छत्तीसगढ़  / प्रदेश का मॉडल टाउन बनेगा रायगढ़, चुनाव के बाद लगेंगे सिम युक्त स्मार्ट मीटर



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  • उपभोक्ताओं को रीडिंग की गड़बड़ी से मिलेगा छुटकारा, सर्वर से कनेक्टेड रहेगा मीटर
  • अभी मीटर की रीडिंग पर 13 लाख रुपए महीना खर्च, शहर के बाद दूसरे जिलों में होगी शुरुआत

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2019, 11:00 AM IST

रायगढ़. स्मार्ट मीटरिंग में रायगढ़ पूरे छत्तीसगढ़ का मॉडल टाउन बनेगा। रायगढ़ प्रदेश का पहला ऐसा शहर होगा, जहां सर्वर कनेक्टेड सिम युक्त स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इसकी रीडिंग महीने के आखिर में सर्वर पर लोड हो जाएगी। जिसके चलते 42 हजार उपभोक्ताओं की बिलिंग एक दिन में की जा सकेगी। खास बात यह है कि बिजली विभाग को हर माह 13 लाख रुपए की बचत होगी। 

टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, नवंबर में इंजीनयरों की दिल्ली में होगी ट्रेनिंग

  1. बिजली कंपनी ने रायगढ़ टाउन के लिए आरएपीडीआरपी योजना अंतर्गत राज्य स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह काम निकाय चुनाव के तुरंत बाद शहर के दोनों जोन में शुरू किया जाएगा। नंवबर में स्थानीय इंजीनियर ट्रेनिंग के लिए दिल्ली जाएंगे। चीफ इंजीनियर कार्यालय के अफसरों ने बताया कि कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग के लिए सभी जिलों से उपभोक्ताओं की संख्या, लाइन लॉस से संबंधित डेटा समेत कई जरूरी जानकारियां मांगी थीं। 

  2. जांच के बाद कंपनी ने रायगढ़ टाउन के डेटा और डॉक्यूमेंटेशन बेहतर होने और पूर्व में दी गई सभी कार्यों को समय से पहले पूरा करने की गति को ध्यान में रखते हुए यह काम रायगढ़ शहर से शुरू करने की योजना बनाई है। शहर में सफल होने के बाद स्मार्ट मीटर दूसरे जिलों में लगाए जाएंगे। इसके पूरी तरह से ऑटोमैटिक होने के कारण उपभोक्ताओं को मीटर की रीडिंग में होने वाली गड़बड़ी से भी छुटकारा मिल जाएगा। 

  3. अभी एक उपभोक्ता की रीडिंग पर 5 रुपए खर्च 

    कंपनी वर्तमान में 5 रुपए प्रति उपभोक्ता के हिसाब से मीटर रीडिंग के लिए खर्च कर रही है। संसाधन उपलब्ध कराने वाला ठेकेदार को सवा रुपए और पौने चार रुपए रीडिंग लेने वाले मीटर रीडर को मिलते हैं। सर्किल में पौने तीन लाख कनेक्शनों की रीडिंग पर करीब 13 लाख रुपए हर महीने खर्च हो रहे हैँ। स्मार्ट मीटर लगने के बाद विभाग इन पैसों से वितरण व्यवस्था बेहतर बनाने मेंटेनेंस स्टाफ की संख्या बढ़ा सकती है। 

  4. कंपनी और उपभोक्ताओं को होंगे यह फायदें 

    1. मैनुअल रीडिंग बंद - उपभोक्ता और कंपनी दोनों के लिए हर महीने रीडिंग का झंझट खत्म हो जाएगा। मैन पावर का इस्तेमाल विभाग दूसरे कामों में कर सकेगा। 
    2. बिजली की बचत- मीटर लगाते समय विभाग खपत के अनुरूप लोड की सेटिंग कर देगा, बिजली का अधिक इस्तेमाल करने पर सप्लाई ऑटोमेटिक बंद हो जाएगी। 
    3. एडवांस वर्क- इस मीटर से विभाग कंज्यूमरों के घर व आसपास के मोहल्लों का लोड के अनुरूप लोगों की डिमांड से पहले अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जा सकेंगे। 
    4. थमेगी चोरी - रीडिंग में हेराफेरी, बिजली की चोरी और लोड कम बता कर अधिक बिजली इस्तेमाल करने वालों की पहचान विभाग आसानी से कर सकेगा। 
    5. बेहतर सप्लाई- मीटर सर्वर से कनेक्टेड होने के कारण सप्लाई बंद होने की शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में फाल्ट ढूंढने में आसानी होगी, शिकायतों का निराकरण में तेजी आएगी। 

  5. इलेक्ट्रॉनिक मीटर में 36 करोड़ से ज्यादा खर्च 

    बिजली कंपनी ने साल 2004 के बाद जिले के पौने तीन लाख कनेक्शनों में इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीटर लगाए हैं। इस काम को पूरा करने में विभाग को 7 साल से अधिक समय लग गया। विभाग ने सर्किल के 2.40 लाख सिंगल फेज में एक हजार प्रति कनेक्शन के हिसाब से 24 करोड़ रुपए, तो करीब 40 हजार थ्री फेज और पंप के लिए प्रति कनेक्शन तीन हजार के हिसाब से 12 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। 

  6. डाक्यूमेंट्स परफेक्ट हैं 

    कंपनी स्मार्ट मीटरिंग का काम सबसे पहले रायगढ़ टाउन से शुरू कराने की योजना है, क्योंकि हमारे डेटा और डाक्यूमेंट्स दूसरे जिलों की तुलना में बेहतर हैं। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसके लगने से कंपनी और उपभोक्ता को दोनों फायदे में रहेंगे। शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में फाल्ट ढूंढने में आसानी होगी, शिकायतों का निराकरण में तेजी आएगी।

    गुंजन शर्मा, ईई, विद्युत मंडल 

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