सांसारिक भंवर से दूर भगवान की तलाश मोक्ष की प्रथम सीढ़ी: पंडित भागीरथी

Raigad News - शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन शनिवार को नवागड़ी राजापारा में मंदिर में भक्तों द्वारा सुबह विधि पूजा की गई।...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:41 AM IST
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शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन शनिवार को नवागड़ी राजापारा में मंदिर में भक्तों द्वारा सुबह विधि पूजा की गई। मोहल्लेवासी आयोजन समिति के सदस्यों ने तुलसी परिक्रमा कर आराधना की। श्रीमद्भागवत कथा में दोपहर 1 बजे से संगीतकारों द्वारा भजन कीर्तन किया गया। इसके बाद कथावाचक भागीरथी महाराज ने भगवान कृष्ण लीला, गौ लीला, कंश और रुक्मणी विवाह का वर्णन किया। सामाजिक जीवन में ज्ञान योग बातों में अहंकार, मोक्ष की बात बताई।

पंडित जी कहते है कृष्ण मथुरा में जेल के अंदर प्रकट हुए। भगवान के प्रकट होते ही वहां दिव्य मंडल की आभा भी उनके साथ उतर आई, जेल का दरवाजा खुल गया। वासुदेव जी ने यमुना नदी पार कर उनको अपने मित्र नंदन बाबा के यहां गोकुल में छोड़ आए। जहां देवकीनंदन ने ग्वाल बाल बनकर बाल लीला की। वह बाल अवस्था में ही पूतना, सकटासुर सहित कई राक्षसों का वध कर दिए। गोकुलवासियों के घर-घर जाकर माखन चोरी कर खाया। इससे उनके जीवन का उद्धार हुआ। ननंद बाबा ने दान किया, दान से ही घर की शुद्धि होती है। उनके सतकर्मों की वजह से उनके घर भगवान को पधारना हुआ।

तुलसी परिक्रमा के दौरान आनंद लेते भक्त।

कंश वध एवं रुक्मणी विवाह

भगवान कान्हा वृंदावन से मथुरा गए। वहां जब अपने अत्याचारी मामा से मिले तो कंश ने उनका वध करने के लिए गले लगाना चाहा। पहले से ही सब कुछ जानने वाले पालनहार ने कंश का वध कर मथुरा को पाप से मुक्त कर उसका उद्धार किया। इसके बाद द्वारिका का निर्माण कर रुक्मणी से विवाह रचाया। महाराज ने बताया कि रुक्मणी अर्थात लक्ष्मी हम सब के पास है, उस धन को अगर हम शिशुपाल में लगाएंगे तो भगवान जैसे रुक्मणी का हरण कर ले गए वैसे लक्ष्मी का हरण कर ले जाएंगे।

भगवान की लीला इस प्रकार किया वर्णन

भगवान ने गौ चारण की लीला की और हम सब को गौ सेवा करने की प्रेरणा दी। इस तरह भगवान कृष्ण गोविंद कहलाएं। भगवान ने पंच तंत्र को पवित्र कर धरती का उद्धार किया।








जीवन में इन बातों का रखे ख्याल

अहंकार- मनुष्य के पास जब धन की कमी होती तो वह इसे पाने के लिए तरसता है। जब भगवान की कृपा से उसके कर्मों से धन अर्थात लक्ष्मी का आगमन होने लगता है। वह अपने स्वभाव में पवित्रता को भूलकर अहंकारी हो जाता है। इसी अहंकार में रावण, कंश, दुर्योधन का नाश हुआ। हमें जीवन में इनसे सीख लेनी चाहिए।

मोक्ष- यह बहुत ही जटिल प्रश्न है कि मोक्ष कैसे मिलता है। भगवान की लीला का अन्तकरण से वर्णन करेंगे तो आपको इसका उत्तर मिल जाएगा। मोक्ष इंसान को मिलता, उसके कर्मों के आधार पर एक जन्म ऐसा भी आता जब वह सांसारिक मोह बंधन से दूर भगवान की तलाश में खो जाता। यही जीवन का सार है, यही से मोक्ष की शुरुआत होती।

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