प्रस्थानम का सीमित प्रचार करना चाहते हैं संजय दत्त

Raigad News - प्रस्थानम का सीमित प्रचार करना चाहते हैं संजय दत्त संजय दत्त अपनी अपकमिंग फिल्म प्रस्थानम में अभिनय करने के...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:33 AM IST
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प्रस्थानम का सीमित प्रचार करना चाहते हैं संजय दत्त

संजय दत्त अपनी अपकमिंग फिल्म प्रस्थानम में अभिनय करने के साथ साथ इसका निर्माण भी कर रहे है। यह बतौर निर्माता उनकी पहली फिल्म है। जानकारी सामने आई है कि वे इस फिल्म का सीमित प्रमोशन करना ही प्रिफर कर रहे हैं।

सूत्र बताते हैं, ‘संजय हमेशा से ही अपनी फिल्मों के लिए लिमिटेड प्रोमोशंस करते आए हैं। उनका मानना है कि अगर उनकी फिल्म का कंटेंट अच्छा होगा तो उसको अच्छी प्रतिक्रियाएं भी मिलेंगी। इस वजह से उन्होंने मीडिया से भी कम ही इंटरेक्शन्स किये हैं। संजय दत्त के साथ साथ उनकी प|ी मान्यता जो इस फिल्म के निर्माण का काम संभाल रही हैं वह भी ज्यादा पब्लिसिटी में विश्वास नहीं रखतीं।’

 इस फिल्म का निर्देशन ओरिजिनल फिल्म के निर्देशक देव कट्टा ने किया है और इसमें संजय के अलावा मनीषा कोइराला, जैकी श्रॉफ , अली फज़ल ,अमयारा दस्तूर जैसे कई अन्य कलाकार भी नजर आनेवाले हैं ।

सितम्बर के बाद अक्टूबर में भी नहीं रिलीज होगी अमिताभ की ‘झुंड’

अमिताभ बच्चन ने इस महीने के शुरुआत में अपनी अगली फिल्म ‘झुंड’ की शूटिंग पूरी की थी। नागराज मंजुले निर्देशित इस फिल्म के मेकर्स ने पहले इसकी रिलीज डेट 20 सितंबर अनाउंस की थी पर अब इसकी रिलीज डेट टल चुकी है। इसके पीछे दो वजह हैं, एक तो फिल्म पर काम पूरा नहीं हुआ है और दूसरा 20 सितम्बर को पहले से ही दो बड़ी फिल्में ‘जोया फैक्टर’ और ‘पल पल दिल के पास’ रिलीज हो रही हैं। ऐसे में मेकर्स नहीं चाहते कि उनकी फिल्म अभी रिलीज हो।

सूत्र बताते हैं कि मेकर्स इस फिल्म को 11 अक्टूबर को अमिताभ के जन्मदिन पर रिलीज करने का मन बना रहे थे पर उस दिन ‘द स्काय इज पिंक’ रिलीज होने वाली है। हालांकि मेकर्स अमिताभ के जन्मदिन पर फिल्म से जुड़ी कोई जानकारी जरूर रिलीज करेंगे। बहरहाल, यह फिल्म कब रिलीज होगी अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं।

15 नवम्बर को रिलीज होगी विकी की फिल्म

विकी कौशल और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म 'भूत पार्ट वन, द हॉन्टेड शिप' का नया पोस्टर शुक्रवार को जारी किया गया। भानु प्रताप सिंह निर्देशित इस फिल्म को करण जौहर,अपूर्व मेहता और शशांक खेतान ने प्रोड्यूस किया है। यह 15 नवम्बर को रिलीज होगी। गौरतलब है कि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान विकी कौशल एक हादसे में अपना जबड़ा तुड़वा बैठे थे।

कंटेंट पर भरोसा

रिलीज डेट का इंतजार

बॉलीवुड में अंग्रेजी का बोलबाला होने की धारणा को झुठला रहे हैं इस इंडस्ट्री से जुड़े लोग

फिल्मोद्योग में अब हिंदी उपेक्षित नहीं, लहरा रहा परचम

मौजूदा पीढ़ी के मेकर और एक्टर्स का जोर देवनागिरी लिपि सीखने पर

अमित कर्ण/ सोनुप सहदेवन। मुंबई

हिं दी भाषा के प्रचार प्रसार में हिंदी फिल्मों की भूमिका साहित्य से भी ज्यादा रही है। सुनने में यह अतिरंजित लगे, मगर यह बात सच है। हिंदी फिल्मोद्योग को लेकर अभी तक आम धारणा यही रही थी कि हिंदी के दम पर चलने वाली इस इंडस्ट्री में हिंदी उपेक्षित है ओर अंग्रेजी का बोलबाला है। यह धारणा अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है और आज की तारीख में इस उद्योग में हिंदी भाषा का परचम लहरा रहा है। हिंदीभाषी मेकर्स, एक्टर्स और तकनीशियनों की तादाद बढ़ी है। अंग्रेजी दां मेकर्स और यहां तक कि नेटफ्लिक्स और एमेजॉन जैसी कंपनियां अपने वेब शोज के लिए हिंदी हार्टलैंड की कहानियों पर जोर दे रहे हैं। एेसे में फिल्म मेकिंग में वर्षों से कायम इंग्लिश बैकग्राउंड के लोगों के दबदबे को हिंदी पट्टी से आए लोग खासी चुनौती दे रहे हैं। स्टार किड्स बाहर जाकर फिल्म मेकिंग की बारीकियां सीख रहे हैं, मगर यहां आकर वे हिंदी जुबान पर पकड़ बना रहे हैं। विदेशों से यहां आए कलाकार भी बॉलीवुड में हिंदी का बोलबाला देखकर हिंदी सीख रहे हैं।

अपने जन्मदिन पर आयुष्मान खुराना शेयर कर रहे हैं अपने संघर्ष के दिनों के कुछ किस्से

‘लोग सीधा मेरे मुंह पर बोलते थे कि, मैं लीड रोल के काबिल नहीं’

दिल की बात...

फि ल्मों में एंट्री के लिए मैं बहुत ऑडिशन दिया करता था। जब 2006 में पहली बार मुम्बई आया तो यहां पर उस समय होने वाले ऑडिशंस में एक रूम में सिर्फ एक ही आदमी का ऑडिशन लिया जाता था। फिर 2007 के अंत में जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि एक रूम में ही बहुत सारे लोगों का ऑडिशन लिया जा रहा है। सभी को एक दूसरे के सामने ही ऑडिशन देना पड़ता था। मैंने सोचा कि यार एक साल में इतना चेंज कैसे आ गया।

मैंने कास्टिंग डायरेक्टर से कहा कि मैं इन सभी के सामने ऑडिशन नहीं दूंगा। इस पर कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा कि, क्या तुम खुद को स्टार समझने लगे हो। मैंने उसे कहा- स्टार समझने वाली कोई बात नहीं है। मैं इंप्रोवाइज करने में यकीन रखता हूं और मेरी कोई कॉपी कर लेगा तो उसमें मेरा ही नुकसान होगा। मैं सबके सामने ऑडिशन नहीं देना चाहता। ऐसा करो सबसे आखिर में मेरा ऑडिशन ले लो। इतना सुनकर उन्होंने मुझे सीधा निकाल ही दिया। उन्होंने कहा कि यहां ऐसा नहीं चलता है कि तुम अपनी मर्जी से ऑडिशन का नंबर डिसाइड करो। अभी नंबर आया है तो अभी ऑडिशन करना पड़ेगा। इस तरह मैं उस ऑडिशन का हिस्सा ही नहीं रहा। इस वाकए को कोई मेरा अहंकार न समझे। मैं बिल्कुल अहंकारी नहीं हूं। लेकिन उस वक्त यह करना जरूरी था।

अब भाषाई अंतर बहुत बड़ा मसला नहीं है। हाल के बरसों तक फिल्म निर्माण में अंग्रेजी बैकग्राउंड वाले लोगों की तादाद ज्यादा थी। पर अब ऐसा नहीं है। संख्या में तब्दीली आई है। हिंदी बेल्ट से रायटिंग, डायरेक्शन में लोग आए हैं। उनके सेट पर माहौल गैर अंग्रेजी होता है। मिसाल के तौर पर अनुराग बासु के सेट पर बंगाली ज्यादा रहते हैं। अनुराग कश्यप के सेट पर हिंदी वाले बहुत होते हैं। देवनागिरी को कैच करने वाले सॉफ्टवेयर भी बन रहे हैं। उनसे देवनागिरी लिपि में स्क्रिप्ट और डायलॉग लिखे जाने लगेंगे। बाकी जितने भी लोग हिंदी बेल्ट से आए हैं, वे सभी डायलॉग तो हिंदी में ही लिखाते हैं। मुझे तो स्क्रिप्टें और नैरेशन हिंदी में ही होती हैं। बाकी यह अब महज धारणा भर है कि बॉलीवुड में अंग्रेजी बोलने वालों से हम जल्द प्रभावित हो जाते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। यह बस भाषाई कॉम्प्लेक्स है।’

रायगढ़, शनिवार 14 सितंबर, 2019

हिंदी पट्टी के मेकर्स और कहानियों के आने के चलते आया बदलाव

पंकज त्रिपाठी

हिंदी भाषी बेल्ट से आए बॉलीवुड एक्टर

फि ल्मों में एंट्री के लिए मैं बहुत ऑडिशन दिया करता था। जब 2006 में पहली बार मुम्बई आया तो यहां पर उस समय होने वाले ऑडिशंस में एक रूम में सिर्फ एक ही आदमी का ऑडिशन लिया जाता था। फिर 2007 के अंत में जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि एक रूम में ही बहुत सारे लोगों का ऑडिशन लिया जा रहा है। सभी को एक दूसरे के सामने ही ऑडिशन देना पड़ता था। मैंने सोचा कि यार एक साल में इतना चेंज कैसे आ गया।

मैंने कास्टिंग डायरेक्टर से कहा कि मैं इन सभी के सामने ऑडिशन नहीं दूंगा। इस पर कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा कि, क्या तुम खुद को स्टार समझने लगे हो। मैंने उसे कहा- स्टार समझने वाली कोई बात नहीं है। मैं इंप्रोवाइज करने में यकीन रखता हूं और मेरी कोई कॉपी कर लेगा तो उसमें मेरा ही नुकसान होगा। मैं सबके सामने ऑडिशन नहीं देना चाहता। ऐसा करो सबसे आखिर में मेरा ऑडिशन ले लो। इतना सुनकर उन्होंने मुझे सीधा निकाल ही दिया। उन्होंने कहा कि यहां ऐसा नहीं चलता है कि तुम अपनी मर्जी से ऑडिशन का नंबर डिसाइड करो। अभी नंबर आया है तो अभी ऑडिशन करना पड़ेगा। इस तरह मैं उस ऑडिशन का हिस्सा ही नहीं रहा। इस वाकए को कोई मेरा अहंकार न समझे। मैं बिल्कुल अहंकारी नहीं हूं। लेकिन उस वक्त यह करना जरूरी था।

आज की पीढ़ी की नई स्टार अनन्या पांडे की हिंदी रुचि के बारे में उनके पिता चंकी पांडे कहते हैं,

अनन्या तो हॉलीवुड की फिल्में भी कम देखती हैं। वह ज्यादातर हिंदी फिल्मों से नाता रखती हैं। वह पली लिखी भले ही कॉन्वेंट में हो, मगर हिंदी के प्रति उसके प्यार में कोई कमी नहीं है। डायलॉग्स का रोमन हिंदी आने का सिलसिला पंद्रह साल पहले शुरू हुआ था, जब स्क्रिप्ट का सॉफ्टवेयर आ गया था। लोग कागजों की बजाय कंप्यूटर और अब मोबाइल पर टाइप कर कहानियां वगैरह लिखने लगे।

रोमन में लिखी गई हिंदी से साउथ और फॉरेन के एक्टर्स, इनवेस्टर्स को लाने में मिल रही मदद

 ऋषि कपूर और उनके दौर के एक्टर्स देवनागिरी में स्क्रिप्ट लेते हैं। आमिर खान दोनों में कंफर्टेबल हैं। नई जेनरेशन से मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमोषी ने मुझे चौंकाया। उन्होंने एक रायटर से साफ कहा कि हिंदी फिल्म की बात हो तो नैरेशन हिंदी में ही दें। इंंग्लिश में देनी हो तो हॉलीवुड जाकर दें। मैंने सुना है कि कैटरीना कैफ ने भी देवनागिरी लिपि में पढ़ना शुरू कर दिया है। प्रोड्यूसर्स में से भूषण कुमार हिंदी में नैरेशन लेना पसंद करते हैं। हिंदी में सुनना और पढ़ना भी पसंद करते हैं। यह धारणा अब पुरानी हो चुकी है कि कमजोर अंग्रेजी वालों को गिरी हुई नजरों से देखा जाता है। अच्छी हिंदी जानने वालों को एक्टर-प्रोड्यूसर्स, डायरेक्टर सब सम्मान की नजर से देखते हैं। ठग्स ऑफ हिंदोस्तान वाले विजय कृष्ण आचार्य तो कानपुर से हैं। उनकी दोनों भाषाएं अच्छी है। पिता की तरह अभिषेक बच्चन भी देवनागिरी लिखने पढ़ने में बहुत अच्छे हैं।

फि ल्मों में एंट्री के लिए मैं बहुत ऑडिशन दिया करता था। जब 2006 में पहली बार मुम्बई आया तो यहां पर उस समय होने वाले ऑडिशंस में एक रूम में सिर्फ एक ही आदमी का ऑडिशन लिया जाता था। फिर 2007 के अंत में जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि एक रूम में ही बहुत सारे लोगों का ऑडिशन लिया जा रहा है। सभी को एक दूसरे के सामने ही ऑडिशन देना पड़ता था। मैंने सोचा कि यार एक साल में इतना चेंज कैसे आ गया।

मैंने कास्टिंग डायरेक्टर से कहा कि मैं इन सभी के सामने ऑडिशन नहीं दूंगा। इस पर कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा कि, क्या तुम खुद को स्टार समझने लगे हो। मैंने उसे कहा- स्टार समझने वाली कोई बात नहीं है। मैं इंप्रोवाइज करने में यकीन रखता हूं और मेरी कोई कॉपी कर लेगा तो उसमें मेरा ही नुकसान होगा। मैं सबके सामने ऑडिशन नहीं देना चाहता। ऐसा करो सबसे आखिर में मेरा ऑडिशन ले लो। इतना सुनकर उन्होंने मुझे सीधा निकाल ही दिया। उन्होंने कहा कि यहां ऐसा नहीं चलता है कि तुम अपनी मर्जी से ऑडिशन का नंबर डिसाइड करो। अभी नंबर आया है तो अभी ऑडिशन करना पड़ेगा। इस तरह मैं उस ऑडिशन का हिस्सा ही नहीं रहा। इस वाकए को कोई मेरा अहंकार न समझे। मैं बिल्कुल अहंकारी नहीं हूं। लेकिन उस वक्त यह करना जरूरी था।

प्रकाश भारद्वाज

आमिर खान के बरसों से डायलेक्ट कोच रहे

 बहुत सारी चीजें आपको जिंदगी में बेहतर करने के लिए मोटिवेट करती हैं। ऐसे बहुत सारे लोग थे जो मुझे आकर बोलते थे कि तुम लीड रोल के लिए काबिल नहीं हो। वे लोग सीधा मेरे मुंह पर बोलते थे, लेकिन मैं कभी इससे हताश नहीं होता था। बल्कि मैं इससे और भी मोटिवेट हो जाता था कि जिंदगी में जरूर कुछ कर दिखाना है। मुझे अपने आप पर और अपनी काबिलियत पर यकीन था कि मैं लीड रोल कर पाऊंगा। अगर यह आत्म विश्वास नहीं होता तो शायद मैं मुंबई एक्टर बनने के लिए आता ही नहीं, जिंदगी में कुछ और कर लेता।

स्क्रिप्ट सॉफ्टवेयर के चलते रोमन हिंदी का पिछले सालों में बढ़ा दबदबा

हमारे देश की ही बात करें तो यहां हिंदी हमारी फिल्मों के चलते बची हुई है। मैं न्यूयॉर्क में था। वहां एक अफगानी ने मुझे पहचान लिया और उसने हिंदी में बात की। वह इसलिए कि वह संजय दत्त का बहुत बड़ा फैन रहा है। हमारी हिंदी फिल्में देखते हैं। जर्मनी गया तो वहां एक जर्मन मेरा जूता है जापानी गाते हुए सुना। हिंदी फिल्मों के कारण हिंदी स्प्रेड हो रही है। देवनागिरी में भी स्क्रिप्ट मिलने लगी हैं।'’

यह धारणा टूटी है कि स्टूडियोज में कहानी के नैरेशन अंग्रेजी में ही हों तो लोग इंप्रेस हो पाते हैं। ऐसा नहीं है। अब हर किसी को आइडिया अपील करता है, न कि अंग्रेजी या हिंदी की लच्छेदार भाषा। इस लिहाज से हिंदी पट्टी के इलाके से जो ग्लैमर जगत में आमद हुई है, उससे हालात और बेहतर हुए हैं। वे चाहे विशाल भारद्वाज हों या आनंद एल राय, नीतेश तिवारी और अन्य।’

मानव कौल

एक्टर

दीपक डोबरियाल

हिंदी को प्रधानता देने वाले कॉमेडिन एक्टर

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