आंबा कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती में गड़बड़ी, परियोजना अधिकारी निलंबित

Raigad News - रायगढ़ | लैलूंगा एकीकृत बाल विकास परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती गड़बड़ी के मामले में...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:21 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news mango worker and assistant recruitment disorder project officer suspended
रायगढ़ | लैलूंगा एकीकृत बाल विकास परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती गड़बड़ी के मामले में परियोजना अधिकारी जसिंता टोप्पो को महिला एवं बाल विकास विभाग के अवर सचिव विजया खेस्स ने निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में जसिन्ता टोप्पो को जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग रायगढ़ में पदस्थ किया गया है।

खास बात यह है कि जपं सदस्य और विधायक प्रतिनिधि पर रुपए लेने के भी आरोप लगाए गए थे। इसकी शिकायत जपं सीईओ और लैलूंगा थाने भी गई थी, लेकिन इसकी जांच ही नहीं की गई। यही नहीं, भर्ती प्रक्रिया को ही निरस्त भी कर दिया गया था। लैलूंगा में एकीकृत बाल विकास परियोजना के अंतर्गत 4 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं 22 सहायिका और 18 मिनी कार्यकर्ताओं की भर्ती के लिए 2 अगस्त 2018 में आवेदन पत्र मंगाए गए थे। वरिष्ठता सूची बनने के बाद छानबीन समिति सूची को अंतिम रूप दे चुकी थी। नियुक्ति आदेश भी जारी हो गया, लेकिन इस दौरान जनपद के कुछ जनप्रतिनिधियों ने कथित तौर पर वसूली भी प्रारंभ कर दी थी। लैलूंगा के विधायक प्रतिनिधि ललित कुमार यादव पर 12 हजार और जनपद सदस्य जानकी भगत पर 10 हजार रुपए लेने का आरोप लगा। दशकंठ यादव नामक व्यक्ति ने शपथ पत्र के माध्यम से इसकी शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाए थे कि विधायक प्रतिनिधि व जपं सदस्य ने उसकी प|ी भारती यादव को मिनी आंबा कार्यकर्ता के पद में भर्ती करने पैसे लिए थे। इसकी शिकायत सीईओ सिदार से की गई थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों पर लगे आरोपों की वजह से उन्होंने इस गंभीर मामले की जांच करवाना भी उचित नहीं समझा। जब दैनिक भास्कर ने इसका खुलासा किया तो इस भर्ती प्रक्रिया को आनन फानन में 20 सितंबर 2018 को निरस्त कर दिया था।

गलती पूरी समिति की, कार्रवाई सिर्फ एक पर

लैलूंगा जपं सीईओ ने भर्ती में गड़बड़ी के लिए परियोजना अधिकारी को ही जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी थी। कलेक्टर की अनुशंसा पर परियोजना अधिकारी को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। नियुक्ति का आदेश अकेले परियोजना अधिकारी के हाथों में नहीं होता। आवेदन आने के बाद अंतरिम पत्रक समिति द्वारा बनाई जाती है। समिति के अध्यक्ष ब्लॉकों में जपं सीईओ होते हैं, परियोजना अधिकारी सचिव, सदस्यों में बीईओ और बीएमओ व जपं के जनप्रतिनिधि भी रहते हैं। समिति की बैठक में मूल्यांकन पत्रक बनाने के बाद वरीयता सूची तैयार होती है। जिसमें सभी सदस्यों का हस्ताक्षर होता है। इसके बाद दावा आपत्ति मंगाई जाती है। निराकरण करने के बाद नियुक्त आदेश जपं सीईओ द्वारा जारी किया जाता है पर इस मामले में केवल परियोजना अधिकारी को ही दोषी मानकर निलंबित कर दिया गया है।

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