलिस के पास 24 प्रकरण पेडिंग थे, जो कि धीरे-धीरे कर 135 तक पहुंच गए। इससे पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे। पुलिस एफआईआर तो कर लेती है, लेकिन आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं करती।

41 लाख 82 हजार का चिटफंड घोटाला, गिरफ्तारी एक की भी नहीं - 2018 में ही पुलिस ने 4 नान बैंकिंग चिटफंड घोटाला कंपनियों पर अपराध दर्ज किया है। इसमें पीड़ितों की संख्या 20 और आरोपियों की संख्या 36 थी। मगर इस मामले में पुलिस ने एक भी गिरफ्तारी नहीं की। ऐसे आरोपी एक जगह से धोखाधड़ी कर दूसरी जगह जाकर फिर से धोखाधड़ी करते है और पुलिस अनजान बनी रहती है।

तीन सालों में पुलिस की नाकामयाबी को कुछ इस तरह से समझिए

साल रिपोर्ट खात्मा पुलिस पंेडिंग सजा




पुलिस के अनुसार ये परेशानी और हल

काम का दबाव - थाने में विवेचकों के पास पहले से ही लॉ एंड आर्डर और रोजमर्रा के काम का दबाव होता है। ऐसे में जब उन्हें 420 जैसे मामलों में विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो वे परेशान होकर टालने लगते है। ऐसे में अधिकारी बताते है कि ऐसे मामलों के विवेचना के लिए अलग से टीम बनाई जाए तो वे काफी बेहतर परिणाम आ सकते है। टीम जिला स्तर पर ही बने ताकि कागज में कम और फील्ड में ज्यादा दिखे।

मामलों में तकनीकी जानकारी नहीं - पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि अधिकतर मामले में पुलिस के सामने दिक्कत यह आती है कि विवेचकों को पता नहीं होता कि उनके लिए कौन से साक्ष्य जरूरी होते है। सेबी और आरबीआई के गाइडलाइन है और इन्हें केस में किस तरह से उपयोग किया जाए। अधिकतर विवेचकों को पता ही नहीं है। यदि उन्हें बीच-बीच में ऐसे मामलों को हैंडल करने के लिए विभाग की ओर से ट्रेनिंग दी जाए तो शायद वे केस का निपटारा जल्दी कर पाएं।

धोखाधड़ी के अपराध बढ़े

जिस तेजी से धोखाधड़ी के अपराध बढ़ रहे है। उस स्तर पर पुलिस निपटारा नहीं कर पा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार हर साल लगभग 100 मामले धोखाधड़ी के दर्ज हो रहे है। ऐसे मामलो में पुलिस की कमजोर विवेचना के कारण न ही गिरफ्तारी मिलती है और ना ही सजा हो पाती है। अपराधियों के हौसले बढ़ने से वे लगातार इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।

इसलिए गिरफ्तारी नहीं

धोखाधड़ी के मामले में पुलिस जल्द से किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। जानकार बताते है कि धोखाधड़ी में जितनी सजा अवधि होती है। उतना ही समय पुलिस के पास केस की डायरी कोर्ट में पुटअप करने के लिए होता है। यदि मामले में एक भी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया तो उन्हें 60 दिनों में चालान कोर्ट में जमा करना होगा। सबूत कम हुए तो आरोपी बरी हो जाएगा। यही दिक्कत विवेचकों के साथ होती है।

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