कारोबारी बोले- नुकसान होने से कम नहीं हो रहे प्याज के भाव

Raigad News - मार्केट में नया प्याज आने लगा है लेकिन दाम कम नहीं हो रहे है‌ं। खुदरा प्याज शहर के बाजारों में 70 रुपए किलो की दर से...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:41 AM IST
Raigarh News - chhattisgarh news traders said onion prices are not decreasing due to loss
मार्केट में नया प्याज आने लगा है लेकिन दाम कम नहीं हो रहे है‌ं। खुदरा प्याज शहर के बाजारों में 70 रुपए किलो की दर से बिक रहा है। कारोबारियों का कहना है कि नए प्याज की एक बोरी में 60 किलो में से 20 किलो तक प्याज खराब निकल रहा है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टिंग और दूसरे खर्चे भी है। थोक व्यापारियों को नुकसान हो रहा है इसलिए भाव कम नहीं हुए। अभी मार्केट में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से नई फसल का प्याज आ रहा है, इसे थोक कारोबारी ओडिशा के बरगढ़ से ला रहा है।

प्याज कारोबारी संतोष जायसवाल ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग और लेबर चार्ज के खर्च के बाद छोटे कारोबारियों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता है। अभी प्याज थोक में 35-40 रुपए किलो पर बिक रहा है, संतोष ने बताया कि प्रति बोरा ट्रांसपोर्टिंग 20 रुपए पड़ता है और प्याज को छांटने के लिए 300 रुपए लेबर चार्ज देना पड़ता है। 20 किलो तक प्याज खराब निकलने से 700 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए बाजार में अब भी प्याज 70 के दाम में ही मिल रहा है। सब्जियों के दाम नहीं गिरे: फसल खराब होने से सब्जियों की नई फसल बाजार में नहीं आई है। इससे उसके दाम अब भी बाजार में कम नहीं हुए है।

संजय कांप्लेक्स में प्याज की खरीदारी करती महिलाएं।

एक-डेढ़ माह तक ऐसी स्थिति रहेगी

थोक कारोबारी वीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्याज की कीमत कम होने में एक-डेढ़ माह समय लगेगा। आसपास के इलाकों से और ओडिशा में भी लोग प्याज की खेती करते हैं, इसकी पैदावार जब होगी तब इसके दाम कम होगे जो दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक आने की उम्मीद है।

डेली बाजार में क्या है सब्जियों के भाव

40 टमाटर

120 फूलगोभी

40 पत्तागोभी

30 बैगन

55 परवल

40 करेला

20 आलू

70 प्याज

240 लहसुन

बारिश से खराब हुई फसल, बढ़े हैं दाम

टमाटर की कीमत में उछाल का कारण बेमौसम बारिश है। अक्टूबर माह में हुई बारिश के कारण टमाटर की फसल खराब हो गई। कच्चे टमाटर में काले दाग पड़ गए और यह पक नहीं पाए। इसलिए बाड़ियों से टमाटर बाजार तक नहीं पहुंच सके। हर साल ठंड के इस शुरूआती सीजन में लोकल टमाटर की आवक शुरू हो जाती थी पर अब तक ऐसा नहीं हुआ है। गृहिणी अंजू सिंह का कहना है कि पहले चिकन मटन खरीदने में सोचना पड़ता था क्योंकि इसकी कीमत अधिक होती थी। पर अब तो चिकन मटन के बराबर ही हरी सब्जियों के भी दाम हैं।

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