धोखाधड़ी  / सर्वेयर बन लोगों से अंगूठे का निशान लिया, 25 लाख उड़ाए



Raigarh news 25 lakh rupees cheated from beneficiaries of PMH scheme by becoming Surveyor
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Raigarh news 25 lakh rupees cheated from beneficiaries of PMH scheme by becoming Surveyor

  • जनपद अधिकारी बनकर पीएम आवास के लाभार्थियों के घर जाते थे ठग 
  • आधार नंबर लेकर लोगों के खाते से पार किए रुपए, चार आरोपी गिरफ्तार 

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 11:45 AM IST

रायगढ़. पीएम आवास योजना के लाभार्थियों से अंगूठे का निशान और आधार नंबर की डिटेल लेकर उनके खातों से रुपए निकालने वाले एक गिरोह के चार लोगों को पुलिस ने लैलूंगा से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी जनपद अधिकारी बनकर हितग्राहियों के घर जाते थे। आरोपियों ने जिले में ही लगभग 5 लाख रुपए की ठगी की है। जशपुर, बलरामपुर, अंबिकापुर सहित चार जिलों से लगभग 25 लाख रुपए ठगे हैं। 

आस-पास के कई जिलों में लाेगों को बनाया शिकार

  1. जिले में स्थानीय लोगों से बड़े स्तर पर इस तरह की संगठित ठगी का यह पहला मामला है। कियोस्क शाखा और मोबाइल सिम विक्रेताओं की भी ऐसी ठगी में भूमिका हो सकती है। 11 जनवरी को खरसिया के बानीपाथर, करपीपाली निवासी हेमलाल रौतिया और भारत राम कलार ने खरसिया पुलिस को बताया कि लगभग 12 हजार रुपये उनके खातों से निकाले गए हैं।

  2. कुछ लोग उनके घर आए थे और पीएम आवास के सर्वे करने के नाम पर आधार नंबर लेकर मोबाइल के जरिए उनके खातों से रुपए निकाल लिए। इसकी सूचना मिलने के बाद खरसिया पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। पूछताछ में आरोपियों का हुलिया तो नहीं मिला मगर उनकी गाड़ी का नंबर ट्रेस हो गया। 

  3. इसके बाद सबसे पहले पुलिस ने चेतन यादव को पकड़ा। इसके बाद पूछताछ में उसने अपने अन्य साथी धमेंद्र महंत, संजय तिर्की, बबलू उर्फ श्रवण महंत का नाम बताया। चारों लैलूंगा थाना क्षेत्र के है। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने खरसिया, लैलूंगा, धरमजयगढ़ सहित आसपास के जिले जशपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर में जाकर भी पीएम आवास के हितग्राहियों से ठगी की है।

  4. आरोपी जनपद पंचायत अधिकारी बनकर घर जाते थे और सर्वे के नाम से अकाउंट का पैसा अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके पास से 15 एटीएम, 5 मोबाइल, 3 थंब इंप्रेशन मशीन, एक कंप्यूटर सेट और 5 हजार रुपए जब्त किए गए।

  5. ग्रामीणों के घर जाकर लिए डिटेल 

    आरोपी सबसे पहले जनपद की साइट से हितग्राहियों की लिस्ट निकालते थे। इसके बाद उन ग्रामीणों के घर पहुंचकर उन्हें जनपद पंचायत अधिकारी बताकर सर्वे की बात कहते थे। सर्वे के दौरान मोबाइल से ही सामने वाले हितग्राही का आधार नंबर लेकर उसका अंगूठा मशीन में पंच कराते थे।

  6. इसके बाद उसके खाते से अपने खातों में रुपए ट्रांसफर कर लेते थे। आरोपियों ने अधिकतर गरीब लोगों को टारगेट किया था, जिनके पास मोबाइल भी नहीं होता था। ऐसे में हितग्राही के खाते से रुपए निकलने की जानकारी जानकारी होने से पहले ही वे चले जाते थे। 

  7. बायो इनेबल्ड वॉलेट से करते हैं ठगी 

    जानकारी के अनुसार पे नियर बाई, भीम, पेटीएम इस तरह के सैकड़ों एप्लीकेशन आते हैं। ये आपकी फिंगरप्रिंट के जरिए रुपए ट्रांजेक्शन की अनुमति देते हैं। ऐसे ही एप्लीकेशन में आरोपी आईडी बनाकर रखते थे। इसके अलावा आरोपियों ने मार्केट से मार्फो मशीन ले रखी थी।

  8. इसमें भी पहले आईडी जनरेट करनी पड़ती है। इस आईडी के जरिए ही आरोपियों ने कहां से ट्रांजेक्शन किया है। यह पता चल जाता है, इन्हीं दो संसाधनों के जरिए आरोपी अकाउंट से रुपए ट्रांसफर कर लेते थे। 

  9. गरीबों के पैसे से खरीदी जेसीबी 

    आरोपी लगभग एक साल से ठगी कर रहे थे। गांव-गांव घूमकर इन लोगों ने इतने रुपए ठगे की 12 लाख रुपयों की नई जेसीबी, डेढ़ से दो लाख रुपए की बुलेट और बाइक खरीदी थी। जेसीबी लैलूंगा में ही किराए पर चला रहे थे। पुलिस ने इसे भी जब्त किया है। आरोपियों के पास ग्रीन एटीएम कार्ड भी था।

  10. पुलिस को हालांकि शिकायत नहीं मिली हैं लेकिन आरोपियों के बयान और जब्त सामानों के आधार पर पुलिस मान रही है कि इन लोगों ने 25 लाख रुपए से अधिक की ठगी की है। 

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