चक्रधर समारोह / मीठ-मीठ लागे मया की बानी,.. बंधे रहे डोरी, काने म बाली पर झूम उठे श्रोता



कथक पेश करतीं तनुश्री चौहान कथक पेश करतीं तनुश्री चौहान
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कथक पेश करतीं तनुश्री चौहानकथक पेश करतीं तनुश्री चौहान

  • कथक में रायगढ़ घराने की प्रस्तुति, लोकगीत में राजा चक्रधर पर आधारित गीतों की सराहना 
  • छत्तीसगढ़ी लोकगीत और लोकरंग कलाकारों ने श्रोताओं का जीता दिल, आधी रात तक बंधा रहा समां 
  • बिरजू महाराज द्वारा रचित गजल तेरी महफिल में किस अंदाज में बैठा है दीवाना पर प्रस्तुत किया नृत्य

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2019, 12:46 PM IST

रायगढ़. चक्रधर समारोह के आठवें दिन कथक, लोकगीत, भरत नाट्यम, शास्त्रीय गायन के साथ ही छत्तीसगढ़ी लोकरंग के कलाकारों ने गीत और संगीत से लोगों का दिल जीत लिया। पारंपरिक लोक कलाओं और गीतों पर श्रोता जमकर झूमे। आठवीं शाम की शुरुआत सोमवार को कथक नृत्यांगना तनुश्री चौहान के रायगढ़ घराने के नृत्य, धमार ताल में परंपरागत बोलों का प्रदर्शन से हुई। इसके बाद बिरजू महाराज द्वारा रचित गजल तेरी महफिल में किस अंदाज में बैठा है दीवाना..में नृत्य पेश कर जमकर तालियां बटोरी। 

चक्रधर समारोह : छत्तीसगढ़ के लोक गीत में आशा चंद्र व उनकी टीम ने लोक संस्कृति का अद्भुत समागम

 

छत्तीसगढ़ी लोकगीत में आशा चंद्रा व उनकी टीम के सदस्यों ने राजा चक्रधर के गांव रे, रायगढ़ हावे जेका नाम रे..गेड़ी गीत में सावन महीना आवे.. फुगड़ी गीत में गोबर दे बछरू गोबर दे के माध्यम से उमरी के आला पाला के साथ अन्य लोकगीतों का मंचन कर वाहवाही लूटी। कर्नाटक से आए कलाकार बाला विश्वनाथ व उनके साथियों ने दशावतार की प्रस्तुति दी। बनारस से आए राहुल-रोहित ने गीत और बंदिश पेश की। छत्तीसगढ़ लोकरंग कलाकार सुनील सोनी ने मीठ-मीठ लागे तोर मैया की बानी,.. बंधे रहे डोरी, काने मां बाली, गोरा गोरा गाल से समां बांधा। 

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