केसीसी का दुरुपयोग / किसानों को 2 लाख का लोन बता एजेंट पास करा रहे 4, किस्त नहीं पटाने पर हाे रही जेल

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 01:57 AM IST



किसानों को झांसा देकर एजेंट कर्ज लेने करते हैं राजी। किसानों को झांसा देकर एजेंट कर्ज लेने करते हैं राजी।
फिर फाइनेंस कंपनी की मदद से ट्रैक्टर का बोझ लाद देते हैं। फिर फाइनेंस कंपनी की मदद से ट्रैक्टर का बोझ लाद देते हैं।
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किसानों को झांसा देकर एजेंट कर्ज लेने करते हैं राजी।किसानों को झांसा देकर एजेंट कर्ज लेने करते हैं राजी।
फिर फाइनेंस कंपनी की मदद से ट्रैक्टर का बोझ लाद देते हैं।फिर फाइनेंस कंपनी की मदद से ट्रैक्टर का बोझ लाद देते हैं।

  • ट्रैक्टर का लालच देकर एजेंट लाद रहे किसानों पर बैंक व फाइनेंस कंपनी का दोहरा कर्ज

जगदलपुर (मो. इमरान नेवी). पांच दिनों से दो किसानों को कर्जा नहीं चुका पाने के कारण जेल भेजने का मामला गरमाया हुआ है। बिचौलिए के चंगुल में सिर्फ ये दो किसान ही नहीं फंसे हैं बल्कि बस्तर में ऐसे एक हजार से ज्यादा किसान हैं जिन्हें बिचौलियों ने कर्जदार बना दिया है। इन किसानों के पास सिर्फ दो ही विकल्प है या तो वे कर्ज न चुकाने के जुर्म में जेल जाएं या फिर अपनी जमीन को कुर्क करवाएं। 


भास्कर ने दो किसानों को जेल भेजने के बाद जब मामले में पड़ताल शुरू की तो पता चला कि किसानों को फंसाने के लिए एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। इसमें सरकारी अफसर से लेकर निजी फाइनेंस कंपनियों के एजेंट तक शामिल हैं। सरकारी कर्मचारी केसीसी के माध्यम से किसानों को लोन देकर अपना टारगेट पूरा कर रहे हैं तो निजी कंपनियां अपने उत्पाद बेचकर लाखों रुपए कमा रही हैं। किसानों से धोखाधड़ी के मामले में जांच अधिकारी बनाए गए एसडीएम जीआर मरकाम से भी कलेक्टोरेट पहुुुंचे किसानों ने इसी तरह की शिकायत की है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया है कि जांच के दौरान हर एंगल को शामिल किया जाएगा और बिचौलियों पर कार्रवाई की जाएगी।

 

केसीसी कार्ड बनने से लेकर धोखाधड़ी की पूरी कहानी

 

ज्यादा से ज्यादा लोन पास करवाता है एजेंट : किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) किसानों के लिए सरकार की योजना है। केसीसी के तहत कर्ज देने का नियम यह है कि जिस किसान की जमीन के बदले कर्ज दिया गया है उसी किसान के खाते में सीधे रकम आएगी लेकिन सरकारी अफसरों, बैंक कर्मचारियों, ट्रैक्टर एजेंसी के संचालकों और निजी फाइनेंस कंपनियों ने बिचौलियों के माध्यम से एक सिंडिकेट बनाया। इसमें पहले बिचौलिया किसान को केसीसी से लोन लेकर ट्रैक्टर लेने के लिए तैयार करता है। इसके बाद किसान को बैंक से सेंटिंग कर ज्यादा से ज्यादा कर्ज दिलाता है। 

 

किसान को ही नहीं पता रहता कि कितना लोन मिला : सिंडिकेट के तहत लोन सीधे ट्रैक्टर बेचने वाले संचालक के कहने पर उसकी एजेंसी से टाइअप हो चुके फाइनेंस कंपनी के खाते में जाते हैं। इसके बाद फाइनेंस कंपनी दस लाख के ट्रैक्टर के बदले बैंक से सीधे तीन से चार लाख लेती है। इस राशि में करीब आधी राशि का एजेंट और अफसर बंदरबांट करते हैं। अगर 4 लाख का लोन पास हुआ है तो 2 लाख रुपए के आसपास ही डाउन-पेमेंट में जमा करवाया जाता है। किसान को बताया जाता है कि सिर्फ 2 लाख का लोन पास हुआ है।

 

भास्कर ने ढूंढा ऐसे ही किसानों को जो कर्ज लेने के बाद ट्रैक्टर लाए और फंस गए 
 

  • केस 1: तोकापाल ब्लाक के साकर गांव में रहने वाला किसान मंगल राम पोड़यामी, केसीसी के तहत जमीन गिरवी रख चार लाख रुपए का कर्ज लिया। यह चार लाख सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने मंगल के खाते के बदले सीधे बैंक से ही ट्रैक्टर बेचने वाले के खाते में ट्रांसफर करवा दिए। ट्रैक्टर खरीदने के चक्कर में अब मंगल राम दोहरे कर्ज में है। 
  • केस 2 : दरभा ब्लाक के चंद्रगिरी के रहने वाले किसान जोगा को भी सिंडिकेट के सदस्यों ने बिचौलिए के माध्यम से फंसाया। जोगा को भी केसीसी से तीन लाख रुपए दिलाए गए और रकम बैंक से ही सीधे ट्रैक्टर एजेंसी के खाते में ट्रांसफर हो गई। अब जोगा दोहरे कर्ज में है।
  • केस 3: दरभा के ही चंद्रगिरी में रहने वाले किसान महादेव को भी दोहरे कर्ज में फंसाया गया। पहले महादेव की जमीन के आधार पर केसीसी से लोन लिया गया और कर्ज के रूप में जो पैसे मिले उसे ट्रैक्टर खरीदने के लिए सीधे बैंक से ही संबंधित ट्रैक्टर एजेंसी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
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