38वां चक्रधर समारोह / बांसुरी की सुरीली धुन, लोकगाथा और ओडिसी नृत्य में दिखी गणेश जन्म की गाथा



ओडिसी नृत्य के दौरान गणेशनम की प्रस्तुति देते कलाकार ओडिसी नृत्य के दौरान गणेशनम की प्रस्तुति देते कलाकार
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ओडिसी नृत्य के दौरान गणेशनम की प्रस्तुति देते कलाकारओडिसी नृत्य के दौरान गणेशनम की प्रस्तुति देते कलाकार

  • रामलीला मैदान में लोक वाद्यों की जुगल बंदी और लोक गाथा नृत्य की हुई सराहना
  • छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों से निकली पशु-पक्षियों की आवाजें, अर्द्धनारीश्वर डांस ने मोहा मन

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 12:09 PM IST

रायगढ़. चक्रधर समारोह के नौवें दिन लोक वाद्यों की जुगल बंदी, ओडिसी नृत्य, बांसुरी वादन, तबला वादन के साथ ही लोकगाथा के नाम रही। बांसुरी वादक कलाकार ने संगीत ट्रैक पर सुरीली धुन निकालकर सब का दिल जीत लिया। समारोह की शुरुआत छत्तीसगढ़ी लोक वाद्यों की जुगलबंदी रिखी क्षत्रिय के कार्यक्रम से हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक वाद्यों का अद्भुत संयोजन एवं वादन किया। उनके द्वारा मोहरी, मादर,गाड़ा, टिमकी, ढोल, नाल जैसे विविध वाद्यों संगीत किया। 

बांसुरी और तबले की संगत ने निकले गीतों के स्वर

  1. इसके साथ ही कलाकारों ने पशु,पक्षियों, जानवरों की आवाज अपने वाद्ययंत्रों से निकाली। जिसे सुन लोगों ने जमकर सराहना की। इसके बाद ओडिसी नृत्य में पंडित गजेंद्र कुमार पण्डा व आर्या नंदे ने अपने साथी कलाकारों के साथ गणनायक में गणेश जन्म का नृत्य, किरवाड़ी पल्लवी में भगवान जगन्नाथ पर आधारित नृत्य, अर्द्धनारीशिव में भगवान शंकर और पार्वती के संयुक्त नृत्य की प्रस्तुति की। 

  2. बांसुरी वादन में मुंबई से आई पलक जैन की प्रस्तुति ने सब को झकझोर कर रख दिया। बांसुरी की मधुर ध्वनि से ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा की धुन बजते ही लोग देशभक्ति में रम गए। इसके साथ ही गीतों के ट्रैक पर प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है हर खुशी से हर गम बेगाना होता है,....ओ पालन हारे, निर्गुण और न्यारे, तुम रे बिन हमरा कौनों नाही गाया। इसके साथ ही बांसुरी और तबले के साथ तीन ताल व एक ताल में ध्वनि दी। 

  3. पुणे से आए तबला वादक पद्मश्री विजय घाटे ने गणेश स्तुति से अपनी शुरुआत की। इसके साथ ही कृष्ण वंदना, तबला संगीत में तीन ताल, पेशकार, कायदा, रेला की प्रस्तुति दी। तबले पर ही कथक के माध्यम से खाट, उठान, आमद, चक्कर की तिहाई की अद्भुत प्रस्तुति कर लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में लोकगाथा गौतम चौबे, लोरिक चंद्रा ने छत्तीसगढ़ी में अमर प्रणय गाथा को लोक नाट्यम के माध्यम से प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। 

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