जिमित मोदी, सीईओ, सैमको सिक्युरिटीज

Raigad News - इन्वेस्टमेंट ऑप्शन

Aug 09, 2019, 06:45 AM IST
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इन्वेस्टमेंट ऑप्शन

जिमित मोदी, सीईओ, सैमको सिक्युरिटीज

5 जुलाई को बजट पेश होने के बाद से शेयर बाजारों में खासी गिरावट देखने को मिली है। इसके दो प्रमुख कारण हैं। पहला, कंपनियों के लिए न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग का प्रावधान और दूसरा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पर सरचार्ज का लगाया जाना। इससे बाजार में भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसमें निफ्टी 2019 में हासिल अपनी सारी बढ़त खो चुका है। 7 अगस्त को यह 10,855.50 पर बंद हुआ। 31 दिसंबर 2018 को यह 10,862.55 पर था।

मौजूदा आर्थिक सुस्ती, कंपनियों की फीकी आमदनी, शेयरों की अधिक कीमतों को देखते हुए निवेशक सतर्क बने हुए हैं। जब तक कंपनियों की कमाई में सुधार के अर्थपूर्ण संकेत मिलने शुरू नहीं हो जाते। तब तक बाजार में नरमी का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। हालांकि अन्य घटनाक्रम भी देश के शेयर बाजारों को प्रभावित करेंगे। रिजर्व बैंक ने बुधवार को रेपो रेट में लगातार चौथी बार कटौती का ऐलान किया। इसके बाद एफपीआई पर सरचार्ज और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स वापस लेने की संभावना से गुरुवार को उछाल दर्ज हुआ। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाली विपरीत खबरें बाजार को प्रभावित करेंगी। ट्रेड वॉर के कारण निवेशक शेयरों में निवेश करने का जोखिम नहीं लेना चाह रहे। इसके बजाय वह गोल्ड और बॉन्ड जैसे निवेश के अन्य विकल्पों में पैसा लगा रहे हैं।

महंगाई दर नियंत्रण में है। लेकिन औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार घटी है। आर्थिक सुस्ती से एफएमसीजी कंपनियों, यात्री वाहनों, दोपहिया, कपड़ा क्षेत्र का कारोबार प्रभावित हो रहा है। बाजार इस समय नकदी की कमी, निगेटिव सेंटिमेंट और डरावने वैश्विक घटनाक्रम के दौर से गुजर रहा है। यदि इन परिस्थतियों में सुधार नहीं होता है तो बाजार में गिरावट का रुझान बना रहा सकता है। यदि अमेरिकी बाजार में स्थिरता आ जाती है तो दुनिया के बाजारों में स्थिरता लौट सकती है।

बाजार के मौजूदा हालात में कंपनी की वित्तीय मजबूती को देखकर करें निवेश

निफ्टी-50 को 10,000 के स्तर पर है अर्थपूर्ण सपोर्ट

अमेरिकी शेयर बाजार का डो जोंस इंडेक्स फिलहाल 26,000 के आसपास है। यदि यह गिरकर 24,500 से नीचे आता है तो दुनियाभर के बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। जहां तक एनएसई के निफ्टी-50 इंडेक्स की बात है इसे 10,000 के स्तर पर एक अर्थपूर्ण सपोर्ट है। इस स्तर पर फिर खरीदारी देखने को मिल सकती है।

- ये लेखकों के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

निमेश शाह, एमडी एवं सीईओ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी

जब बात रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है तो हर निवेशक का ध्यान एक ऐसी मोटी रकम जोड़ने पर होता है जिससे वह रिटायरमेंट के बाद इस्तेमाल कर अपनी जिंदगी अच्छे से गुजार सके। लेकिन वास्तविकता यह है कि ज्यादातर लोग अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग के लक्ष्यों में रिटायरमेंट प्लानिंग पर सबसे कम ध्यान देते हैं। हम यहां कुछ ऐसी बातों का जिक्र कर रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी सही रिटायरमेंट प्लानिंग कर सकते हैं..

फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लें: रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे फाइनेंशियल गोल के लिए बेहतर होगा कि आप फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लें। वह आपकी जोखिम उठाने की क्षमता, वित्तीय लक्ष्यों और अन्य बातों पर गौर कर सही मार्गदर्शन देगा। वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आपको क्या कदम उठाने होंगे, इसका पूरा प्लान बनाकर देगा।

एसेट एलोकेशन पर नजर रखें: बाजार में निवेश के लिए कई तरह के फाइनेंशियल इन्स्ट्रूमेंट्स उपलब्ध हैं। लक्ष्य के मुताबिक रिटर्न पाने के लिए इनमें से कौन-सा इन्स्ट्रूमेंट आपकी मदद कर सकता है यह तय करना महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे समय यदि आप जल्द रिटायर होना चाहते हों। आमतौर पर भारतीय डेट, शेयर, गोल्ड और रियल एस्टेट आदि में निवेश करते हैं। आपके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में इनकी हिस्सेदारी ऐसे उचित अनुपात होनी चाहिए जिससे आप अधिकतम रिटर्न पा सकें।

फिक्स्ड इनकम को अनदेखा न करें: ज्यादातर लोग निवेश करते समय डेट को अनदेखा करते हैं। किसी भी इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के दो मूल तत्व होते हैं: पहला ग्रोथ और दूसरा स्टैबिलिटी। पोर्टफोलियो में ग्रोथ शेयरों में निवेश से आती है। जबकि स्टेबिलिटी और रिटर्न की निश्चितता डेट में निवेश से आती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की प्रकृति रहती है, ऐसे में डेट की स्टेबिलिटी और रिटर्न की निश्चितता महत्वपूर्ण हो जाती है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव के माहौल में डेट में निवेश करना बेहतर विकल्प

एमएफ में मिलता है फंड मैनेजर की विशेषज्ञता का लाभ

इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में शेयरों का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इनमें शॉर्ट टर्म में अधिक रिटर्न दिलाने की क्षमता होती है। म्यूचुअल फंडों के जरिए शेयरों में निवेश करने में फंड मैनेजर की विशेषज्ञता का लाभ उन्हें मिलता है। फंड मैनेजर रिसर्च, घटनाक्रम और अर्थव्यवस्था के हालात को देखकर निवेश करते हैं।

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