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संसार में सृष्टि की संरचना परमात्मा ने नारी से कराई इसलिए उनका हमेशा सम्मान करें : तीर्थराज महाराज

Raigad News - बैकुण्ठपुर स्थित भुजबंधान तालाब किनारे बसे राम मंदिर में शुक्रवार की सुबह विधि-विधान से विष्णु पूजा की गई।...

Jan 25, 2020, 07:26 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news god created the structure of the universe in the world so always respect him tirtharaj maharaj

बैकुण्ठपुर स्थित भुजबंधान तालाब किनारे बसे राम मंदिर में शुक्रवार की सुबह विधि-विधान से विष्णु पूजा की गई। पंडित तीर्थराज महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सृष्टि की रचना, ध्रुव चरित्र, अनुसुइया चरित्र का वर्णन किया गया। संसार में नारी शक्ति के महत्व को भी बताया, वही अग्रोहा भवन में आयोजन कथा के अंतिम दिन पंडित अशोक पंडा ने सुदामा चरित्र को बताया।

}अग्रोहा भवन में कथा का अंतिम दिन

अग्रोहा भवन में आयोजित हो रही कथा का गुरुवार को आखिरी दिन रहा। महाराज अशोक कुमार पंडा ने श्रोताओं को अन्यान्य विवाह, सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि मित्र का रिश्ता बहुत ही पवित्र होता है। जो हर सुख दुख में सदा साथ बना रहे तब वह मित्र पहचान होती। सुदामा भगवान के परम मित्र रहे, उनके जीवन में कितना भी दुख आया वह कभी भगवान से दूर नही हुए।

}अनुसुईया चरित्र

दक्ष की कन्या माता अनुसूइया का विवाह अत्रि मुनि से होता है। माता अनुसुइया इतनी साध्वी रही कि अपति व्रत के प्रभाव से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों लोको के स्वामी को दुधमुंहा बालक के रूप में उनका पुत्र वत पालन करने लगती है। तीनों देवियां धरती पर आकर उनसे विनम्र निवेदन करने पर उन्हें वापस कर देती है। बालक देव रूप में होकर त्रिलोक के स्वामी बनकर सामने आते है। आशिर्वाद से माता को दत्तात्रेय के रुप में पुत्र प्राप्ति होती है।

}ध्रुव चरित्र

बचपन में ही माता के तिरस्कार के कारण ध्रुव घर त्याग कर परमात्मा प्राप्ति के निमित्त वन को चला जाता है। वहां नारद जी से शिक्षित होकर नारायण मंत्र का जाप करना शुरु करता है। बिना ,खाए पिए कठिन तपस्या करते हुए मात्र 6 महीने के बाद ध्रुव को भगवान की प्राप्ति हो जाती है। परमात्मा से शुभ आशिर्वाद प्राप्त कर ध्रुव महान बन जाता है। जो आज भी ध्रुव तारा के रुप में सर्वाधिक तेज गति से आकाश में चमकता हुआ परिलक्षित होता है।

}सृष्टि की शुरुआत

सृष्टि की रचना मनु शतरुपा से हुआ। उनकी बेटियों से ऋषि मुनियों ने विवाह किया। इसके बाद संसार की रचना शुरू हुई। परमात्मा शक्ति का आश्रय लेकर संसार की जन्म तो कर देते है। ठीक नारी सृष्टि की आधारशिला रखती है। नारी नर की शक्ति है। वह सर्वदा से महान है। क्रोध में वह ज्वाला है, सुख में वह मधुपान है। नारी के व्यवहार पर परिवार का सुख और विनाश निर्भर करता है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में नारी का सम्मान करना चाहिए।

महाराज तीर्थराज

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