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देश में पहली बार हो रही पुरूषों से किन्नरों की शादी, धूमधाम से निकली बारात

2 वर्ष पहले
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  • देश भर से आए पुरूष और किन्नर जोड़े आज बंध रहे दाम्पत्य के बंधन में 
  • सामूहिक शादी में मुख्यमंत्री बघेल समेत प्रदेश के कई मंत्री होंगे शामिल 

रायपुर.राजधानी में शानिवार को 15 घोड़ियों पर पर सज-धज कर बैठे दूल्हे और किन्नर दुल्हनों को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। किन्नर समाज के लोग ढोल-ताशों पर डांस करते नजर आए। दरअसल देश में समलैंगिकता को मान्यता मिलने के बाद पहली बार किन्नरों की शादी हो रही है और वो भी सामूहिक। इस शादी की खास बात ये है कि इसमें दूल्हे किन्नर समाज के नहीं बल्कि ऐसे पुरूष हैं जिन्हें किन्नर से प्यार हो गया। इस शादी को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की कवायद हो रही है।

1) सिविल लाइंस से दोपहर निकली बारात

शनिवार दोपहर 3 बजे सिविल लाइंस से दूल्हों की बारात निकाली गई। अंबेडकर भवन, घड़ी चौक, कालीबाड़ी से टिकरापारा होते हुए बारात पुजारी पार्क स्थित मंडप में पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित यहां किन्नरों की शादी संपन्न कराएंगे।

3) सिविल लाइंस से दोपहर निकली बारात

शनिवार दोपहर 3 बजे सिविल लाइंस से दूल्हों की बारात निकाली गई। अंबेडकर भवन, घड़ी चौक, कालीबाड़ी से टिकरापारा होते हुए बारात पुजारी पार्क स्थित मंडप में पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित यहां किन्नरों की शादी संपन्न कराएंगे।

शनिवार को होने वाली इस शादी में मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विशिष्ट अतिथि गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, रायपुर दक्षिण से भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल, बिलासपुर से विधायक शैलेष पांडेय, रायपुर के महापौर प्रमोद दूबे और पूर्व विधायक अमित जोगी कार्यक्रम में शामिल होंगे। ये शादी चित्रग्राही फिल्म हंसा एक संयोग की ओर से आयोजित हो रही है। 

शनिवार को होने वाली इस शादी में मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विशिष्ट अतिथि गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, रायपुर दक्षिण से भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल, बिलासपुर से विधायक शैलेष पांडेय, रायपुर के महापौर प्रमोद दूबे और पूर्व विधायक अमित जोगी कार्यक्रम में शामिल होंगे। ये शादी चित्रग्राही फिल्म हंसा एक संयोग की ओर से आयोजित हो रही है। 

धारा 377 खत्म होने के बाद देश में पहली बार किन्नरों का सामूहिक विवाह हो रहा है। खास बात ये है कि ये किन्नर दुल्हन पुरूष दूल्हों के साथ विवाह करने जा रही हैं। इस शादी के जरिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी हो रही है। इसमें छत्तीसगढ़ से 7 जोड़ों के अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश से आए जोड़ों की शादी हो रही है।

धारा 377 खत्म होने के बाद देश में पहली बार किन्नरों का सामूहिक विवाह हो रहा है। खास बात ये है कि ये किन्नर दुल्हन पुरूष दूल्हों के साथ विवाह करने जा रही हैं। इस शादी के जरिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी हो रही है। इसमें छत्तीसगढ़ से 7 जोड़ों के अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश से आए जोड़ों की शादी हो रही है।

देशभर में किन्नरों की शादी का रिवाज सिर्फ तमिलनाडु में है। तमिल नववर्ष की पूर्णिमा पर कुवगान में शुरू होने वाले 18 दिन के आयोजन में किन्नरों की शादी होती है। 16 दिन शृंगार समेत दूसरे रिवाज पूरे किए जाते हैं। 17वें दिन इरावन देवता की मूर्ति से किन्नरों की शादी होती है। अगले ही दिन प्रतिमा तोड़ दी जाती है और किन्नर जिंदगीभर के लिए विधवा हो जाती हैं। किन्नराें की शादी की एकमात्र यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

देशभर में किन्नरों की शादी का रिवाज सिर्फ तमिलनाडु में है। तमिल नववर्ष की पूर्णिमा पर कुवगान में शुरू होने वाले 18 दिन के आयोजन में किन्नरों की शादी होती है। 16 दिन शृंगार समेत दूसरे रिवाज पूरे किए जाते हैं। 17वें दिन इरावन देवता की मूर्ति से किन्नरों की शादी होती है। अगले ही दिन प्रतिमा तोड़ दी जाती है और किन्नर जिंदगीभर के लिए विधवा हो जाती हैं। किन्नराें की शादी की एकमात्र यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

किन्नरों की शादी नहीं करने की वजह महाभारत की एक घटना है। शास्त्रों के मुताबिक महाभारत से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी। इस पूजा में एक राजकुमार के बलि चढ़ानी थी। कोई राजकुमार बलि देने तैयार नहीं हुआ तो इरावन यानी किन्नरों के देवता ने कहा कि मैं बलि देने के तैयार हूं, लेकिन साथ ही एक शर्त भी रखी थी कि बिना शादी के वे बलि नहीं चढ़ेंगे। इसके पांडवों के पास कोई रास्ता नहीं था कि कौन सी राजकुमारी इरावन से शादी करेगी और अगले दिन ही विधवा हो जाएगी। इस समस्या का हल श्रीकृष्ण ने निकाला और उन्होंने मोहिनी रूप धारण कर इरावन से शादी की। अगले दिन इरावन ने बलि दे दी और श्री कृष्ण ने विधवा बनकर विलाप किया। 

 

किन्नरों की शादी नहीं करने की वजह महाभारत की एक घटना है। शास्त्रों के मुताबिक महाभारत से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी। इस पूजा में एक राजकुमार के बलि चढ़ानी थी। कोई राजकुमार बलि देने तैयार नहीं हुआ तो इरावन यानी किन्नरों के देवता ने कहा कि मैं बलि देने के तैयार हूं, लेकिन साथ ही एक शर्त भी रखी थी कि बिना शादी के वे बलि नहीं चढ़ेंगे। इसके पांडवों के पास कोई रास्ता नहीं था कि कौन सी राजकुमारी इरावन से शादी करेगी और अगले दिन ही विधवा हो जाएगी। इस समस्या का हल श्रीकृष्ण ने निकाला और उन्होंने मोहिनी रूप धारण कर इरावन से शादी की। अगले दिन इरावन ने बलि दे दी और श्री कृष्ण ने विधवा बनकर विलाप किया। 

 

किन्नरों के धर्मगुरु महर्षि गज अरविंद भी नवदंपतियों को आशीर्वाद देने राजधानी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि समाज ने किन्नरों को कभी स्वीकार नहीं किया। अब तक किन्नर समाज में खुद को अकेला पाता था। यही वजह है कि हमारा समाज कभी विकास नहीं कर पाया, लेकिन अब वो होगा, जो कभी नहीं हुआ। सामाजिक मान्यता के साथ किन्नरों की शादी होगी तो उन्हें न केवल किन्नर समाज बल्कि दूसरे समाज में भी सम्मान मिलेगा। सामाजिक विकास के लिए यह जरूरी भी है। रायपुर में होने जा रहा यह कार्यक्रम ऐतिहासिक है। निश्चित ही इससे सीख लेकर अब देशभर में यह पहल हाेगी।

किन्नरों के धर्मगुरु महर्षि गज अरविंद भी नवदंपतियों को आशीर्वाद देने राजधानी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि समाज ने किन्नरों को कभी स्वीकार नहीं किया। अब तक किन्नर समाज में खुद को अकेला पाता था। यही वजह है कि हमारा समाज कभी विकास नहीं कर पाया, लेकिन अब वो होगा, जो कभी नहीं हुआ। सामाजिक मान्यता के साथ किन्नरों की शादी होगी तो उन्हें न केवल किन्नर समाज बल्कि दूसरे समाज में भी सम्मान मिलेगा। सामाजिक विकास के लिए यह जरूरी भी है। रायपुर में होने जा रहा यह कार्यक्रम ऐतिहासिक है। निश्चित ही इससे सीख लेकर अब देशभर में यह पहल हाेगी।

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