डीबी ओरिजिनल / ज्यादातर खेल संघों के दफ्तरों में ताले, आधे मान्यता प्राप्त खेलों के लिए कोच नहीं, स्पर्धा नहीं होने से एस्ट्रोटर्फ खराब

तीरंदाजी के लिए जो शेड तैयार किया गया है, वह साइकिल स्टैंड जैसा बना दिया गया। तीरंदाजी के लिए जो शेड तैयार किया गया है, वह साइकिल स्टैंड जैसा बना दिया गया।
खिलाड़ी हॉकी स्टेडियम के सामने मैदान पर बोरे का टार्गेट बनाकर निशाना लगा रहे हैं। खिलाड़ी हॉकी स्टेडियम के सामने मैदान पर बोरे का टार्गेट बनाकर निशाना लगा रहे हैं।
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तीरंदाजी के लिए जो शेड तैयार किया गया है, वह साइकिल स्टैंड जैसा बना दिया गया।तीरंदाजी के लिए जो शेड तैयार किया गया है, वह साइकिल स्टैंड जैसा बना दिया गया।
खिलाड़ी हॉकी स्टेडियम के सामने मैदान पर बोरे का टार्गेट बनाकर निशाना लगा रहे हैं।खिलाड़ी हॉकी स्टेडियम के सामने मैदान पर बोरे का टार्गेट बनाकर निशाना लगा रहे हैं।

  • इस साल खेलो इंडिया में यूथ बिना प्रैक्टिस के गए और देशभर में 25वें नंबर पर रहकर लौटे

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 08:38 AM IST

रायपुर  (शेखर झा/सुमय कर). पूरे देश की नजर खेलो इंडिया यूथ गेम्स पर है। देश में खेलों का भविष्य यहीं से तय होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ में खेल संघों की बदइंतजामी ने यहां के खिलाड़ियों को खेलो इंडिया में प्रदर्शन के लायक नहीं छोड़ा है। इस साल खेलो इंडिया में यूथ बिना प्रैक्टिस के गए और देशभर में 25वें नंबर पर रहकर लौटे। हालात ये हैं कि छत्तीसगढ़ में मान्यताप्राप्त खेलों के 22 संघ हैं। भास्कर टीम ने इनमें से दर्जनभर में लगातार ताले लटके देखे हैं। गोवा में 2020 में नेशनल गेम्स होने हैं। इसमें छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यहां एथलेटिक्स, कुश्ती, तीरंदाजी, जिमनास्टिक, कयाकिंग-केनोइंग, बैडमिंटन, टेनिस और स्क्वैश के कोच ही नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी के तीन, एथलेटिक्स का एक, क्रिकेट का एक, स्वीमिंग का एक और इंडोर स्पोर्ट्स के लिए एक स्टेडियम बनाया गया है।

लेकिन इनमें सालभर में एकाध इवेंट ही हो रहा है, वह भी घरेलू जैसा। पिछले साल बने एथलेटिक्स स्टेडियम का सिंथेटिक ट्रेक भी उखड़ने लगा है, जबकि वहां केवल 3 आयोजन ही हो सके हैं। छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर सरकार ने क्रिकेट, हॉकी और एथलेटिक्स के लिए स्टेडियम और ग्राउंड तो बनाए, लेकिन खिलाड़ियों को ओलंपिक के लायक बनाने कोई तगड़ी पहल नहीं की है। यही वजह है कि यहां इंटरनेशनल क्रिकेट और हॉकी स्टेडियम तो हैं, लेकिन दोनों की नेशनल टीमों में वर्तमान में यहां से एक भी खिलाड़ी नहीं हैं। दोनों ही खेलों के स्टेडियम में इंटरनेशनल लेवल के एक-दो मैच होने के बाद अब न तो खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के काम आ रहे हैं, न ही दूसरे बड़े आयोजन की कोशिश की जा रही है। कुछ खेल तो ऐसे हैं, जिनके दर्जनों आयोजन यहां हो चुके हैं, लेकिन हमारे नाम एक भी मैडल नहीं है। हद तो यह है कि तीरंदाजी के लिए जो शेड तैयार किया गया है, वह साइकिल स्टैंड जैसा बना दिया गया है, उसमें प्रैक्टिस नहीं की जा सकती। इसलिए खिलाड़ी हॉकी स्टेडियम के सामने मैदान पर बोरे का टार्गेट बनाकर निशाना लगा रहे हैं।

तीरंदाजी प्रैक्टिस खुले मैदान पर

खेल विभाग की ओर से पिछले 5 सालों से तीरंदाजी की डे बोर्डिंग अकादमी चलाई जा रही है। इस दौरान विभाग की ओर इक्विपमेंट के लाखों रुपए भी खर्च किए गए। लेकिन मेडल के नाम पर निराशा ही हाथ लगी। खिलाड़ी स्कूल और ओपन नेशनल में केवल भागीदारी ही दे रहे हैं। इसके अलावा रायपुर खेल संचालनालय के सामने खिलाड़ी खुले मैदान में प्रैक्टिस करते हैं। राज्य निर्माण के बाद अब तक प्रैक्टिस के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई है।

जहां कोच नहीं है वहां भर्ती को लेकर काम किया जा रहा है 

खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए हर संभव मदद की जा रही है। जिन खेलों में कोच नहीं है उनकी भर्ती को लेकर भी काम किया जा रहा है। हर कर्मियों को जल्द से जल्द दूर किया जाएगा। - उमेश पटेल, खेल मंत्री

रविवि के पास हैं स्पोर्ट्स के 15 प्रोफेसर

  •  स्कूल शिक्षा विभाग में 120 पद, 46 कार्यरत 74 खाली।
  •  खेल विभाग में 15 में से 7 कोच, हाॅकी-तीरंदाजी की डे-बोर्डिंग।
  •  रविशंकर यूनिवर्सिटी के पास हैं स्पोर्ट्स के 15 प्रोफेसर।
  •  साईं में तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, जूडो, बैडमिंटन कोच ही।

जूडो में कोच नहीं, हाॅल भी लाॅक
जूडो की प्रैक्टिस के लिए खुद की बिल्डिंग नहीं है। दूसरे विभाग या कंपनी से मिले हॉल में बच्चों को प्रैक्टिस करवाते हैं। प्रदेश के 21 जिले में जूडो की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद भी एक भी कोच नहीं है। हालांकि अधूरी प्रैक्टिस के दम पर खिलाड़ी स्टेट और नेशनल स्तर के टूर्नामेंट में मेडल भी ला रहे हैं।

कबड्डी संघ 27, मैट 7 जगह ही
1999 से छत्तीसगढ़ के कबड्डी खिलाड़ी नेशनल चैंपियनशिप में उतर रहे हैं। लेकिन संघ की आपसी लड़ाई का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में 27 जिला संघ कार्य कर रहे है, लेकिन कबड्डी संघ और खेल विभाग केवल 7 जगह ही मैट उपलब्ध करवा सका है।

मिट्टी के मैदान पर खोखो प्रैक्टिस
खो-खो खेल की भी स्थिति भी अन्य खेलों की तरह है। खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने के लिए एक भी स्टेडियम नहीं है। मिट्‌टी के ग्राउंड पर ही प्रैक्टिस करना पड़ता है। इसके बाद भी खिलाड़ियों ने इंडिया टीम में जगह बनाई है। इंटरनेशनल टेस्ट सीरीज और इंडो नेपाल जैसे बड़े टूर्नामेंट में टीम चैंपियन भी रही हैं।

खिलाड़ी टॉप-10 में, बस मैडल नहीं
छत्तीसगढ़ के जूनियर स्क्वैश खिलाड़ी वंश चंद्राकर और रेयांश जायसवाल ऑल इंडिया रैंकिंग में टॉप-10 में शामिल है। इसके अलावा अन्य खिलाड़ी टॉप 50 में काबिज है। इसके बावजूद प्रदेश में इस खेल को गंभीरता से नहीं लिया। रायपुर के अलावा दूसरे जिले से कोई भी नेशनल चैंपियनशिप में नहीं उतर पाते।

टेबल टेनिस सिर्फ स्पर्धा तक सीमित
टेबल टेनिस में भी छत्तीसगढ़ पिछले 19 सालों से केवल भागीदारी ही कर रहा है। हर साल संघ की ओर से डिस्ट्रिक्ट और स्टेट लेवल टूर्नामेंट कराए जाते है। जिसके बाद खिलाड़ियों का चयन नेशनल के लिए किया जाता है। इस पूरे प्रोसेस में लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं।

खेलों के विकास के लिए हर संघ को साल में 75 हजार रु. अनुदान 
खेल विभाग की ओर से हर मान्यता प्राप्त संघ को अनुदान देने की व्यवस्था है। विभाग ने करीब 22 राज्यस्तरीय खेल संघों को मान्यता दी है। संघ को हर साल मान्यता लेनी होती है। विभाग हर साल 30 हजार रुपए अनुदान देता है। 

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