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बेढंगे चौक-चौराहों को सुधारा जाए तो कम होंगी दुर्घटनाएं, शहर में जाम भी नहीं लगेगा

Raigarh News - शहर में सौदर्यीकरण के नाम पर चौक-चौराहे तो बनाए गए हैं लेकिन तकनीकी अनदेखी के कारण डेंजर प्वाइंट बन गए हैं।...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:51 AM IST
Raigarh News - uncomfortable squares and squares will be improved there will be less accidents even in the city
शहर में सौदर्यीकरण के नाम पर चौक-चौराहे तो बनाए गए हैं लेकिन तकनीकी अनदेखी के कारण डेंजर प्वाइंट बन गए हैं। दिन-ब-दिन सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। ट्रैफिक डीएसपी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अफसर समेत सभी जिम्मेदार इस बात को मानते हैं कि चौराहों की बनावट को सही किया जाए तो ट्रैफिक की समस्या हल हो सकती है।

भास्कर की टीम ने शनिवार को शहर के प्रमुख चौराहों पर डेंजर प्वाइंट्स का जायजा लिया। शहर के भीतर सबसे अधिक संवेदनशील चौक में केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड, अंबेडकर चौक, हंडी चौक, अंबेडकर चौक, चक्रधर नगर, एसईसीएल मुख्यालय से आकर चक्रपथ पर मिलने वाली सड़क और चौराहों का हाल देखा। तीन ओर से आ रहे वाहन सामने से आ रहे वाहन को नहीं देख पाते। इस बीच यदि वाहन की रफ्तार अधिक हो या फिर ड्राइवर का ध्यान भटके तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

इन चौराहों पर तकनीकी दिक्कत के बाद हटाया गया- सौंदर्यीकरण के चलते छातामुड़ा चौक का साइज इतना बड़ा बना दिया गया है कि वाहन चालकों को यहां वाहन मोड़ने में कठिनाई होती है साथ ही दूसरे तरफ का वाहन नजर भी नहीं आता। इस कारण इसे हटा दिया गया। इसी तरह ढिमरापुर चौक को भी सुधाकर उसके गोलाई को छोटा किया गया। ताकि गाड़ियां आराम से मुड़ सके।

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तकनीकी खामियों के कारण डेंजर प्वाइंट बन गए हैं प्रमुख चौराहे

केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड जौहल पैलेस- केवड़ाबाड़ी चौक (होटल जौहल पैलेस के सामने) पर बना ट्रैफिक प्वाइंट सड़क के केंद्र से दूरी पर बना है। यहां इंदिरा नगर, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड, पुलिस लाइन और ढिमरापुर की तरफ से आने वाली सड़कें मिलती हैं। बस स्टैंड और इंद्रानगर की ओर से आकर मिलने वाली सड़क की ओर ढलान है। ढलान के कारण दोनों दिशाओं से आने वाले राहगीरों की देखने की क्षमता कम हो जाती है। चौराहे को केंद्र में बनाकर सिग्नल लगाए जाएं तो सड़कों पर गति और दिशा दोनों पर नियंत्रण होगा।

अंबेडकर चौक- अंबेडकर चौक जिला पंचायत, डिग्री काॅलेज, रेलवे क्रासिंग और कलेक्टोरेट की तरफ से आने वाले वाहन अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं। संकेतक नहीं होने के कारण वाहनों की दिशा पहचानना मुश्किल है। यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

मरीन ड्राइव-चक्रपथ- सर्किट हाउस, हेमूकालानी चौक, एसईसीएल मरीन ड्राइव और कलेक्टोरेट से आने वाली सड़क केलो के किनारे पर पुल के नीचे मिलती है। यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सड़कों के मिलने वाले प्वाइंट पर संकेतक या गति अवरोधक नहीं होने के कारण सड़क पर थोड़ी से चूक जानलेवा हो सकती है।

स्कूल, कॉलेज के सामने संकेतक नहीं

नगर के स्कूल, अस्पताल, कॉलेज जैसी जगहों के सामने संकेतक लगाए जाने हैं। ताकि स्पीड पर कंट्रोल किया जा सके। शहर के व्ययस्तम मार्गो में से रेलवे स्टेशन मार्ग और केएमटी कॉलेज रोड में दो कॉलेज और लाइब्रेरी है। मगर इन जगहों पर संकेतक नहीं लगाए गए है। इस कारण यहां दुर्घटना की आशंका बने रहती है।

समस्याओं को लेकर कर रहे हैं चर्चा


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