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इंजीनियर मौके पर गए नहीं, चेंबर में बैठकर बना दिया इस्टीमेट, ठेकेदारों ने कहा: कम राशि में नहीं करेंगे काम

Raigarh News - निगम के इंजीनियर्स ने चेंबर में बैठकर निर्माण कार्यों का इस्टीमेट बना डाला। इतना ही नहीं इस पर शासन से मंजूरी ले...

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:16 AM IST
Raigarh News - engineer did not go to the spot made by sitting in the chamber estimate contractors said will not work in less amount
निगम के इंजीनियर्स ने चेंबर में बैठकर निर्माण कार्यों का इस्टीमेट बना डाला। इतना ही नहीं इस पर शासन से मंजूरी ले ली और टेंडर के बाद ठेकेदार को वर्कआर्डर भी जारी कर दिया। ठेकेदार जब काम शुरू करने के लिए साइट पर पहुंचे, तो उन्हें काम ज्यादा का लग रहा है। वार्ड नं. 14, 4 और 3 में 43 लाख रुपए की डामर सड़क का वर्क आर्डर मिलने के बाद ठेकेदार ने आयुक्त को लागत राशि बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है।

निगम को शासन ने करीब 27 करोड़ रुपए के दो सौ निर्माण कार्यों की मंजूरी दी थी। इसमें से निगम ने पहले 20 करोड़ रुपए के 108 कामों का टेंडर कराया। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर से 7 कराेड़ रुपए के 100 कामों के लिए टेंडर कॉल किया गया। आचार संहिता की वजह से आगे की प्रक्रिया रूक गई। समय की कमी बताकर इंजीनियरों ने मौके का निरीक्षण किए बिना ही इस्टीमेट तैयार कर दिया था । अब स्वीकृत राशि और इस्टीमेट वाली लागत में काफी अंतर दिख रहा है। कुछ ठेकेदार डिपोजिट की जब्ती या दूसरी कार्रवाई के बाद भी काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।

गलत इस्टीमेट बनने से 200 निर्माण कार्यों में से अधिकतर में काम अटका

अधिकारियों के गलत आंकलन के कारण शहर की सड़कें हो चुकी हैं जर्जर।

केस 1. पार्षद पति अमृत काटजू ने बताया कि रामभाठा के डूबान क्षेत्र में बना बड़ी पुलिया का नए सिरे से निर्माण किया जाना है। पूर्व में इंजीनियरों ने इसकी लागत 28 लाख रुपए बताई थी, लेकिन कोमल मित्तल ने जल्दीबाजी में सर्वे कर 9 लाख का इस्टीमेट बना दिया। इसे शासन ने मंजूर भी कर दिया। अब इसे सुधारने के लिए फिर से पत्र लिखा जा रहा है।

केस 2. जून में मुख्यमंत्री की विकास यात्रा के लिए सड़कों पर 12 एमएम डामर की पतली परत बिछाई थी। इस काम के लिए निगम ने ठेकेदार राजकुमार जायसवाल ने 21 लाख रुपए में टेंडर लिया था, लेकिन मौके पर काम होने के बाद इस्टीमेट बनाने वाले इंजीनियरों ने बिल 9 लाख रुपए का बनाया। इसमें अंतर 12 लाख रुपए का आया है।

केस 3. रामलीला मैदान से लेकर होंडा शो रूम तक की सड़क के लिए निगम ने 39 लाख रुपए का टेंडर किया है। यह टेंडर मेसर्स विकास अग्रवाल को मिला है। सड़क पर गड्ढे अधिक हैं, जिसके लिए ठेकेदार को सड़क बनाने के लिए बेस का काम भी करना होगा, टेंडर में गड्‌ढों का उल्लेख नहीं है। ऐसे में ठेकेदार ने आयुक्त को निर्माण राशि बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है।

सीधी बात

समय कम और काम अधिक इसलिए चूक, ठेकेदार से बात कर हल निकालेंगे

आर के भोजसिया, ईई नगर निगम रायगढ़

वार्ड 14,4 और 3 के लिए वर्क आर्डर 43 लाख रुपए का है और काम ज्यादा है?

ठेकेदार ने इस बात पर आपत्ति लगाई है, लेकिन उसे अनुबंध के अनुसार ही काम कराना होगा।

आयुक्त ने भी पूर्व में 21 लाख रुपए के काम में खर्च मात्र 9 लाख बताया है, इस तरह की गलतियां क्यों हो रही है?

काम करेंगे तो गलतियां तो होगी हीं, आप बताइए क्या करना चाहिए हमें?

इंजीनियर एसी चेंबर से बाहर नहीं निकल रहे, टेबल पर ही इस्टीमेट बना रहे है आप क्या कर रहे हैं?

जो टेंडर हुए हैं, उनके लिए हमारे पास बिल्कुल समय नहीं था, इसलिए कुछ में गलतियां हुई हैं।

इंजीनियर जानकार होते हैं, फिर इतना ज्यादा अंतर क्यों हैं स्वीकृत इस्टीमेट में?

हम कोशिश कर रहे हैं, अधिक लागत वाले आपत्तियों पर हम ठेकेदारों से बात करके हल निकालेंगे।

इन सबके चलते काम में जो देरी हो रही है, उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?

शासन के नियमानुसार हम काम कर रहे हैं, थोड़ी बहुत चूक पर सुधार भी हो रहा है। जहां की शिकायत मिलेगी वहां का दुबारा इस्टीमेट तैयार किया जाएगा।

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