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100 करोड़ में बनेगा रेस्क्यू सेंटर, जहां उत्पाती हाथियों को रखकर सुधारेंगे, धरमजयगढ़ और कापू रेंज होंगे प्रभावित

Raigad News - लेमरू एलीफेंट रिजर्व में 100 करोड़ का रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। यहां उत्पाती हाथियों को लाकर सुधारेंगे। जब...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:30 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news rescue center to be built in 100 crores where growers will improve by keeping elephants dharamjaigarh and kapu range will be affected
लेमरू एलीफेंट रिजर्व में 100 करोड़ का रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। यहां उत्पाती हाथियों को लाकर सुधारेंगे। जब उत्पाती हाथी की स्थिति सामान्य हो जाएगी उसे पुन: जंगल में छोड़ दिया जाएगा। 4 वन मंडल के 10 से अधिक परिक्षेत्र को शामिल कर रिजर्व बनाने सर्वे की प्रक्रिया जारी है। अभी 1995 वर्ग किलोमीटर में ही प्रस्तावित किया गया है। सर्वे के बाद कटघोरा वन मंडल के ही और भी परिक्षेत्र शामिल हो सकते हैं।

20 साल से वनमंडल कोरबा में जारी हाथी उत्पात की समस्या से निपटने चौथी बार लेमरू एलीफेंट रिजर्व बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस पर रायपुर में इसकी घोषणा की थी। शनिवार को सीएम ने 100 करोड़ में रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की। अभी सूरजपुर जिले के तमोर पिंगला में रेस्क्यू सेंटर है जहां उत्पाती हाथियों को रखा जाता है। रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए सीसीएफ वन्य प्राणी गढ़उपरोड़ा क्षेत्र का निरीक्षण कर चुके हैं। रिजर्व में 4 परिक्षेत्र बालको, लेमरू, कुदमुरा, पसरखेत के 45 हजार 360 हेक्टेयर एरिया को शामिल किया गया था। अब इसका दायरा 4 वनमंडल के 10 रेंज तक बढ़ाया जा रहा है। रिजर्व का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर में होगा।

जिले के वन परिक्षेत्र कुदमुरा के जंगल में हाथियों का झुंड पहली बार 29 सितंबर 2000 को ग्राम कलमीटिकरा में पहुंचा था। यह गांव रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल के गांव खड़गांव से नजदीक है। तब से हाथी साल भर तक वनमंडल के जंगल में घूमते हुए नुकसान करते रहते हैं।

प्रदेश में अभी 254 हाथी, 27 जिले के 15 वनमंडल प्रभावित - प्रदेश में अभी हाथियों की अनुमानित संख्या 254 है। जिसमें से सरगुजा वन वृत्त में 110, बिलासपुर वृत्त में 121 व रायपुर वन वृत्त में 23 हाथी हैं। वनमंडल सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, धरमजयगढ़, कटघोरा, मरवाही, कोरबा, रायगढ़, महासमुंद, बलौदा बाजार, खैरागढ़ सबसे प्रभावित है।

1995 वर्ग किलोमीटर में बनेगा रिजर्व, सर्वे के बाद बढ़ सकता है उसका दायरा

वन मंडलों में इन परिक्षेत्रों को किया जाएगा शामिल





यह होगा फायदा

पुनर्वास की जरूरत नहीं, 24 घंटे तैनात रहेंगे कर्मचारी

एलीफेंट रिजर्व के लिए गांवों के पुनर्वास की जरूरत नहीं होती है। वन अधिकारियों का मानना है कि यह अलग तरह का अभयारण्य होता है। अभयारण्य हाथियों के पर्याप्त भोजन व पानी की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए भोजन के लायक पौधे व घास लगाए जाएंगे। साथ ही पानी के लिए भी नदी-नालों में एनीकट बनाया जाएगा। प्रभावित गांवों की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। हाथियों पर नजर रखने के लिए अलग से कर्मचारी 24 घंटे नजर रखते हैं।

हमले में 20 साल में 65 लोगों की हुई मौत

वनमंडल कोरबा में हाथी पहली बार 2000 में आए थे। इसके बाद से यहां लगातार उत्पात मचा रहे हैं। कोरबा के साथ कटघोरा वन मंडल में 20 साल में 65 लोगों की मौत हाथी हमले से हो चुकी है। साथ ही 28 लोग घायल हुए हैं। मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ 65 लाख 80 हजार का मुआवजा अब तक दिया गया है।

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