मित्रता जीवन का सबसे अनमोल उपहार है, भगवान ने सुदामा के साथ रिश्ता रख दी शिक्षा: प्राची देवी

Raigarh News - भगवान धरती पर जब जब आते हैं समाज को सत्य और असत्य के बीच की शिक्षा देकर वापस धाम जाते हैं। स्वयं कृष्ण भगवान ने बाल...

Feb 12, 2020, 07:35 AM IST
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भगवान धरती पर जब जब आते हैं समाज को सत्य और असत्य के बीच की शिक्षा देकर वापस धाम जाते हैं। स्वयं कृष्ण भगवान ने बाल रूप से लेकर युद्ध रूप तक समाज को यह ज्ञान दिया कि जीवन में सत्य के रास्ते पर ही चलना चाहिए। उक्त बातें श्रीमद्भागवत कथा के आखिरी दिन कथावाचक प्राची देवी ने कही। मंगलवार को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, भगवान धाम की कथा सुनाई।

}सुदामा चरित्र कथा


सुदामा और कृष्ण की मित्रता समाज को शिक्षा देती है। सुदामा की प|ी सुशीला और बच्चे एक दिन भूख से व्याकुल हो गए, तब सब्र को तोड़ते हुए कहती है- हे पति देव आज घर में अन्न न होने से बच्चे भूख से तड़प रहे हैं। प|ी वह होती है जो पतन के रास्ते पर जाने से रोकती है। सुशीला धर्म परायण प|ी थी सुदामा जी से कहती हैं आपके सखा यहां से कुछ लाने को नहीं कहती बल्कि साधु संत जिनके दर्शन कर अपना जीवन सफल करते हैं। उस सखा का दर्शन करने जाओ। पड़ोसी के घरों से पांच मुट्ठी चावल को पल्लू में फाड़ कर पोटली में देती हैं। जब सुदामा के आने की खबर द्वारिकाधीश सुनते हैं तो कृष्ण जी खुद सखा से मिलने दौड़ते हैं। कल तक सुदामा कृष्ण से मिलने बेताब थे लेकिन आज स्वयं भगवान अपने मित्र को मिलने दौड रहे हैं। मित्रता की इस पवित्र चरित्र से मनुष्य को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।


}भगवान धाम चले


श्री मद भागवत कथा के दशम अध्याय में भगवान वेद व्यास जी मित्रता का वर्णन करते हैं। ग्यारहवें अध्याय में चारों आश्रमों का वर्णन करते हैं चारों में गृहस्थ आश्रम श्रेष्ठ है। दीक्षा देने वाला गुरु एक हो मगर शिक्षा देने वाले गुरु अनेक हों। भगवान दत्तात्रेय के चौबीस गुरु थे। यदुवंशियों का आपस में लड़ झगड़ कर संहार हो जाता हैं, भगवान इसी सोच में जंगल में सो रहे थे बहेलिया का एक बाण भगवान के पैरों में लगता है। बहेलिया को दुख होता है तब भगवान उसे क्षमा करते हैं। बाण निकालने को कहकर इसी बहाने भगवान अपने पर धाम गमन करते हैं, इधर पूरा संसार शोक मय हो जाते हैं। बारहवें अध्याय में कलियुग धर्म का वर्णन है। कथा का एक निश्चित समय होता है। कथा तो अविरल है। हरि कथा अनंत है। इस भवसागर में घुसकर बाहर निकलना मुश्किल है। इसलिए इसका प्रभु को हमेशा याद रखें।

कथा सुनाती प्राची देवी।

} परीक्षित मोक्ष कथा

राजा परीक्षित को श्राप मिलता है कि सातवें दिन तक्षक सर्प उनको डस लेगा। जिससे उसकी मौत हो जाएगी। श्रीमद्भागवत सुनने के लिए ऋषि मुनियों से कहते कोई उनको कथा सुनाने को तैयार नहीं होता है। शुकदेव जी प्रकट होते हैं। राजा परीक्षित कथा सुनने के बाद संसारिक मोह माया से परे होकर कहते हैं मैं भगवान के उस अलौकिक रूप का दर्शन भृकुटी के मध्य कर रहा हूं।

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