ठगी, साइबर क्राइम के मामले बढ़े सबूत कम इसलिए कार्रवाई नहीं

Raigarh News - आर्थिक मंदी के चलते आर्थिक अपराध बढ़ रहे हैं। तरीके अलग हैं, कभी साइबर क्राइम, लेन-देन में विवाद जैसे मामले थाने और...

Oct 13, 2019, 07:21 AM IST
आर्थिक मंदी के चलते आर्थिक अपराध बढ़ रहे हैं। तरीके अलग हैं, कभी साइबर क्राइम, लेन-देन में विवाद जैसे मामले थाने और कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। बेरोजगारों को लालच देकर बैंक एकाउंट, एटीएम व सर्वर हैक कर ठगी कर रहे हैं। इन मामलों में पुख्ता सबूत न मिल पाने के कारण पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। जबकि न्यायालय में समझौते के माध्यम से वाद निपटाए जा रहे है।

इन बातों का रखे ध्यान - एटीएम का ओटीपी व एटीएम पिन किसी से साझा न करें। मोबाइल, लैपटॉप, पीसी, टैब में डेबिट व क्रेडिट कार्ड का विवरण व पिन न रखें। विक्रेताओं को अपनी अनुपस्थिति में क्रेडिट व डेबिट कार्ड से भुगतान करने की अनुमति न दें। एटीएम बूथ, दुकानों व पेट्रोल पंप आदि पर क्रेडिट व डेबिट कार्ड में खुले पिन एंटर न करें। वैवाहिक साइटों और सोशल साइटों पर दी गई जानकारी पर भरोसा न करें।

ऐसे होती साइबर ठगी

साइबर ठग बैंक ग्राहकों के नंबर पर बैंक मैनेजर बनकर फोन करते हैं। कभी आधार से लिंक करने या केवाईसी नहीं जमा करने की बात कहकर ग्राहक से गोपनीय जानकारी लेकर नकदी ट्रांसफर या आन लाइन खरीददारी कर लेते हैं। बैंक अफसरों की मानें तो सबसे ज्यादा साइबर ठगी के लोग शिकार हो रहे हैं। पुलिस अफसर लोगों को बैंक खातों, एटीएम कार्ड की जानकारी और लेनदेन में ब्लैंक चेक न देने, बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को न बताने की सलाह दे रहे हैं।

भास्कर संवाददाता | रायगढ़

आर्थिक मंदी के चलते आर्थिक अपराध बढ़ रहे हैं। तरीके अलग हैं, कभी साइबर क्राइम, लेन-देन में विवाद जैसे मामले थाने और कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। बेरोजगारों को लालच देकर बैंक एकाउंट, एटीएम व सर्वर हैक कर ठगी कर रहे हैं। इन मामलों में पुख्ता सबूत न मिल पाने के कारण पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। जबकि न्यायालय में समझौते के माध्यम से वाद निपटाए जा रहे है।

इन बातों का रखे ध्यान - एटीएम का ओटीपी व एटीएम पिन किसी से साझा न करें। मोबाइल, लैपटॉप, पीसी, टैब में डेबिट व क्रेडिट कार्ड का विवरण व पिन न रखें। विक्रेताओं को अपनी अनुपस्थिति में क्रेडिट व डेबिट कार्ड से भुगतान करने की अनुमति न दें। एटीएम बूथ, दुकानों व पेट्रोल पंप आदि पर क्रेडिट व डेबिट कार्ड में खुले पिन एंटर न करें। वैवाहिक साइटों और सोशल साइटों पर दी गई जानकारी पर भरोसा न करें।

कोर्ट से हो रहा चेक बाउंस का निपटारा

अधिवक्ता मुकेश गोयल ने बताया कि मंदी के बाद बाजार में आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। इस कारण लोगों के लेन देन प्रभावित हुआ है। बड़े व्यापारी अक्सर चेक से लेन देन करते हैं पर बाजार में सही समय पर पैसा न आने कारण चेक बाउंस हो रहे हैं। प्रतिदिन 2 से 3 मामले चेक बाउंस के आ रहे हैं। त्वरित निराकरण करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुल वर्मा की विशेष कोर्ट गठित की गई है। इसमें 80 फीसदी मामलों का समझौते से निपटारा किया जा रहा है।

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