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नक्सली इलाके में ऐश्वर्या महिलाओं को बता रहीं उनके अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ के प्रति बना रहीं जागरुक

एक वर्ष पहले
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महिला समूह के साथ ऐश्वर्या - Dainik Bhaskar
महिला समूह के साथ ऐश्वर्या
  • कोरबा जिले की रहने वाली हैं ऐश्वर्या, गढ़चिरौली के ग्रामीण इलाकों में काम कर रहीं
  • पिरामल फाउंडेशन के गांधी फैलोशिप प्रोग्राम के तहत, बदलाव लाने का प्रयास

कोरबा. बीहड़ वनांचल और धुर नक्सल क्षेत्र के गांवों में कोरबा की ऐश्वर्या सिंह जागरुकता की अलख जगाने का काम कर रही हैं। ऐश्वर्या को नीति आयोग और पिरामल फाउंडेशन ने गांधी फैलोशिप प्रोग्राम के लिए जून 2019 में सलेक्ट किया। उन्होंने टीआईएसएस के जिला कार्यक्रम अधिकारी मृत्युंजय कुमार रंजन से प्रशिक्षण प्राप्त किया। ऐश्वर्या स्कूल लीडरशिप डेवपमेंट प्रोग्राम (एसएलडीपी) के तहत वर्ष 2019-2021 गांधी फैलो के रूप में 8 माह से छत्तीसगढ़ के बस्तर से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के बीहड़ क्षेत्र में रह रही हैं।

नीति आयोग की गाइडलाइन कर रहीं फॉलो
ऐश्वर्या स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों को प्रशिक्षण, बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित करना, उनमें सीखने की ललक जगाने या अध्ययन अध्यापन को नवाचार से सरल-सहज बनाना, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, साक्षरता, रोजगारपरक खेती, स्वच्छता-स्वास्थ्य व हाइजीन, विधिक ज्ञान, नवाचार समेत बहुउद्देशीय क्षेत्र में योगदान दे रही हैं।

प्रेम व जुड़ाव डर को हावी नहीं होने देता
ऐश्वर्या ने बताया कि उनकी पोस्टिंग गढ़चिरौली के धनौरा जैसे रिस्की क्षेत्र में हुई है, जो भारत के इंस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में से एक है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों का नाम सुनकर पहले तो बहुत डर लगा। यह क्षेत्र विकास से करीब 10 साल पीछे है। अब भी फील्ड में जाती हूं, वहां के बच्चों को देख यही लगता है कि आखिर उनकी क्या गलती है, जो हमारे जैसी शिक्षा से वंचित हैं। उनके लिए कुछ करने का मन है। घर से दूर यहां के लोग अब मेरी प्रेरणा बन गए हैं।

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