छत्तीसगढ़ / शबरी नदी किनारे बलुआ चट्‌टानों पर हजारों साल से हो रहे जल कटाव से बनीं आकृतियां

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 09:51 AM IST


नदी के बहाव से चट्‌टानों में आकृतियां उकेर गई हैं। नदी के बहाव से चट्‌टानों में आकृतियां उकेर गई हैं।
छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल होंगी यह तस्वीरें। छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल होंगी यह तस्वीरें।
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नदी के बहाव से चट्‌टानों में आकृतियां उकेर गई हैं।नदी के बहाव से चट्‌टानों में आकृतियां उकेर गई हैं।
छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल होंगी यह तस्वीरें।छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल होंगी यह तस्वीरें।
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  • सुकमा जिले के छिंदगढ़ गांव की है यह तस्वीर, छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में होगी शामिल
  • पर्यटन मंत्री ने कहा- मैं वहां खुद जाकर पर्यटन की संभावनाएं तलाश करेंगे

रायपुर .  सुकमा जिले में छिंदगढ़ गांव है। पहाड़ों से होते हुए शबरी नदी इस गांव से गुजरती है। आर्कियोलाॅजिस्ट डाॅ. अरुण शर्मा के अनुसार शबरी का पानी हजारों साल से दोनों तटों के पत्थरों पर धाराएं उकेर रहा है। कुछ ऐसी ही धाराएं दंतेवाड़ा में शंखनी और डंकिनी नदी ने उकेरी हैं।

 

आर्कियोलाॅजिस्ट बताते हैं कि यह चट्‌टानों में यह आकृतियां इसलिए उकेर जाती है क्योंकि दक्षिण छत्तीसगढ़ में बलुआ पत्थर की चट्‌टानें हैं, ये कमजोर होती हैं। बारिश के दिनों में नदी की धार तेज हो जाती है। इससे तेज वेग से नदी का बहता पानी धीरे-धीरे चट्टानों में आकृतियां बना देता है।

 

फोटो को छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल करेंगे: पर्यटन मंत्री

राज्य के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि इस फोटो को छत्तीसगढ़ के कैलेंडर में शामिल करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद टीम के साथ वहां जाएंगे और पर्यटन की संभावनाएं तलाशेंगे।

 

अमेरिका के आर्चेस पार्क में हर साल आते हैं 10 लाख पर्यटक

अमेरिका के यूटा प्रांत में स्थित है आर्चेस नेशनल पार्क। यहां भी बलुआ पत्थर की चट्‌टानें हैं। पार्क में हर साल करीब 10 लाख लोग ट्रैकिंग, बाइकिंग, हाईकिंग, कैंपिंग के लिए आते हैं। दुनिया में ऐसी चट्‌टानों वाली और कई जगह हैं जो पर्यटन स्थल के रूप में विकसित की गई हैं।

 

rr

 

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