जाने क्या जादू भरा है...कृष्ण तुम्हारी गीता में...गाकर महाराज ने बताया गीता का महत्व

Raigad News - वृंदावन से आए सदानन्द महाराज ने सोमवार को महाभारत युद्ध में अर्जून-कृष्ण संवाद, माता अनुसुइया भक्ति, मन: स्थिति,...

Dec 10, 2019, 08:25 AM IST
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वृंदावन से आए सदानन्द महाराज ने सोमवार को महाभारत युद्ध में अर्जून-कृष्ण संवाद, माता अनुसुइया भक्ति, मन: स्थिति, संगत व शब्द का असर को आध्यात्मिक घटनाओं के माध्यम से समाज के लोगों को श्रवण कराया। जिंदल रोड़ स्थित पार्क एवेन्यू कालोनी में चार दिवसीय श्रीमद्भागवत कृष्ण कथा आयोजन बंसल परिवार की तरफ से कराया जा रहा है। जाने क्या जादू भरा है...कृष्ण तुम्हारी गीता में...गोविंद तुम्हारी गीता में...गीत गाकर सदानंद महाराज ने कथा स्थल पर पहुंचे श्रोताओं को भगवान की वाणी गीता का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि परमात्मा के अनेक नाम है। सत्य वही एक परमात्मा है, वही कृष्ण, वही राम, अल्लाह, ओमकार है। इस 130 करोड़ देश में एक राष्ट्रपति उसी तरह परमात्मा केवल एक है। महाराज ने जीवन में बाधा बन रहे रहस्य को आध्यात्मिक इतिहास के माध्यम सुनाया।

संगत व शब्द का असर- धर्मराज युधिष्ठिर ने धूर्त शकुनि का संगत किया, परिणाम क्या हुआ अपनी ही प|ी को चौरस में दाव पर लगा दिया। द्रौपदी ने कहां अंधे का बेटा अंधा होता। उसके एक शब्द से महाभारत हो गया। उसी द्रौपदी का भरी सभा में चिर हरण होने लगा। जहां भीष्म, द्रोण सहित सभी बैठे रहे किसी ने साथ नहीं दिया।

श्रोताओं को आध्यात्मिक घटनाओं के माध्यम से समाज को दिया संदेश

माता अनुसुइया: भक्ति

देवी अनुसुइया की भक्ति की शक्ति में ब्रहा, विष्णु, महेश को बालक बना दिया। तीनों लोक के देवताओं ने बालक रुप में भिक्षा में दूध मांगा। तीनों को कटोरी में दूध दिया तो उन्होंने मना कर दिया हम ऐसे दूध नहीं पीते। तुम अपने गोद में लेकर बैठाओ दूध पिलाओं। माता ने पति की पवित्रता को बनाएं रखा और शक होने पर आंख बंद कर देखा तो पाया कि यह नारायण है। अंत में पार्वती, लक्ष्मी को अपने पति को मांगने के लिए आना हुआ। जीवन में भक्ति ऐसी हो भगवान बालक बनकर आ जाए।

अर्जुन-कृष्ण संवाद: संदेश सत्य के लिए जियो

युद्ध शुरु होते ही अर्जुन को पसीना आ गया। जिनकी गोदी में खेला उनको सामने देख कर हथियार डाल दिया। इस संवाद के माध्यम से बताया कि संसार में सत्य के लिए जीवन जीयों।

अर्जुन- हे कृष्ण जी क्या बताऊं मैं, पूजनीय गुरुओं पर कैसे बाण चलाऊ मै...गंगा जल से जिनको नहलाकर आसन पर बिठाया मैने...हे प्रभु कैसे सशस्त्र उठाऊं।

मन: स्थिति -मन इंद्रियों को परमात्मा की सेवा में लगा दो। कबीर दास ने कहा कि माया मरी ने मन मारा, मर-मर गया शरीर। महान तपस्वी दुर्वासा ऋषि ने हजारों वर्ष तपस्या किए। विश्वामित्र ने घर, परिवार को त्याग कर घोर तपस्या की।

कृष्ण- अर्जुन तु नहीं बोल रहा...तेरा मोह बोल रहा है। इससे पहले कितने युद्ध किए हजारों को मारा तब कहां सोच रहा जैसे एक न्यायाधीश मृत्युदंड देने में कभी दया नहीं करता।

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