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यस बैंक संकट से छोटे बैंकों की मुश्किल बढ़ी

एक वर्ष पहले
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स्थिति से निपटने के लिए सरकार के प्रयास नाकाफी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि उनके कार्यकाल में किसी बैंक को धराशायी नहीं होने िदया जाएगा। रिजर्व बैंक ने जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया है। एेसी ही बातें सितंबर 2019 में पंजाब महाराष्ट्र सहकारी बैंक के ढहने के समय कही गई थीं। यस के तकनीकी मामलों को तो जल्द सुलझा लिया गया है लेकिन बुनियादी मसले बाकी हैं। क्रेडिट सुइसे बैंक के विश्लेषक आशीष गुप्ता कहते हैं, बैंक को संभालने के लिए 29 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। इस हिसाब से स्टेट बैंक की वर्तमान योजना नाकाफी है। स्टेट बैंक ने कहा है, उसका इरादा यस का विलय करने का नहीं है। गुप्ता कहते हैं, इस अराजक तरीके के कारण अन्य छोटे और मध्यम बैंकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके पास नकदी की कमी होगी। डिपॉजिट नहीं आएंगे। लोगों को कर्ज नहीं मिल सकेगा।

एक प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर ने बताया, 40 से अधिक निजी निवेशकों ने यस बैंक को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। इनमें अधिकतर विदेशी हैं। वे बाद में पीछे हट गए। विदेशी निवेशकों के लिए कड़े नियमों और जोखिम के कारण ऐसा हुआ है। आर्थिक गिरावट की वजह से लोग फिलहाल हिचक रहे हैं।

कोरोना वायरस से ग्लोबल बाजारों की उथल-पुथल से भारत भी प्रभावित हुआ है लेकिन उसके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। यस बैंक के धराशायी होने से सवाल उठे हैं कि भारत के फाइनेंशियल सिस्टम की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है। छह माह के भीतर ध्वस्त होने वाला यह दूसरा बैंक है। यस बैंक की समस्याएं नई नहीं है। 2013 में रिजर्व बैंक में कुछ लोगों ने उसकी स्थिति पर चिंता जाहिर की थी। 2019 में जाकर रिजर्व बैंक ने यस के को- फाउंडर राणा कपूर को हटाया। कपूर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि उनके कार्यकाल में किसी बैंक को धराशायी नहीं होने िदया जाएगा। रिजर्व बैंक ने जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया है। एेसी ही बातें सितंबर 2019 में पंजाब महाराष्ट्र सहकारी बैंक के ढहने के समय कही गई थीं। यस के तकनीकी मामलों को तो जल्द सुलझा लिया गया है लेकिन बुनियादी मसले बाकी हैं। क्रेडिट सुइसे बैंक के विश्लेषक आशीष गुप्ता कहते हैं, बैंक को संभालने के लिए 29 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। इस हिसाब से स्टेट बैंक की वर्तमान योजना नाकाफी है। स्टेट बैंक ने कहा है, उसका इरादा यस का विलय करने का नहीं है। गुप्ता कहते हैं, इस अराजक तरीके के कारण अन्य छोटे और मध्यम बैंकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके पास नकदी की कमी होगी। डिपॉजिट नहीं आएंगे। लोगों को कर्ज नहीं मिल सकेगा।

कोरोना वायरस से ग्लोबल बाजारों की उथल-पुथल से भारत भी प्रभावित हुआ है लेकिन उसके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। यस बैंक के धराशायी होने से सवाल उठे हैं कि भारत के फाइनेंशियल सिस्टम की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है। छह माह के भीतर ध्वस्त होने वाला यह दूसरा बैंक है। यस बैंक की समस्याएं नई नहीं है। 2013 में रिजर्व बैंक में कुछ लोगों ने उसकी स्थिति पर चिंता जाहिर की थी। 2019 में जाकर रिजर्व बैंक ने यस के को- फाउंडर राणा कपूर को हटाया। कपूर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

© 2019 The Economist Newspaper Limited. All rights reserved. From The Economist, translated by DB Corp, published under licence.

The original article, in English, can be found on www.economist.com
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