छत्तीसगढ़ / नई सरकार के गठन में 4 दिन शेष, सभी दलों के दावे और 3 समीकरण चर्चा में

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 04:49 AM IST



4 days remaining in the formation of new government
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  • भाजपा को उम्मीद है कि जोगी जितने वोट काटेंगे पार्टी उतनी ही मजबूत होगी
  • दूसरी ओर कांग्रेस को भरोसा है कि कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने उसे बढ़त दिला दी है

रायपुर. प्रदेश में नई सरकार कौन बनाएगा इसका पता चलने में अब सिर्फ 4 दिन शेष हैं। नतीजे आने से पहले सभी दलों के दावे चरम पर हैं और 3 समीकरण प्रदेश में चर्चा में हैं। भाजपा को उम्मीद है कि जोगी जितने वोट काटेंगे पार्टी उतनी ही मजबूत होगी। दूसरी ओर कांग्रेस को भरोसा है कि कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने उसे बढ़त दिला दी है।

 

इन दोनों से इतर जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन जतीय समीकरण के सहारे तीसरी शक्ति बन खुद को सत्ता के केंद्र के रूप में देख रहा है। 2013 की तुलना में इस बार 0.80 फीसदी कम वोटिंग हुई। 2013 में सिर्फ 0.75 फीसदी ज्यादा वोट पाकर भाजपा तीसरी बार सत्ता में काबिज हुई थी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें जोगी कांग्रेस-बसपा गठबंधन, छोटे दल और निर्दलियों को मिलने वाले वोटों के प्रतिशत पर टिकी हुई हैं। इस वजह से राजनीतिक दल पिछले तीनों चुनाव के आंकड़ों को सामने रखकर माथापच्ची तो कर रहे हैं, लेकिन किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहे।

 

भाजपा की उम्मीद: जोगी जितने वोट काटेंगे वो उतनी मजबूती से खड़ी होगी

सत्ताधारी दल भाजपा 15 साल में किए विकास आैर मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के चेहरे के साथ मैदान में उतरी। उज्जवला, मुफ्त मोबाइल, स्मार्ट कार्ड से इलाज के अलावा सभी वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाआें का पार्टी ने चुनाव के दौरान जमकर प्रचार किया। भाजपा नेताआें के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर वे लोगों के बीच गए। भाजपा नेताओं का मानना है कि मतदाता कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के नेताओं के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। इन सभी का भाजपा को लाभ मिलेगा।

 

जोगी कांग्रेस तो कांग्रेस से निकला धड़ा है, इसलिए कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएगा। कांग्रेसियों की आपसी लड़ाई का भी हमें लाभ होगा। बसपा-जोगी कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों से भी भाजपा को ही लाभ होना है। -सच्चिदानंद उपासने, भाजपा प्रवक्ता

 

कांग्रेस को भरोसा: कर्जमाफी और बदलाव के नारे ने बढ़त दिला दी है

प्रदेश में 15 साल से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस को इस बार जीत की पूरी उम्मीद है। पार्टी नेताओं का दावा है कि किसानों की कर्ज माफी और बदलाव की हवा के कारण इस बार कांग्रेस सत्ता हासिल करेगी। इसके अलावा भाजपा सरकार के खिलाफ एंटीइंकमबेंसी, भ्रष्टाचार, धान-किसान, महंगाई, बेरोजगारी और शराबबंदी जैसे मुद्दों से भी पार्टी को आशाएं हैं। प्रदेश का एेसा कोई विभाग नहीं है जहां रिश्वतखोरी न हो। इन सब बातों से पार्टी को फायदा मिलेगा।

 

हम 5 साल से सड़क से सदन तक लोगों के मुद्दों के लेकर लड़ते रहे हैं। किसान कर्जमाफी, बिजली बिल हाफ आैर दारु भट्‌टी साफ नारे के साथ लोग हमसे जुड़े। इसलिए हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं। -भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ

 

जोगी-बसपा गठबंधन: जातीय समीकरण और स्थानीयता के बूते किंगमेकर की आस

जोगी कांग्रेस-बसपा का गठबंधन स्थानीयता और जातीय समीकरणों को ताकत मान रहा है। गठबंधन को  उम्मीद है कि किंगमेकर वही होंगे। जहां तक बसपा का सवाल है, पिछले चुनावों में राज्य की 15 से ज्यादा सीटों पर उसके उम्मीदवारों को जितने वोट मिले, उतने से कांग्रेस या भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। उधर, किसान कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने के वादे के साथ मैदान उतरी जोगी कांग्रेस का दावा है कि ये मुद्दे जीत दिला रहे हैं, इसीलिए गठबंधन को लगता है कि वो तीसरी शक्ति को रूप में स्थापित होगा।

 

हमने 14 बिंदुआें का शपथ पत्र दिया। जो दल अजीत जोगी को सीएम बनाएगा हम उसके साथ गठबंधन करेंगे। दोनों बड़े दल भले पूर्ण बहुमत का दावा कर रहे हों, लेकिन यहां तीसरे मोर्चे के बिना सरकार बनाना संभव नहीं। -अमित जोगी, नेता, जोगी कांग्रेस
 

इतिहास से सीख

2003 में भाजपा को कांग्रेस से 2.55 फीसदी अधिक वोट मिले थे, वहीं 2008 में यह अंतर 1.7 फीसदी पर आ गया था। जबकि 2013 के नतीजे आए तो दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर केवल 0.75 फीसदी था। भाजपा आैर कांग्रेस नेता यह भी मान रहे हैं कि 2003 में विद्याचरण शुक्ल की अगुवाई में एनसीपी ने प्रदेश में जो भूमिका निभाई थी, इस बार जोगी कांग्रेस और बसपा गठबंधन उसी भूमिका में है।

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