बच्चों को बचपन से ही संस्कारवान बनाएं : महाराज रानू
माता-पिता को अपने बच्चों में संस्कार की नींव बाल्यकाल से ही डालनी चाहिए। समाज में आज संस्कार की कमी होने से लोग एक दूसरे का आदर नही करते। वही जो बच्चा संस्कार वान होता सदा उसके माता-पिता का नाम रौशन होता। भगवान राम इसके सबसे बड़े उदाहरण है।
भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अवसर पर यह बातें महाराज रानू ने कही। रविवार को कथा समापन के आखिरी दिन पार्क एवेन्यू कॉलोनी के मंदिर प्रांगण में संस्कार, गुरु महत्व, सच्चा मित्र, जीवन रहस्य की बात बताई।
महाराज ने कहा कि जीवन में एक ही ऐसा रिश्ता होता जिसे इंसान खुद बनाता। धरती पर जन्म से पहले परमात्मा हर रिश्ते को बना कर भेज देते है। मित्र की पहचान उसे खुद करनी होती, सच्चा मित्र सबसे अनमोल धन होता है।
महाराज ने कहा कि जीवन में एक ही ऐसा रिश्ता होता जिसे इंसान खुद बनाता। धरती पर जन्म से पहले परमात्मा हर रिश्ते को बना कर भेज देते है। मित्र की पहचान उसे खुद करनी होती, सच्चा मित्र सबसे अनमोल धन होता है।
एक बार की बात है द्वापर युग में बाल कृष्ण और सुदामा गुरुकुल की शिक्षा ले रहे। ब्राह्मण होने के कारण सुदामा ज्ञानी थे, उन्होंने देखा जो चना रास्ते में खाने के लिए मिला। इसे खाने पर दरिद्रता जीवन भर रहेगी। कृष्ण को बचाने के लिए उन्होंने पोटली में भरे सारे चना खा लिए।
}माता-पिता संस्कार दे
महाराज रानू ने कहा कि जीवन जीने के लिए संस्कारवान होना जरूरी है। जिस इंसान में संस्कार होता है, वह सदा ही हर किसी का प्रिय होता है। बच्चों को संस्कार दे, जिससे वह हर किसी का आदर कर आपका सम्मान बनाए। वर्तमान परिवेश में संस्कारहीन लोग ज्यादा हो गए। जो अंहकार में इस कदर डूब गए कि इतना भी आभास नहीं जीवन में मृत्यु निश्चित है।
}गुरु अनमोल
हर इंसान के जीवन में एक गुरु का बहुत बड़ा योगदान होता है। गुरु के बिना जीवन के रहस्य को समझ पाना नामुमकिन है। शिक्षित होने के लिए गुरु की ज़रुर होती है। उसी शिक्षा से जीवन की नींव तैयार होती है। जिसपर हम पूरा जीवन जीते है। हमेशा गुरू पर भरोसा रख कर उनका आदर करें। भगवान को भी धरती पर आकर गुरू बनाने की ज़रुरत पड़ी। हम तो इंसान है।
}परीक्षित मोक्ष
जीवन का वास्तविक रहस्य संसार के मोह से दूर ईश्वर के रहस्य को जानना है। धरती पर वही महान, पूजनीय बना, जिसे उस परम तत्व की प्राप्ति हुई। श्रृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि 7 दिन बाद उसकी मौत होगी। इससे बचने के लिए वे मोक्ष का रास्ता तलाशने लगे। तब शकुदेव ने उन्हें भागवत की कथा सुनाई। सातवें दिन तक्षक सर्प आकर उनको डस लेता है।
कॉलोनी में कथा सुनाते महाराज रानू।
महाराज इन प्रसंगों पर बोले