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डायवर्सन व ले आउट बिना बनी हाउसिंग बोर्ड के मकानों का री-सेल नहीं

Raigarh News - छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की पुरानी कॉलोनियों के मकानों की री-सेल नहीं हो पा रही है। 15 साल पहले बनी इन कॉलोनियों की...

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 02:56 AM IST
Raigarh News - residential houses of housing board not built without diversion and lay out
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की पुरानी कॉलोनियों के मकानों की री-सेल नहीं हो पा रही है। 15 साल पहले बनी इन कॉलोनियों की जमीन रिकार्ड में अभी भी सरकारी भूमि है। हाउसिंग बोर्ड ने कॉलोनियों का टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से ले आउट भी पास नहीं कराया है। इस तकनीकी पेंच का खुलासा तब हुआ, जब यहां के मकानों के री-सेल के बाद खरीदी-बिक्री करने वाले दोबारा मकान की रजिस्ट्री कराने पहुंचे। उनसे डायवर्सन और ले आउट के दस्तावेज मांगे गए।

चूंकि जमीन का डायवर्सन नहीं कराया गया, ऐसे में किसी के पास ये दस्तावेज है ही नहीं। रजिस्ट्री कार्यालय में ऐसे मामले के सैकड़ों आवेदन अटके पड़े हैं। रजिस्ट्री अटकने के कारण बरसों पहले सरकारी एजेंसी से प्रापर्टी खरीदने वाले अब जरूरत के समय अपनी संपत्ति बेच नहीं पा रहे हैं। जब रजिस्ट्री के लिए लोगों की संख्या बढ़ने लगी, तब जिला पंजीयक ने हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को डायवर्सन और ले आउट के दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन विभाग के पास दस्तावेज नहीं है। ऐसे में जरूरतमंद लोग परेशान होकर इस दफ्तर से उस दफ्तर भटक रहे हैं। शहर में चिरंजीव दास नगर, बोइरदादर, कोतरा रोड समेत आधा दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां ऐसी हैं जो एक से डेढ़ दशक पुरानी हैं। उस समय मकान बनाने या रजिस्ट्री के नियम इतने सख्त नहीं थे। लोगों की रजिस्ट्रियां आसानी से हो जाती थीं। सरकारी कॉलोनियां होने की वजह से दूसरे विभाग वाले भी कोई आपत्ति नहीं लगाते थे। हाउसिंग बोर्ड ने इसी लचीले नियमों के कारण कॉलोनियां सरकारी व कृषि जमीन पर बना दी, जबकि इनका नियमानुसार डायवर्सन करवाया जाना था।

हाऊसिंग बोर्ड की कॉलोनियों के रिकार्ड भुइयां साफ्टवेयर में अपडेट नहीं होगा तब समस्या यथावत रहेगी

एक्सपर्ट की राय

सिविल मामलों के अधिवक्ता आरके गुप्ता के मुताबिक जिस जमीन पर तीन साल तक लगातार खेती न हो तो उसे कृषि जमीन नहीं माना जाता है। इस आधार पर डायवर्सन किया जा सकता है। नियमों से जो लोग प्रभावित हैं, उन्हें राजस्व सचिव और कलेक्टर को इस बात की जानकारी देकर आवश्यक सुझाव लेना चाहिए। अफसर इस मामले में सरकारी एजेंसियों को निर्देश दे सकते हैं। इसके बावजूद मामला नहीं सुलझता है तो प्रभावित लोग कोर्ट में याचिका भी दायर कर सकते हैं।

इस नियम से बढ़ीं मुश्किलें

सरकार ने 2200 वर्गफीट से कम कृषि जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्सन पर रोक लगा रखी है। यही नियम लोगों पर बेहद भारी पड़ रहा है। हाउसिंग बोर्ड की पुरानी कॉलोनियों में मकान 500, 1000 और 1500 वर्गफीट तक ही जमीन पर बने हैं। यानी 2200 वर्गफीट से कम। सरकारी रिकार्ड में यह जमीन अभी भी कृषि व सरकार की है। इस वजह से जब खसरा नंबर का मिलान किया जा रहा है तो जमीन कृषि या सरकारी ही निकलती है। इसी वजह से ऐसे मकानों की दोबारा रजिस्ट्री नहीं हो रही है।





इसी तरह रजिस्ट्री कराने से पहले कंप्यूटर सिस्टम कॉलोनियों के मकानों पर ले-आउट एप्रूवल है या नहीं इसकी जानकारी मांगता है।

हाउसिंग बोर्ड नहीं दे रहा ध्यान

सब रजिस्ट्रार आरिफ बैग ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड की पुरानी कॉलोनियों के मकानों के री सेल की रजिस्ट्री नहीं हो रही है। पुराने मकानों की रजिस्ट्री के साथ डायवर्सन और ले आउट एप्रूवल की कॉपी नहीं लगाई जा रही है। इस वजह से रजिस्ट्री नहीं हो रही है। रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ ले-आउट एप्रूवल का प्लान भी नहीं मिलता है। इससे सिस्टम आगे की प्रक्रिया के लिए नहीं बढ़ पाता। इस वजह से भी रजिस्ट्री में पेंच आया है।





जब तक राजस्व विभाग पुरानी कॉलोनियों के रिकार्ड भुइयां साफ्टवेयर में अपडेट नहीं करेगा तब तक यह समस्या रहेगी।

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