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जिसे चढ़ना था ए पॉजिटिव उसे चढ़ाना शुरू किया बी पॉजिटिव, जोर से कांपने लगी महिला तो हुआ खुलासा

एक वर्ष पहले
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इलाज के बाद महिला की हालत सुधरी।
  • जिला अस्पताल में ब्लड चढ़ाते वक्त बड़ी लापरवाही 
  • बी पॉजिटिव मरीज को दिया ए पॉजिटिव का ब्लड
  • महिला के बेटे ने गलती देख नर्स को बताया तब बची जान   

जशपुरनगर. जिला अस्पताल में दो महिला मरीजों को ब्लड चढ़ाते वक्त स्टाफ नर्स द्वारा बड़ी लापरवाही की गई। नर्स ने बिना जांचे मरीजों को दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया। जब दोनों मरीजों की हालत बिगड़ने लगी और एक महिला के कांपने से पूरा बेड हिलने लगा तब उसके बेटे ने ब्लड पॉलीबैग देखकर नर्स को गलत ब्लड ग्रुप के बारे में बताया। जिसके बाद आनन-फानन में नर्स ने ब्लड चढ़ाना बंद किया। तब तक दोनों मरीजों की हालत गंभीर हो चुकी थी। मौके पर डॉक्टर पहुंचे और तत्काल मरीजों का उपचार शुरू हुआ। अब दोनों की हालत सामान्य है। 


मधुबनटोली निवासी अंजू बंजारे पति हेलन बंजारे के शरीर में ब्लड की कमी होने के कारण उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया थ। उसके बगल वाले बेड नंबर पर फरसाबहार पंडरीपानी निवासी सुखमनी कूजूर पति बलराम कुजूर भर्ती है। सुखमनी के शरीर में भी ब्लड कम है। इन दोनों महिला मरीजों को सोमवार को ब्लड चढ़ना था। दोनों मरीज के परिवार के एक-एक सदस्य ने ब्लड के लिए पहले ब्लड बैंक में ब्लड डोनेट किया। अंजू का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव और सुखमनी का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है। 


नर्स ने बिना देखे ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया
अंजू के पति हेलन और सुखमनी के बेटे नीरज कुजूर ने बताया कि शाम 3:30 बजे नर्स दोनों को ब्लड चढ़ाने के लिए ब्लड से भरा पॉलीबैग लेकर पहुंची। नर्स ने बिना देखे ही ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया। जिसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। अंजू को चक्कर आने लगे और हाथ-पांव कांपने लगे। पूरा शरीर ठंडा पड़ गया। इधर सुधमनी ठंड से कांपने लगी। 


मरीज के बेटे ने खुद देखा ब्लड पॉली बैग
मरीजों की यह हालत देख सुखमनी के बेटे नीरज ने ब्लड पॉलीबैग की खुद ही जांच की। तो उसने देखा कि उसकी मां को बी पॉजिटिव के बदले ए पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया जा रहा है। उसने तत्काल जाकर नर्स को इसकी सूचना दी। नर्स को इसके बाद अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने दाेनों मरीजों को ब्लड चढ़ाना बंद किया। नर्स ने फोन कर इसकी सूचना डॉक्टरों को दी। डॉक्टर ने मौके पर पहुंचकर दोनों मरीजों को इंजेक्शन दिलवाए। अंजू को सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो उसे ऑक्सीजन भी दिया गया। इधर सुखमनी ठंड से कांप रही थी। उसे अस्पताल से ही पांच से छह कंबल ओढ़ाकर उसके शरीर का तापमान बढ़ाया गया। बड़ी मुश्किल से दोनों मरीजों की जान बची। 


ब्लड डोनेट करने के 5 घंटे बाद आया ब्लड 
मरीज के परिजन ने बताया कि उन्होंने ब्लड चढ़वाने के लिए सुबह 10:30 बजे ही ब्लड बैंक में जाकर ब्लड डोनेट कर दिया था। इसके पांच घंटे बाद दोपहर 3:30 बजे मरीजों को उनके ग्रुप का ब्लड मिल पाया। नर्स दोपहर 3:30 बजे ब्लड लेकर पहुंची थी। 


जांच कर की जाएगी कार्रवाई 
ऐसे किसी भी मामले की कोई शिकायत नहीं हुई है। यदि ऐसा हुआ तो यह बड़ी लापरवाही है। इस मामले में जांच कर लापरवाह कर्मचारी के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। डॉ. अनुरंजन टाेप्पो, आरएमओ, जिला अस्पताल
 

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