जिस गांव को साय ने गोद लिया वहां के ग्रामीण कहते हैं “हमन कभु सांसद ला देखे नी अन”

Raigarh News - देश के ग्रामीण इलाकों की दशा और दिशा सुधारने के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी पर चार साल बीतने के...

Bhaskar News Network

Feb 13, 2019, 05:30 AM IST
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देश के ग्रामीण इलाकों की दशा और दिशा सुधारने के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी पर चार साल बीतने के बाद इसमें गांवों की सूरत नहीं बदली। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा सांसद विष्णुदेव साय द्वारा गोद लिए गांव भकुर्रा की है, जहां ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना में जब सांसद साय ने लैलूंगा ब्लॉक के भकुर्रा गांव को गोद लिया तो लोगों में गांव की सूरत बदल जाने की उम्मीदें बढ़ गई लेकिन समय बीतने के साथ सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई। चार साल बीतने के बाद भी गांव का सूरत जस की तस है। भाजपा सांसद द्वारा गोद लिया यह गांव लैलूंगा विधान सभा क्षेत्र में आता है। उस समय भाजपा की सुनीति सत्यानंद राठिया विधायक होने के साथ साथ भाजपा की सरकार में संसदीय सचिव भी थीं। यही नहीं सांसद विष्णुदेव साय केंद्र सरकार में इस्पात राज्य मंत्री भी हैं। इसके बावजूद डेढ़ हजार आबादी वाला यह गांव विकास से कोसों दूर है। गांव में नाली, सड़क, अस्पताल या अच्छे विद्यालय जैसी कोई सुविधा नहीं है।

देखने भी नहीं आए सांसद साय: रायगढ़ लोस सांसद और केंद्र की मोदी सरकार में इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय ने जब भकुर्रा गांव को गोद लिया तो लोगों को उनसे उम्मीदें थीं, लेकिन ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि सांसद ने गांव को गोद तो ले लिया, लेकिन न तो उसे देखने आये और न ही उनका कोई नुमाइंदा लोगों का दुखदर्द जानने आया। सांसद निधि से विकास के लिए अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।





गांव वालों ने बताया कि उन्हें लोग बताते हैं कि सड़क और अन्य कुछ कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाए गए हैं, लेकिन इन प्रस्तावों पर धन कब मिलेगा, कब विकास होगा, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता।

सांसद के गोद लिए गांव के लोग कई समस्याओं से हैं परेशान

जर्जर स्कूल में पढ़ रहे बच्चे. सांसद की ओर से आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गांव भकुर्रा के माध्यमिक विद्यालय के दिन नहीं बदले। चार वर्ष पूर्व गोद लिए इस स्कूल की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। यहां शिक्षकों की कमी है और विद्यालय भवन जर्जर हो गया है। भास्कर टीम ने आदर्श गांव घोषित हुए भकुर्रा में जाकर वस्तुस्थिति जानी तो पाया कि छठवीं कक्षा के कमरे का प्लास्टर उखड़ कर नीचे गिर रहा है। डर के साए में बच्चे पढ़ने को मजबूर है। वर्तमान में यहां पहली से दसवीं तक 300 छात्र पढ़ रहे है। हाई स्कूल में व्याख्याता के पद भी खाली हैं।

कियोस्क सेंटर तक नहीं. ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को उनके ही गांव में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कियोस्क बैंक संचालित कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को गांव में ही बैंक की सुविधाओं का लाभ मिल सके, लेकिन सांसद के गोद लिए गांव में यह सुविधा भी नहीं है। इससे ग्रामीणों को पेंशन से लेकर कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 15 किमी का सफर तय कर लैलूंगा तक जाना पड़ता है।

स्वास्थ्य सुविधा जीरो. कहने को तो भकुर्रा सांसद आदर्श ग्राम है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जीरो है। यहां से 5 किमी दूर एक उप स्वास्थ्य केंद्र है। जिसमें चिकित्सा सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। ग्रामीणों को करीब 15 किमी दूर लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक का सफर करना पड़ता है। भकुर्रा के लोग सांसद व विधायक से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते रहे, उन्हें आश्वासन पर आश्वासन मिलता रहा।

पेयजल का संकट. 1400 आबादी वाले इस गांव में पीने की पानी के लिए 2 ट्यूबेवल, एक बड़ा व एक छोटा पानी टंकी के साथ 10 हैंडपंप है, लेकिन वर्तमान में 5 हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के दिनों में जल स्तर नीचे चले जाने से पानी के लिए मारामारी होती है। ग्रामीणों को ढोंढी की पानी पीना पड़ता है।

प्रशिक्षण केंद्र अधूरा. बीते दो तीन सालों से यहां महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 11 लाख 22 हजार रुपए की लागत से प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण चल रहा है, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ है। प्रशासन की मंशा थी कि यहां महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों को ट्रेनिंग दी जाएगी और उन्हें खुद के पैरों में खड़े करने के लिए आत्मनिर्भर बनाने की मंशा थी। मगर प्रशिक्षण केंद्र का काम अधर में लटका हुआ है।

मजदूरी का भुगतान बाकी. स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब तीन साल पहले मनरेगा के तहत ग्रामीणों ने सड़क निर्माण व स्टॉप डैम निर्माण कार्यों में मजदूरी किया था। इसमें आज तक करीब डेढ़ सौ मजदूरों का 16 लाख रुपए भुगतान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने कई दफा इसकी शिकायत तात्कालीन विधायक व संसदीय सचिव सुनीति राठिया के साथ जपं सीईओ लैलूंगा से भी की थी। फिर भी उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिला।

दो वार्डों में कांक्रीट सड़क भी नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि तीन साल पहले भकुर्रा से मुसकट्टी तक रोजगार गारंटी योजना के तहत सड़क बनाई गई थी, लेकिन वर्तमान में सड़क खराब हो चुकी है। यह सड़क इस कदर खराब हुई है कि उसमें वाहन चलाना तो दूर लोगों का पैदल चलना दूभर हो गया है। इस मार्ग पर वाहन चलाना अत्यंत दुष्कर हो गया है। यहां के ग्रामीणों को स्कूल जाने नन्हे मुन्ने बच्चों को जान जोखिम में डालकर भेजना पड़ता है। यही नहीं, 1400 आबादी वाले इस गांव में 10 वार्ड हैं। जिसमें वार्ड क्रमांक 08 और 10 में आज तक सीमेंट वाली कांक्रीट सड़क नहीं बन पाई है।

मिडिल स्कूल का नया भवन मंजूर हो चुका है


जितने काम मंजूर हुए उन्हें पूरा किया गया


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