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राम मंदिर में कथा के अवसर पर तीर्थराज महाराज ने कहा, पहला धर्म राष्ट्रप्रेम है

Raigad News - बैकुंठपुर स्थित भुजबंधान तालाब किनारे बसे राम मंदिर में गुरुवार को कुंड बनाकर विधि-विधान से विष्णु पूजा की गई।...

Jan 24, 2020, 07:30 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news on the occasion of the story in ram temple tirtharaj maharaj said the first religion is the love of the nation
बैकुंठपुर स्थित भुजबंधान तालाब किनारे बसे राम मंदिर में गुरुवार को कुंड बनाकर विधि-विधान से विष्णु पूजा की गई। पंडित तीर्थराज महाराज ने कथा के पहले दिन भागवत महत्म, परीक्षित जन्म, कुंती कृष्ण स्तुति का वर्णन किया। वहीं धर्म के माध्यम से समाज को सत्यकर्म का ज्ञान दिया। ब रविवार को 1001 रामानुजदास ब्रह्मचारी महाराज की स्मृति में आठ दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का आयोजन शुरू किया गया।

श्रीमद्भागवत कथा

कुंती भगवान से विपत्ति मांगती है। उन्होंने कहा जब मैं दुख में होती हूं तो आप को याद करती और पास नजर आते है। सुख के समय में इंसान अपने लोभ में इस कदर खो जाता कि वह भगवान को याद करने का समय नहीं निकाल पाता। आज मनुष्य व्यर्थ के प्रपंचों में पड़कर अपने आप को ही भूल गया। वह संसार में किस लिए आया। जब मां के पेट में रहता तो रोता भगवान इस संसार में मत भेजा लेकिन जब रोते हुए जन्म लेकर संसारिक मोह माया में आ जाता तो वह कभी इससे दूर नहीं निकलना चाहता। लेिकन यह संसार नाश्वर है।

श्रमद् भावगत कथा सुनाते पंडित तीर्थराज महराज कथा का श्रवण करते श्रद्धलु ।


पंडित अशोक कुमार पंडा ने गुरुवार को अग्रोहा भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर भक्तों को मथुरा गमन और रुक्मणी विवाह के बारे में श्रोताओं का बताया। भगवान का मथुरा में जाना कंश के पाप से वहां के रहवासियों को मुक्त कराने की लीला है। वही रुक्मणी का विवाह उनका भाई रुक्मण दोस्त शिशुपाल से करना चाहता था। लेकिन रुक्मणि के सतकर्म और अनन्न भक्ति को देखकर भगवान ने रुक्मणी का हरण किया और उनसे विवाह कर उनकों रानी बनाया।


महाराज ने बताया कि जो वस्तु अपने आत्म अनुकूल ना हो वैसा व्यवहार संसार में किसी के लिए नहीं करना चाहिए। यह धर्म का रास्ता है। आज हम अपने आत्म स्वार्थ के लिए संसार का अहित करने पर लगे हुए है। हर तरफ लोगों में धर्म के नाम पर फूट डालकर धर्मयुद्ध का माहौल बनाया जा रहा है। इससे हमारी मानवता नष्ट होती जा रही है, लोग एक दूसरे से प्रेम की भावना नहीं रखते है। हमारा प्रथम धर्म राष्ट्रधर्म है, वही परमात्मा नारायण की पूजा है। जिनका जीवन राष्ट्र प्रेम में लगा रहा, उसने अपना जीवन सफल बना लिया।


परीक्षित को श्राप मिलता है कि सातवें दिन उनको तक्षक सर्प डस लेगा और उनकी म़ृत्यु हो जाएगी। संसार के सभी ऋषि मुनि उनको कथा सुनाने से मना कर देते है। तब जाकर शुकदेव महाराज द्वारा कथा का श्रवण कराया जाता है। इसके बाद उनको मोक्ष मिलता है। आज हम मनुष्य उनके ही माध्यम से कथा सुनने का सौभाग्य मिला है।


भागवत के महात्म्य में सनातन ऋषियों द्वारा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य के लिए नारद जी से हरिद्वार के आनंद घाट पर कथा सुनी गई। इसके बाद आत्मदेव ब्राह्मण की कथा में गोकर्ण द्वारा पुंधकारी का उद्धार बताते हुए भागवत महिमा का श्रवण कराया गया। कथा जीवन का आधार है, भगवान स्वयं इसका श्रवण करते है। संसार में जितनी भी मानवता है, वह सब कथा से ही है। कथा सदाचार का मूर्त रूप है। इसलिए वेद पुराणों के अध्यन के साथ ही ज्ञानियों के बीच में बैठकर ज्ञान प्राप्त करें। जीवन का सार हमारे वेद पुराणों में निहित है।

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