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11 साल से मां बनी है टीचर बेटी की \'राइटर\' दोनों मिलकर लेते हैं गणित की क्लासेस

2 वर्ष पहले
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  • 19 साल पहले बेटी की आंखों की रोशनी चली गई तो मां बन गई उसका सहारा 
  • क्लास में पहले संध्या लिखती है ब्लैकबोर्ड पर फिर मां उन्हीं अंकों को स्पष्ट लिखती हैं

संतोष साव। रायगढ़. भास्कर टीम गुरुवार को ये जानने के लिए सरईभदर माध्यमिक शाला में पहुंची। तब संध्या कक्षा 8वीं के 35 बच्चों का क्लास ले रही थीं। ब्लैकबोर्ड के एक साइड में संध्या और दूसरी साइड में उनकी मां शारदा चॉक लेकर खड़ी थीं। संध्या ब्लैकबोर्ड पर छोटे अक्षरों में लिख रहीं थीं जिसे बच्चे नहीं समझ पाते। बगल में खड़ी उनकी मां बड़े अक्षरों में लिखती जो सबकी समझ में आता। 

1) 2005 में शिक्षाकर्मी वर्ग-2 की परीक्षा पास की

19 साल पहले जब मेरी बेटी संध्या एमएससी फाइनल ईयर की तैयारी कर रही थी, तभी उसकी आंखों की रोशनी चली गई। हमने कई जगह उसका इलाज कराया। लाखों खर्च करने के बाद भी उसकी आंखों की रोशनी नहीं लौटी। संध्या पढ़ने में तेज थी। उसने 2005 में शिक्षाकर्मी वर्ग-2 की परीक्षा पास कर ली। पहली पोस्टिंग कोड़ातराई के डूमरपाली गांव में हुई।

 उसे आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी इसलिए तीन साल तक वहां सेवा देने के बाद अपना ट्रांसफर रायगढ़ में करा लिया। 2008 से संध्या सरईभदर के मा. स्कूल में पढ़ाती है। 11 सालों से मैं संध्या के साथ स्कूल जाती हूं। हर रोज हम दोनों ऑटो से स्कूल जाते हैं। संध्या गणित की टीचर है। बच्चों को बोर्ड में लिखकर समझाना पड़ता है। आंखों से देख नहीं सकती इसलिए उसे लिखने में परेशानी होती है। शुरुआत में उसकी लिखावट बच्चों को समझ में नहीं आती थी। 

इसके बाद मैंने उसकी सहायता करना शुरू किया। संध्या क्लास लेती है तो मैं उसके साथ चॉक लेकर खड़ी होती हूं। संध्या जो लिखती है, मैं उसे साफ और बड़ा लिखती हूं ताकि बच्चों के समझ में आ सके। मुझे गणित के फार्मूले नहीं आते थे लेकिन अब मैं भी बना लेती हूं। (जैसा कि शिक्षक संध्या पांडेय की मां शारदा पांडेय ने भास्कर को बताया)

शारदा पांडेय के पति एलपी पांडेय नटवर हायर सेकेंडरी स्कूल में टीचर थे। उनकी पांच बेटियां हैं। जिनमें संध्या सबसे बड़ी हैं। चार बेटियों की शादी हो चुकी है। शारदा ने कहा कि उनकी बेटियां ही उनके लिए सब कुछ हैं। सभी की परवरिश बेटों की तरह की गई है। वे कहती हैं कि अगर बेटियों को अवसर मिले तो वे समाज को दिशा देने के लिए बेहतर काम कर सकती हैं। 

संध्या पांडेय जिले की ऐसी टीचर हैं जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में तीन पुरस्कार मिल चुके हैं। इसमें राष्ट्रपति पुरस्कार अहम है। पहली बार 2008 में संध्या को रमाबाई अंबेडकर पुरस्कार मिला। दूसरी बार 2009 एक्सीलेंट टीचर अवार्ड और तीसरी बार 2011 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ये सभी पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में उनके बेहतर योगदान के लिए मिले हैं। 

संध्या का सब्जेक्ट गणित है। उन्हें किताब का हर पाठ जुबानी याद है। माध्यमिक शाला के सभी बच्चे गणित में अच्छे नंबरों से पास होते हैं। पिछले साल 80 प्रतिशत बच्चों ने गणित में अच्छे अंक हासिल किए हैं। आठवीं कक्षा के छात्र प्रमोद साहू ने बताया कि संध्या मैम के पढ़ाने का तरीका अच्छा है। बच्चे गणित से दूर नहीं भागते। 

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