28 दिनों तक घूमने के बाद यदि सर्दी खांसी, बुखार हो तो कोरोना का खतरा
मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायस पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस को लेकर तीन दिवसीय सेमिनार का आयोजन हो रहा है। इसमें जिले के डॉक्टर्स, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, स्वास्थ्य विभाग के हर कर्मचारियों इस बीमारी से अलर्ट रहने की सलाह दी जा रही है। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज कैंपस में कम्युनिटी मेडिसिन, माइक्रोब्रायोलॉजी, मेडिसिन विभाग के डॉक्टर्स ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता बरतने के कई टिप्स बताए।
इस दौरान कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ एके मिंज ने कहा कि कोरोना वायरस 1960 में इसी तरह का एक वायस फैला था, अब यह नए तरह से यह वायरस 113 देशों में फैल चुका है और देश में इसके 60 मरीज मिल चुके हैं। इसे पहचाना नहीं जा सकता है, कंफर्म केस लैब में पॉजिटिव मिलता है तब ही इसकी शिनाख्ती हो सकेगी। इसमें संदिग्ध मरीज यदि मिलते हैं तो उसकी रिपोर्ट जब तक नहीं आ जाता है तब तक घबराने की ज़रुरत नहीं है। इसमें संदिग्ध मरीज इसे माना जाएगा जो 113 देशों में से किसी एक देश का यात्रा या फिर देश के अलग-अलग हिस्सों से कम से कम 28 दिनों तक घूमने के बाद यदि घर पहुंचता है और उसे खांसी, सर्दी, जुखाम के साथ बुखार होता है तो इलाज कराने के साथ जांच कराए।
माइक्रोबॉयोलाजी विभाग के डॉ राकेश कुमार ने कहा कि हॉस्पिटल में इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। इसपर मेडिकल स्टाफ को एहतियात बरतना जरूरी होता है। वहीं स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारी जो हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं, उन्हें मास्क पहनने में भी सतर्कता बरतनी होगी। वहीं मरीजों के ट्रीटमेंट पर भी विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। डॉ वेदप्रकाश पिल्ले ने कहा कि मरीज हॉस्पिटल में भर्ती होता है, तो कोरोना वायरस को लेकर कोई वेक्सिन नहीं है इस वजह से उसे जांच के साथ जो दवाएं दूसरी बीमारियों के लिए उपयोग होता है। उसे ही डाइग्नोसिस करके उसका उपयोग डॉक्टरों से सलाह लेकर करें। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स, स्टॉफ नर्स, वार्ड बॉय, सभी स्वास्थ्य कर्मचारी, जिले के स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है।