समलेश्वरी मंदिर में 61 सालों में पहली बार नहीं जले ज्योत

Raigarh News - श्री श्री बूढ़ी समलेश्वरी मंदिर शहर के प्राचीनतम मंदिर में से एक है। 61 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है जब चैत्र...

Mar 29, 2020, 07:20 AM IST

श्री श्री बूढ़ी समलेश्वरी मंदिर शहर के प्राचीनतम मंदिर में से एक है। 61 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है जब चैत्र नवरात्र में मनोकामना ज्योत नहीं जली। चतुर्थी तिथि को मां के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा हुई। लॉकडाउन के कारण भक्तों का प्रवेश बंद रहा। अंदर पुजारी ने ही मां की पूजा आरती और भोग अर्पण कर इस महामारी से मुक्ति के लिए विशेष प्रार्थना की। रविवार को मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाएगी।

सादगी से मंदिर में हुई पूजा: मंदिर समिति


मंदिर समिति की तरफ से इस बार सादगी से पूजा के लिए तैयारी पहले से ही कर दी गई। माता की आराधना में लगने वाले धूप, दीप, पुष्प, फल सहित अन्य समानों को पहले ही मंदिर के गर्भगृह में रखवा दिया गया। केवल पुजारी द्वारा ही मां कुष्मांडा की पूजा की गई। आम दिनों में भी ऐसा नजारा नहीं देखने को मिलता। इसके पीछे का कारण लोगों को संसार में आई विपदा से बचाना है। इतने सारे लोग एक जगह एक ही समय में आते रहे तो कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। इस कारण सादगी के साथ परंपरा को ध्यान में रखकर अखंड ज्योत जलती रही।


ऐसी विपदा पहली बार देख रहे : पुरोहित

मंदिर के पुरोहित गुणनिधि सिंह ने बताया कि अपने जीवन काल में पहली बार संसार में ऐसी विपदा देख रहे हैं। इस अवसर पर सुबह मंदिर में उन्होंने गुड़हल से मां की पूजा कर जनकल्याण की कामना की। इस विकट परिस्थिति में घरों में रह मां की पूजा कर रहे भक्तों के लिए अच्छी बात है कि नवरात्र चल रहे हैं, मां पर आस्था रखें सारी विपदाएं समाप्त होंगी।

मंत्र का 108 बार जाप किया


सर्व स्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।

भयेभ्य्स्त्राहि नो देवि कूष्माण्डेति मनोस्तुते।।

समलेश्वरी मंदिर में मां कुष्मांडा की उपासना

}स्कंद माता की पूजा होगी आज

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी मां स्कंदमाता की पूजा संतान सुख के लिए की जाती है। मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और आशीर्वाद प्राप्त होता है। पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है।

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