खाकी के खिलाफ 2 साल में 6000 मामले

3 वर्ष पहले
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  • भूमाफिया को बचाने से लेकर पुलिस पर ही पीड़ित को प्रताड़ित करने का आरोप
  • राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश पर भी कार्रवाई नहीं

रायपुर (राकेश पाण्डेय). लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए बनी खाकी के खिलाफ दो साल में 6000 से ज्यादा शिकायतें पुलिस मुख्यालय से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक पहुंची हैं। इसके बाद भी आधी से ज्यादा शिकायतों पर आला अफसरों ने कार्रवाई नहीं की। इनमें रिश्वत लेने, पैसे लूटने से लेकर आरोपी को बचाने की भी शिकायतें शामिल हैं। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने जब शिकायतों और गड़बड़ियों पर कोई कार्रवाई नहीं की, तब राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से गुहार लगाई गई। इन शिकायतों पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यालय से भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन लोगों को न्याय नहीं मिला। 


राजधानी में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक : एक अन्य मामले में रायपुर के अनिल दुबे ने 2016 में पीएमओ में शिकायत की थी कि राजधानी में अवैध तरीके से पाकिस्तानी नागरिक निवास कर रहे हैं। वे यहां निवास प्रमाण पत्र, शासकीय लाइसेंस, ठेका और पुलिस प्रमाण पत्र हासिल कर काम भी ले रहे हैं। उन्होंने इसकी जांच कर संवैधानिक कार्यवाही करने की मांग की थी। इस संवेदनशील मुद्दे का भी आज तक निराकरण नहीं किया गया है। 


भूमाफिया ने जमीन हड़पी, रेप किया : भू-माफिया का आतंक राज्य में किस कदर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुर्ग जिले की एक पीड़िता ने भू-माफिया के खिलाफ स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने मिलीभगत कर मामले को दबा दिया। थक हारकर पीड़िता ने पीएमओ में शिकायत की। पीड़िता ने पीएमओ में की गई शिकायत में बताया है कि जब वह अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं हुई तो भूमाफिया ने उसके साथ बलात्कार किया और इसके बाद उसने जमीन भी हड़प ली। एक अन्य मामले में एक महिला ने 2018 में शिकायत की थी कि उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ छल कपट कर शादी की गई और बलात्कार किया गया। उसने भी स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

 

जबरदस्ती निकाले 20 हजार: कोरबा के संजू कुमार साहू ने 2016 में बांकी मोगरा के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ एटीएम से जबरदस्ती 20 हजार रुपए निकालने और फिर पासबुक को वापस नहीं करने की शिकायत की थी। संजू ने थाना प्रभारी पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग की थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
भूमाफिया को बचाने से लेकर पुलिस पर ही पीड़ित को प्रताड़ित करने का आरोप 

 

आरक्षक कर रहा था परेशान: मानिक लाल डहरिया ने 2016 में पुलिस मुख्यालय के एक आरक्षक के खिलाफ राज्यपाल के पास शिकायत की थी। उसने पुलिस आरक्षक पर फेसबुक व सोशल मीडिया के जरिए खुद को और परिवार वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में शिकायतकर्ता को पुलिस की ओर से मदद नहीं मिली। 

 

लंबित शिकायत 

  • राज्यपाल: 976 1748 
  • प्रधानमंत्री: 752 1298 
  • राष्ट्रपति: 47 54 
  • अन्य: 1380 2549 
  • कुल: 3156 5649 

 

पुलिस पर इस तरह की शिकायतें 
2018 में केंवरा साहू ने पुलिस थाना खमतराई में रिपोर्ट लिखाने के बावजूद अभियुक्तों पर कानूनी कार्रवाई न करने और कानूनी संरक्षण देने को लेकर राज्यपाल के पास शिकायत की थी। एक अन्य मामले में एक महिला ने पुलिस थाना अभनपुर के एक उप निरीक्षक पर कृषि भूमि हड़पने और बहू के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। उसने उप निरीक्षक पर दो अन्य व्यक्तियों रूपचंद पवार एवं कांतू कुर्रे के साथ मिलीभगत कर बलपूर्वक कृषि भूमि कब्जा करने और जान से मारने की धमकी देते हुए कोरे स्टांप पेपर में हस्ताक्षर कराने की शिकायत राज्यपाल से की थी। इसके अलावा 2018 में एके सिंह ने एक आरक्षक पर वारंटी अभियान को विफल करने की कोशिशों के खिलाफ शिकायत की थी। इसमें वारंटी सूची में दर्ज आरोपियों से पांच-पांच सौ रुपए में पूरी जानकारी देकर फरार कराने में सहयोग करने के संबंध में शिकायत थी।