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फैसला / एडीजे कोर्ट में भी हो सकेगी आर्बिटेशन केस की सुनवाई



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  • अब तक डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में ही होती थी
     

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 11:34 PM IST

बिलासपुर. अब एडीजे कोर्ट में भी आर्बिटेशन केस की सुनवाई हो सकेगी। ये फैसला हाईकोर्ट की फुल बेंच ने दिया है। अब तक डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में ही इन मामलों की सुनवाई होती थी। प्रदेश के 23 जिला कोर्ट में आर्बिटेशन में हजारों मामले पेंडिंग हैं। 

 

ये जानकारी देते हुए दुर्ग के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। चीफ जस्टिस ने अप्रैल में मामले को सुनवाई के लिए फुल बेंच को रेफर किया था। जस्टिस प्रशांत मिश्रा, जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस आरपी शर्मा की बेंच ने अहम निर्णय देते हुए कहा कि इन मामलों पर एडीजे कोर्ट में भी सुनवाई हो सकती है।

 

प्रदेश में औद्योगिकीकरण के बाद आर्बिटेशन यानी मध्यस्थता से निपटारों के लिए कोर्ट आने वाले मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा 2005 में आरडीए विरुद्ध सुमन कंस्ट्रक्शन के मामले में दिए गए निर्णय के मुताबिक आर्बिटेशन के मामलों में सिर्फ डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज को सुनवाई करने का अधिकार है। 


पिछले साल तक प्रदेश के 23 जिला कोर्ट में 859 मामले लंबित थे। दुर्ग के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर समस्या की जानकारी देते बताया था कि हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा 2005 में दिए गए आदेश की वजह से मामले सुनवाई के लिए एडीजे कोर्ट को ट्रांसफर नहीं किए जा रहे, इस वजह से आर्बिटेशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

 

चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट रूल्स 2007 के नियम 28(3) के अंतर्गत मामले को सुनवाई के लिए फुल बेंच को रेफर कर दिया था। फुल बेंच को इस तथ्य पर निर्णय लेना था कि आर्बिटेशन के अवार्ड से जु़ड़े या अन्य आवेदनों पर सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार सिर्फ डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की कोर्ट का है या इस पर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की कोर्ट में भी सुनवाई की जा सकती है।

 

फुल बेंच ने मामले पर अप्रैल में सुनवाई शुरू की। हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट डॉ. निर्मल शुक्ला और प्रमोद वर्मा के साथ ही एडवोकेट प्रफुल्ल भारत और सुनील ओटवानी को न्याय मित्र नियुक्त किया था।

 

प्रदेश के सभी कोर्ट हाईकोर्ट के अधीनस्थ :
हाईकोर्ट ने मामले पर दिए गए फैसले में कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 3 में हाईकोर्ट के अधीनस्थ न्यायालयों की व्याख्या की गई है, इसके तहत प्रदेश के सभी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और सिविल कोर्ट को हाईकोर्ट का अधीनस्थ न्यायालय माना गया है।

 

दूसरे शब्दों में एडीजे कोर्ट को डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट का अधीनस्थ न्यायालय नहीं माना जा सकता। आर्बिटेशन के अवार्ड या अन्य आवेदनों को डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट द्वारा सामान्य या विशेष आदेश के तहत सुनवाई के लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट ट्रांसफर किया जा सकता है।
 

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