छत्तीसगढ़ / गंभीर घायल पहाड़ी कोरवा को झेलगी पर 10 किमी ढोकर पहुंचाया अस्पताल, तब मिला इलाज



Ambulance facility not available for critical patient
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Ambulance facility not available for critical patient

  • नेटवर्क नहीं होने से नहीं मिली एंबुलेंस की सेवा, गांव में कुछ ही लोगों के पास हैं फोन

Dainik Bhaskar

Jul 19, 2019, 06:50 AM IST

जशपुरनगर. टांगी के हमले से गंभीर रूप से घायल एक पहाड़ी कोरवा को उसके गांव के दो लाेग मिट्‌टी ढोने वाली झेलगी पर बैठाकर 10 किमी दूर अस्पताल ले गए। सन्ना के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद घायल कोरवा को बगीचा रेफर कर दिया गया है, जहां से उसे अंबिकापुर भेजने की तैयारी है। घटना सन्ना थाना क्षेत्र के ग्राम बलादर पाठ की है। बलादर पाठ निवासी उईला (50) और जीतवा (35) का गांव के बंधुराम से किसी बात को लेकर झगड़ा हाे रहा था।

 

झगड़े में बंधुराम ने टांगी से उईला और जीतवा पर हमला कर दिया, जिसमें उईला के सिर में गंभीर चोट आई। उसकी एक आंख फूट गई और सिर से खून बहने लगा। हमले में गंभीर रूप से घाायल उईला होश में था। उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के पास काेई संसाधन नहीं था। गांव के बसंत और सुनील ने मिट्टी ढोने वाली कांवर में उईला को बिठाया और अस्पताल की ओर रवाना हुए।

 

इस दौरान सड़क पर चलते हुए उनकी वीडियो किसी ने बना ली और सोशल मीडिया में वायरल भी कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद संजीवनी एंबुलेंस कर्मचारियों ने जब बसंत और सुनील से एंबुलेंस की सहायता नहीं मांगने के संबंध में पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके गांव में किसी भी मोबाइल का नेटवर्क काम नहीं करता है। गांव में कुछ ही लोगों के पास फोन है। हमें जो साधन मिला, उसमें हम मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच गए। 

 

नहीं आया सहायता के लिए कॉल : इस संबंध में संजीवनी एंबुलेंस के जिला प्रभारी ने बताया कि उनके पास बलादर पाठ से कोई काॅल नहीं आया है। उन्होंने रायपुर ऑफिस में भी इसकी जानकारी ले ली है।

 

भास्कर सवाल: वीडियो बनाना जरूरी या सहायता पहुंचाना 
घटना की वीडियो गुरुवार को दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। लोगों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, जिस स्थान पर वीडियो बनाया गया है वह पक्की सड़क है। जहां से कई गाड़ियां पार हो रही। एक ग्रामीण के सिर से बह रहा खून व फूटी हुई आंख को देखकर सभी ने झेलगी पर बैठे मरीज की फोटो खींचने व वीडियो बनाने पर जोर दिया। कई गाड़ियां गुजर गई पर किसी ने भी घायल को अपनी गाड़ी में अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की। यह तो ग्रामीण जंगल में रहने वाला पहाड़ी कोरवा है, जिसने इस गंभीर जख्म को सह लिया। शहरी जीवन जीने वाले किसी व्यक्ति को यदि इतनी चोटें रहती तो वह शायद ही होश में रह पाता।

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