आदिवासी आंदोलन / तत्कालीन आईजी और अन्य दोषियों पर मामला दर्ज हो, नहीं तो सीधे कोर्ट जाकर करवाएंगे एफआईआर

A case should be registered against the then IG and other convicts, otherwise they will go to court to get an FIR done.
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A case should be registered against the then IG and other convicts, otherwise they will go to court to get an FIR done.

  • सारकेगुड़ा मामले में पीड़ितों के लिए एक-एक करोड़ का मुआवजा मांगा
  • सर्व आदिवासी समाज ने मंगलवार को इस मामले में बयान जारी किया
     

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 01:15 AM IST

जगदलपुर . सारकेगुड़ा न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट लीक होने के बाद अब इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी है। मंगलवार को सर्व आदिवासी समाज ने इस मामले में बयान जारी किया है और कहा है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई तय नहीं होती है तो फिर समाज के लोग सीधे न्यायालय जाकर दोषियों पर मामला दर्ज करवाएंगे। 


यही नहीं समाज की ओर से मांग की गई है कि मामले के पीड़ितों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा भी दिया जाये। सर्व आदिवासी के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर कल्लो ने कहा कि विधिक जांच से मामला साफ हो गया है कि आदिवासियों की हत्या की गई है। ऐसे में तत्कालीन आईजी बस्तर रेंज पुलिस टीजे लांगकुमेर और अन्य दोषियों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिये। सभी हत्यारों के विरूद्ध नामजद एफआईआर के अलावा पीड़ितों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा भी देने की मांग कर रहे हैं। 


इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में समाज पहले ही जिम्मेदारों को बता चुका है कि मुठभेड़ फर्जी है। सारकेगुड़ा के अलावा अभी तीन चार अन्य मामलों में भी जांच चल रही है उनमें भी निर्दोष ही मारे गये हैं। यहां बड़ी-बड़ी मुठभेड़ों की आड़ में आदिवासियों की हत्या की जा रही है। समाज जांच आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट है लेकिन यदि कार्रवाई में देरी की जाती है तो फिर समाज न्यायालय जाकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करवाएगा। 

आदिवासी समाज ने सरकार से कई प्रश्न भी पूछे जो इस तरह हैं 
 

  •  बस्तर में इतनी फोर्स किसकी सुरक्षा के लिए लगाई गई है।
  •  जिनकी सुरक्षा करनी चाहिए उनकी ही सामूहिक रूप से हत्या यहां हो रही है।
  •  फोर्स और सरकार ये कैसा नक्सल उन्मूलन अभियान चला रही है जिसमें आदिवासियों को गोलियों से भूना जा रहा है। 
  •  संभाग में अंदरूनी क्षेत्रों में संविधान के द्वारा प्रदत्त 
  • अनुच्छेद 21 का उल्लंघन पुलिस व प्रशासनिक अफसर कैसे कर रहे हैं। 

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी बोले- सदन के पटल 
पर रिपोर्ट आ गई, सारे आदिवासी विधायक एकजुट
 
इधर बीजापुर विधायक ने सारकेगुड़ा की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर आ चुकी है। हमने राज्यपाल से मुलाकात की है और मांग रखी है कि इनमें पीड़ितों को 20-20 लाख रुपए का मुआवजा, दोषियों पर एफआईआर की जाये। इस मामले में सभी आदिवासी विधायक एकजुट हैं और सीएम भूपेश बघेल से भी मुलाकात कर हम इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे।

बुरकापाल में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ पर ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की

दोरनापाल | बुरकापाल इलाके में 23 नवंबर को हुई पुलिस- नक्सली मुठभेड़ पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। दुल्लेड़़ गांव के लोगों ने मंगलवार को इस घटना के विरोध में बड़ी सभा आयोजित की  जिसमें प्रदेश सरकार समेत पुलिस के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की गई। ग्रामीणों ने पुलिस जवानों पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सर्चिंग के नाम पर ग्रामीणों की बेदम पिटाई की जा रही है।  


23 नवंबर को भी पुलिस का एक दल ताड़मेटला इलाके की ओर से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान दुल्लेड़ गांव के कोवासी सोमा एवं वंजाम भीमा धान की कटाई कर ताड़मेटला अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे थे जिन्हें पुलिस ने सर्चिंग के मद्देनज़र रास्ते में पकड़ लिया और कुछ दूर ले जाकर उन्हें गोली मार दी।  ग्रामीणों ने कहा कि मारे गए दोनों ग्रामीणों के बच्चे एवं परिवार के अन्य सदस्य इस समय  दुल्लेड़ में ही रहते हैं। ग्रामीणों ने इस घटनाक्रम के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए  मुठभेड़ में शामिल पुलिस जवानों पर कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने जवानों पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस जब भी सर्चिंग पर आती है महिलाओं एवं अन्य लोगों को बिना किसी कारण के बेदम पिटाई करती है।

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