सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्लान फिर बदला अब पाइप लाइन बिछाने खोद रहे सड़क
दस साल बाद शुरू हुए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पांच महीने के भीतर ही फिर बदलाव किया जा रहा है। पहले नालों को जोड़ने वाली पाइप लाइन नदी के भीतर से जानी थी अब पानी में पाइप खराब होने की बात कह मरीन ड्राइव को खोदा जाएगा। दोनों तरफ की मरीन ड्राइव खोदकर पाइपलाइन बिछाई जाएगी जो बांजीनपाली के प्लांट तक पहुंचेगी। पहले सात महीने जमीन विवाद के कारण काम शुरू नहीं हुआ। अब काम शुरू होने के बाद पाइप खराब होने की बात कहकर प्लान बदला गया है। इससे एसटीपी बनने में देर होगी।
नगर निगम पिछले 10 साल से सीवेज ट्रीटमेंट की योजना बना रही है। 2017 में निगम ने हैदराबाद की कंपनी को लाखों रुपए देकर इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर तैयार कराया था। डीपीआर में 14 नालों का पानी नदी में पाइप बिछा कर फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने का उल्लेख किया गया। उनके डीपीआर को तकनीकी जांच के बाद अनुमति भी मिल गई। निगम ने टेंडर कर 15 साल ऑपरेशन और मेंटेनेंस की शर्त पर 66 करोड़ रुपए में दिल्ली के इनवायरो इंफ्रा इंजीनियर लिमिटेड कंपनी को टेंडर दे दिया। अब काम शुरू होने के बाद इन तकनीकी त्रुटियों पर सुधार पर कंपनी के इंजीनियरों का सुझाव है कि पाइप को नदी की बजाए सड़क से प्लांट तक पहुंचाया जाए, ताकि लीकेज की समस्या कम हो।
बनने के बाद 3.20 लाख लीटर पानी होगा फिल्टर
केलो नदी में अभी 14 नालों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। इस प्लांट के बनने के बाद इन नालों से करीब 3.20 लाख लीटर गंदा पानी फिल्डर कर नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए अलग-अलग पंपिंग स्टेशन और रिसिविंग चेंबर बनाए जाएंगे। यहां सात तरह से पानी को फिल्टर कर करने के बाद गंदा पानी पंप की मदद से प्लांट तक पहुंचाया जाएगा और फिल्टर कर आगे की तरफ नदी में छोड़ने की प्लानिंग है।
साइट ठीक नहीं इसलिए परेशानी
कुशा बाराल, साइट इंजीनियर
सड़क से पाइप ले गए तो तीन करोड़ का नुकसान
नगर निगम ने हाल ही में शहर के अधिकांश सड़कों का निर्माण कराया है। नई मरीन ड्राइव के निर्माण में भी डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च की गई है। ऐसे में इन सड़कों की खुदाई के बाद उसे नए सिरे से बनाना होगा, जिसके लिए फिर से करीब तीन करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होंगे। निगम के इंजीनियर सड़क कंपनी द्वारा सुधार कर देने की बात कह रहे हैं, लेकिन इस बात का उनके टेंडर में नहीं है।
अभी हमने अनुमति नहीं दी है
अजीत तिग्गा, ईई नगर निगम रायगढ़
पाइप डालने का चल रहा काम।
ऐसे खुदाई कर डाल रहे पाइप।
कास्ट आयरन की लाइफ सिर्फ 30 साल
डक्टाइल की जगह यदि निगम कास्ट आयरन की पाइप लाइन बिछाती है तो इसकी लाइफ 20 साल कम हो जाएगी। इसमें भी रबर और नट बोल्ट नमी मं जंग लगकर टूटने का खतरा रहेगा। इससे बेहतर कंपनी और पीडीएमसी के इंजीनियर सड़क मार्ग को ही बेहतर मान रहे हैं, लेकिन यह काम वे निगम की अनुमति मिलने के बाद ही शुरू कर सकेंगे।
20 इंच की पाइप
बिछाई जाएगी
नदी के दोनों तरफ 14 नालों का पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने के लिए करीब पांच किलोमीटर तक लाइन 500 डाया (20 इंच) चौड़ा पाइप लाइन बिछाई जाएगी। चौड़ाई अधिक होने के कारण सड़कों को दो मीटर से ज्यादा चौड़ाई तक खुदाई करनी होगी। यदि ऐसा हुआ तो सर्किट हाऊस स्कूल से बांजीनपाली तक नदी के दोनों तरफ की सड़क पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।